छत्तीसगढ़ में पटवारी हड़ताल पर सरकार सख्त, एस्मा लगाने की तैयारी की खबर; 15 नवंबर से धान खरीदी से पहले बढ़ा संकट

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल को लेकर सरकार और कर्मचारी संगठन के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। 13 अक्टूबर से शुरू हुआ आंदोलन 6 नवंबर को 24वें दिन भी जारी बताया गया है। एक तरफ पटवारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, तो दूसरी तरफ शासन-प्रशासन ने काम पर लौटने का दबाव बढ़ा दिया है। इसी बीच हड़ताल समाप्त कराने के लिए एस्मा लगाने की तैयारी की खबर सामने आई है। हालांकि, अभी तक एस्मा लागू करने का कोई अधिकृत आदेश सामने नहीं आया है।

15 नवंबर से प्रदेश में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने वाली है। ऐसे समय में पटवारियों की हड़ताल ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। डिजिटल क्रॉप सर्वे, गिरदावरी और किसानों के अभिलेखों के सत्यापन जैसे काम प्रभावित होने की खबरें सामने आ रही हैं। इसका असर आगामी धान खरीदी की तैयारियों पर भी पड़ सकता है।

150 से अधिक पटवारियों को नोटिस, प्रदेश अध्यक्ष भी निलंबित

6 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, पटवारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष भागवत कश्यप को निलंबित किया गया है और 150 से अधिक पटवारियों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। प्रशासन की ओर से हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटने का दबाव बनाया जा रहा है।

इससे पहले बिलासपुर संभाग में 259 और सरगुजा संभाग के छह जिलों में 819 पटवारियों को काम पर लौटने के लिए नोटिस जारी किए जाने की खबर आई थी। कुछ जिलों में अनुपस्थिति को सेवा में व्यवधान यानी ब्रेक इन सर्विस मानने और नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

हालांकि, अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में निलंबन और नोटिस के आंकड़ों में अंतर है। इसलिए सभी आंकड़ों को जोड़कर एक निश्चित प्रदेशव्यापी संख्या बताना उचित नहीं होगा।

क्या पटवारियों पर लगेगा एस्मा?

हड़ताल के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार पटवारियों पर एस्मा लागू करने जा रही है? 6 नवंबर की रिपोर्ट में राजस्व विभाग की ओर से एस्मा लगाने की तैयारी और जल्द आदेश जारी होने के संकेतों का उल्लेख किया गया है।

लेकिन इसी रिपोर्ट में पटवारी संघ के अध्यक्ष कमलेश तिवारी ने कहा है कि फिलहाल एस्मा लगाए जाने की कोई अधिकृत जानकारी उन्हें नहीं मिली है। ऐसे में अभी यह कहना सही नहीं होगा कि पटवारियों पर एस्मा लागू हो चुका है।

सरकार की ओर से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी पटवारियों से काम पर लौटने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को दूसरे तरीके से भी रखा जा सकता है।

आखिर क्यों हड़ताल कर रहे हैं पटवारी?

पटवारी संघ के आंदोलन के पीछे पीवी ऐप की तकनीकी समस्याओं सहित वेतन और पदोन्नति से जुड़े मुद्दे प्रमुख बताए जा रहे हैं।

पटवारी संगठन की ओर से उठाए जा रहे प्रमुख मुद्दे इस प्रकार हैं—

  • पीवी ऐप की तकनीकी खामियों को दूर किया जाए।
  • वेतन विसंगतियों का समाधान किया जाए।
  • राजस्व निरीक्षक यानी आरआई पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया में सुधार किया जाए।
  • ऐप और डिजिटल सर्वे से जुड़े कामों को व्यावहारिक बनाया जाए।

पटवारियों का कहना है कि कई ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या रहती है। सर्वर डाउन होने और डेटा अपलोड में देरी के कारण निर्धारित समय में काम पूरा करना मुश्किल होता है। उनका यह भी कहना है कि तकनीकी समस्याओं के समाधान और जरूरी प्रशिक्षण के बिना डिजिटल सत्यापन का दबाव बढ़ रहा है।

ये समस्याएं और मांगें पटवारी संगठन की ओर से उठाई गई हैं। इन पर शासन का विस्तृत आधिकारिक पक्ष और समाधान की समयसीमा सार्वजनिक रूप से स्पष्ट होना अभी बाकी है।

धान खरीदी से पहले किसानों की बढ़ सकती है परेशानी

छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू होने की तैयारी है। इससे पहले खेतों का डिजिटल क्रॉप सर्वे, गिरदावरी और किसानों के रिकॉर्ड का सत्यापन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पटवारियों की अनुपस्थिति से इन कामों में देरी होने की आशंका है। इसके अलावा आम नागरिकों के कई राजस्व संबंधी काम भी प्रभावित हो सकते हैं, जिनमें—

  • आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र के लिए जांच प्रतिवेदन।
  • जमीन का नामांतरण और बंटवारा।
  • सीमांकन से जुड़े मामले।
  • राजस्व अभिलेखों में सुधार।
  • फसल क्षति का सर्वे और राहत संबंधी प्रक्रिया।
  • डिजिटल क्रॉप सर्वे और किसान अभिलेखों का सत्यापन।

इन सेवाओं में देरी का सीधा असर आम नागरिकों और किसानों पर पड़ सकता है। खासकर उन किसानों की चिंता बढ़ सकती है जिनके खेतों का सर्वे या रिकॉर्ड सत्यापन समय पर पूरा नहीं हो पाता।

मठपुरैना में जारी है पटवारियों का आंदोलन

रिपोर्ट के अनुसार, तूता से हटाए जाने के बाद पटवारी मठपुरैना स्थित हनुमान मंदिर परिसर में आंदोलन जारी रखे हुए हैं। 5 नवंबर को पटवारियों ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया और सरकार को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की।

आंदोलनकारियों ने निलंबन और नोटिस जैसी कार्रवाई का विरोध करते हुए इसे रोकने की मांग की है। दूसरी तरफ प्रशासन का कहना है कि जरूरी सरकारी काम प्रभावित हो रहे हैं और कर्मचारियों को अपने कर्तव्यों पर लौटना चाहिए।

अब आगे क्या होगा?

पटवारी हड़ताल को लेकर आने वाले कुछ दिन महत्वपूर्ण हो सकते हैं। एक ओर 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू होने वाली है, वहीं दूसरी ओर पटवारी संगठन अपनी मांगों पर समाधान चाहता है। सरकार की ओर से सख्ती और आंदोलन जारी रहने के बीच बातचीत से कोई रास्ता निकलता है या नहीं, इस पर किसानों और आम नागरिकों की नजर रहेगी।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि धान खरीदी से पहले पटवारियों की हड़ताल समाप्त होगी या किसानों को राजस्व और सर्वे संबंधी कामों में और इंतजार करना पड़ेगा।

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