इस दशहरे रावण नहीं, मैकाले का पुतला जलेगा! आखिर क्यों हो रहा है ऐसा?

0

बच्चों के हाथों मैकाले के पुतले का दहन! रायपुर में मातृभाषा और भारतीय संस्कृति का संदेश

रायपुर। दशहरे पर रावण दहन तो आपने कई बार देखा होगा, लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि रावण की जगह मैकाले का पुतला जलाया जाए? छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में ऐसा ही एक अनोखा आयोजन प्रस्तावित है। इसकी खास बात यह है कि विभिन्न समाजों के छोटे बच्चों के हाथों मैकाले के पुतले का दहन कराने की योजना है। आयोजकों का उद्देश्य बच्चों को अपनी मातृभाषा, देश, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत से परिचित कराने का संदेश देना है।

आयोजन के पोस्टर के अनुसार, 20 अक्टूबर 2026 को हिंद स्पोर्ट्स एसोसिएशन मैदान, लाखे नगर चौक, रायपुर में दोपहर 3 बजे से कार्यक्रम प्रस्तावित है। “दानव मैकाले का दहन” और “मानसिक गुलामी से आजादी” के संदेश के साथ शस्त्र पूजा, दीप प्रज्वलन, जस गीत और छत्तीसगढ़ी नृत्य जैसे कार्यक्रम भी रखे गए हैं।

रावण नहीं, मैकाले क्यों? बच्चों को लेकर क्या है सोच?

आयोजकों के अनुसार, विभिन्न समाजों के बच्चों की सहभागिता के जरिए नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और देश के इतिहास से जोड़ने का संदेश दिया जाएगा। उनका मानना है कि आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी जड़ों और सांस्कृतिक पहचान को समझना भी जरूरी है।

शिवसेना यूबीटी छत्तीसगढ़ के प्रदेश उपाध्यक्ष राहुल सिंह परिहार ने भी भारतीय शिक्षा व्यवस्था, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। अखबार में प्रकाशित उनके वक्तव्य के अनुसार, शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्र, समाज, संस्कृति और व्यक्ति की पहचान का आधार है।

परिहार ने प्राचीन भारतीय गुरुकुल शिक्षा पद्धति का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य पहले बेहतर इंसान बनाना और फिर व्यक्ति में समाज तथा राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करना होना चाहिए। उन्होंने मानसिक गुलामी की सोच से बाहर निकलकर अपनी भाषा, समाज, संस्कृति और राष्ट्र को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।

मैकाले की शिक्षा नीति पर सवाल क्यों उठते हैं?

थॉमस बैबिंगटन मैकाले ने 2 फरवरी 1835 को भारत में शिक्षा पर अपना प्रसिद्ध Minute on Indian Education प्रस्तुत किया था। इसमें उन्होंने सरकारी शिक्षा के संसाधनों को अंग्रेजी भाषा और यूरोपीय ज्ञान-विज्ञान की शिक्षा की ओर केंद्रित करने की वकालत की थी। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को आधार बनाकर आयोजक मैकाले के पुतले के दहन को औपनिवेशिक शिक्षा संबंधी सोच के विरोध का प्रतीक बता रहे हैं।

हालांकि, भारत की शिक्षा व्यवस्था का इतिहास अनेक नीतियों और सामाजिक बदलावों से जुड़ा है। इसे केवल एक व्यक्ति के फैसलों से जोड़कर देखना अधूरा होगा।

मातृभाषा में शिक्षा पर भी जोर

भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में जहां संभव हो, कम-से-कम कक्षा 5 तक और बेहतर हो तो कक्षा 8 तथा आगे तक मातृभाषा, घर की भाषा या स्थानीय भाषा में शिक्षा देने पर जोर दिया गया है। आयोजन के पीछे भी बच्चों को अपनी भाषा और संस्कृति से परिचित कराने का विचार प्रमुख है।

पोस्टर में इन अतिथियों के नाम

आयोजन के पोस्टर में चार अतिथियों के नाम दिए गए हैं:

– श्री अमिताभ दुबे — अध्यक्ष, हिंद स्पोर्ट्स एसोसिएशन

– श्री गिरिश पंकज — वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार

– श्री प्रभात मिश्रा — अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग

– डॉ. सुरेश शुक्ला — समाजसेवी

पोस्टर में आयोजक के रूप में सनातन संस्कृति रक्षक और संयोजक के रूप में राहुल सिंह परिहार का नाम दिया गया है। अतिथियों की उपस्थिति और पदनाम की पुष्टि आयोजकों से की जानी चाहिए।

अब नजर आयोजन पर

रायपुर का यह प्रस्तावित कार्यक्रम दशहरे के पारंपरिक आयोजन से अलग शिक्षा, मातृभाषा और सांस्कृतिक पहचान जैसे मुद्दों को सामने ला रहा है। बच्चों की सहभागिता के जरिए आयोजक यह संदेश देना चाहते हैं कि नई पीढ़ी आधुनिक ज्ञान हासिल करने के साथ अपनी भाषा, संस्कृति और इतिहास से भी जुड़ी रहे।

कार्यक्रम की जानकारी

– तारीख: 20 अक्टूबर 2026

– समय: दोपहर 3 बजे से

– स्थान: हिंद स्पोर्ट्स एसोसिएशन मैदान, लाखे नगर चौक, रायपुर

– आयोजक: सनातन संस्कृति रक्षक

नोट: कार्यक्रम की समय-सारणी और अतिथियों की उपस्थिति की जानकारी आयोजकों से पुष्टि कर लें।

CG Dastak — हर खबर, सीधा सच!

वेबसाइट: https://www.cgdastak.com/

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here