
धमतरी। CG DASTAK
नवविवाहिता की मौत के बाद ग्रामीणों ने जताई आपत्ति, परिवार पर समाज से अलग रहने का आरोप; बातचीत के बाद हिंदू रीति-रिवाज से हुआ अंतिम संस्कार

धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नवागांव में एक नवविवाहिता की मौत के बाद अंतिम संस्कार को लेकर गांव में विवाद की स्थिति निर्मित हो गई। ग्रामीणों और समाज के लोगों ने परिवार द्वारा अंतिम संस्कार किए जाने के तरीके को लेकर आपत्ति जताई। मामला बढ़ने के बाद गांव में कई घंटे तक बैठक और बातचीत का दौर चला। आखिरकार परिवार और ग्रामीणों के बीच सहमति बनने के बाद महिला का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार किया गया।

मिली जानकारी के अनुसार नवागांव निवासी पियन साहू (55) की अचानक मौत हो गई थी। परिवार ने अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू की, लेकिन इसी दौरान ग्रामीणों और समाज के लोगों ने आपत्ति जताई। उनका कहना था कि अंतिम संस्कार गांव और समाज की परंपराओं के अनुसार किया जाना चाहिए।
परिवार के धार्मिक जुड़ाव को लेकर ग्रामीणों ने जताई आपत्ति
ग्रामीणों और समाज के लोगों का आरोप था कि मृतका का परिवार पिछले कुछ वर्षों से ईसाई मिशनरी से जुड़ा हुआ था और समाज के पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार कार्यक्रमों में शामिल नहीं होता था। इसी बात को लेकर अंतिम संस्कार के दौरान विवाद की स्थिति बनी।
हालांकि, यह ग्रामीणों और परिजनों की ओर से लगाए गए दावे हैं। परिवार के धार्मिक जुड़ाव या अन्य आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी से नहीं होती है।

ग्रामीणों का कहना था कि गांव में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर पूरा समाज अंतिम संस्कार की तैयारियों में सहयोग करता है। लकड़ी समेत अन्य जरूरी सामग्री जुटाने से लेकर अंतिम संस्कार तक में समाज के लोग शामिल होते हैं। परिवार के लंबे समय से समाज से अलग रहने के कारण इस बार भी अंतिम संस्कार को लेकर मतभेद सामने आए।
कई घंटे की बैठक के बाद बनी सहमति
विवाद की स्थिति बनने के बाद सरपंच, ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष और समाज के प्रमुख लोगों ने परिवार से बातचीत की। कई घंटे चली बैठक में परिवार की ओर से हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार करने पर सहमति जताई गई।
परिवार की ओर से यह भी कहा गया कि आगे से वह गांव और समाज के कार्यक्रमों में शामिल होगा और समाज के साथ मिलकर रहेगा। इसके बाद ग्रामीणों और समाज के लोगों की मौजूदगी में महिला का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार किया गया।
परिवार के सदस्यों का कराया गया शुद्धिकरण
सहमति बनने के बाद ग्रामीणों और समाज के लोगों ने परिवार को दोबारा सामाजिक रूप से जोड़ने की प्रक्रिया पूरी की। गांव के मंदिर में पूजा-अर्चना कराई गई। इसके बाद नारियल फोड़ा गया, प्रसाद वितरित किया गया और गंगाजल का छिड़काव किया गया। परिवार के सदस्यों को तुलसी का पत्ता भी खिलाया गया।
तहसील साहू समाज के अध्यक्ष कंवर राम साहू ने बताया कि परिवार काफी समय से समाज से अलग रह रहा था। ग्राम विकास समिति और समाज की ओर से परिवार को दोबारा सामाजिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए कहा गया था। बैठक के बाद परिवार ने समाज के साथ रहने और सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेने पर सहमति जताई।
मृतका के भाई उमेश साहू ने भी बताया कि परिवार करीब आठ साल से ईसाई मिशनरी से जुड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि अंतिम संस्कार के दौरान गांव में विवाद की स्थिति बनी, जिसके बाद बैठक में परिवार के समाज के साथ रहने की बात रखी गई।
विवाद के बीच शांतिपूर्ण तरीके से हुआ अंतिम संस्कार
कई घंटे की बातचीत के बाद विवाद का समाधान हुआ और परिवार की सहमति से अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार संपन्न कराया गया। घटना के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर मौजूद रहे।
फिलहाल मामले में किसी तरह की हिंसक घटना की जानकारी सामने नहीं आई है। पूरा विवाद अंतिम संस्कार की रीति और परिवार के सामाजिक जुड़ाव को लेकर आपत्ति से शुरू हुआ, जिसे ग्रामीणों और परिवार के बीच बातचीत के बाद सुलझा लिया गया।









