
बिलासपुर। CG DASTAK
बिलासपुर में व्याख्याता प्रवीण कुमार मिश्रा पर स्थानांतरण आदेश का पालन नहीं करने का आरोप, शिकायतकर्ता ने उठाए गंभीर सवाल

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित व्याख्याता प्रवीण कुमार मिश्रा के खिलाफ की गई शिकायत अब जांच के दायरे में आ गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि वर्ष 2019 में स्थानांतरण आदेश जारी होने के बावजूद व्याख्याता ने नई शाला में कार्यभार ग्रहण नहीं किया और करीब छह साल तक पुरानी शाला में ही सेवाएं देते रहे। इसी दौरान उन्हें उत्कृष्ट सेवा के लिए राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

शिकायतकर्ता नीलकमल यादव ने मामले में जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की है। अब शिकायत के आधार पर पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं।
2019 में हुआ था स्थानांतरण, नई शाला में ज्वाइन नहीं
का आरोप
शिकायत में बताया गया है कि स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश के तहत व्याख्याता गणित प्रवीण कुमार मिश्रा का स्थानांतरण वर्ष 2019 में बिलासपुर के घुटकू स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में किया गया था। शिकायतकर्ता का दावा है कि आदेश जारी होने के बावजूद उन्होंने स्थानांतरित शाला में कार्यभार ग्रहण नहीं किया।

शिकायत के अनुसार, इसके बाद भी वे अपनी पूर्व पदस्थापना वाली शाला में ही सेवाएं देते रहे। इसी बात को लेकर विभागीय आदेश की अवहेलना किए जाने का आरोप लगाया गया है।
हाईकोर्ट तक पहुंचा था मामला
मामला पहले हाईकोर्ट भी पहुंच चुका है। शिकायत में उल्लेख है कि स्थानांतरण आदेश को व्याख्याता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका WPS No. 10744/2019 में सुनवाई के बाद संबंधित शिक्षक को विभाग के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करने और विभाग को निर्धारित अवधि में उस पर निर्णय लेने के निर्देश दिए गए थे।
शिकायतकर्ता का दावा है कि स्थानांतरण आदेश पर किसी प्रकार का स्थगन आदेश नहीं मिला था। इसके बावजूद नई शाला में कार्यभार ग्रहण नहीं किया गया।
हालांकि, इस पूरे मामले में हाईकोर्ट के आदेश की वास्तविक स्थिति, विभागीय रिकॉर्ड और स्थानांतरण के बाद की पदस्थापना से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
शिकायत के बीच राज्यपाल पुरस्कार मिलने पर उठे सवाल
शिकायतकर्ता ने सबसे बड़ा सवाल यह उठाया है कि जिस व्याख्याता के खिलाफ स्थानांतरण आदेश का पालन नहीं करने की शिकायत लंबित थी, उन्हें राज्यपाल पुरस्कार के लिए नामांकित कैसे किया गया और बाद में पुरस्कार भी कैसे प्रदान किया गया।
शिकायत में कहा गया है कि 20 फरवरी 2026 को व्याख्याता के खिलाफ शिकायत की गई थी। इसमें गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की गई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार करीब छह महीने तक मामले में जांच आगे नहीं बढ़ी।
इसी दौरान संबंधित व्याख्याता का राज्यपाल पुरस्कार के लिए नामांकन हुआ और उन्हें पुरस्कार भी मिल गया। शिकायतकर्ता ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की है।

सीएम ऑनलाइन शिकायत के बाद विभाग सक्रिय
बताया गया है कि लंबे समय तक कार्रवाई नहीं होने के बाद शिकायतकर्ता ने सीएम ऑनलाइन के माध्यम से भी शिकायत की। इसके बाद शिक्षा विभाग की ओर से मामले की जांच प्रक्रिया शुरू की गई।
जांच की जिम्मेदारी संभाल रहे सीनियर प्राचार्य राघवेंद्र गौरहा के अनुसार, व्याख्याता प्रवीण कुमार मिश्रा के खिलाफ जांच चल रही है। संबंधित स्कूल के प्राचार्य से दस्तावेज मांगे गए हैं। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपी जाएगी।
वहीं, प्रभारी DEO वर्षा शर्मा के हवाले से बताया गया है कि जांच अधिकारी को रिपोर्ट देने के लिए रिमाइंडर भेजा गया है। अभी जांच प्रतिवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई के लिए शासन को अनुशंसा की जाएगी।
अब इन बिंदुओं पर होगी जांच
मामले में मुख्य रूप से यह जांच की जाएगी कि—
वर्ष 2019 के स्थानांतरण आदेश का पालन हुआ था या नहीं।
स्थानांतरित शाला में कार्यभार ग्रहण से संबंधित रिकॉर्ड क्या कहते हैं।
संबंधित व्याख्याता किस आधार पर पुरानी शाला में लगातार सेवाएं देते रहे।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद विभाग ने क्या कार्रवाई की।
राज्यपाल पुरस्कार के नामांकन से पहले शिकायत और विभागीय रिकॉर्ड का परीक्षण हुआ था या नहीं।
शिकायत लंबित रहने के दौरान पुरस्कार प्रक्रिया में विभागीय स्तर पर क्या प्रक्रिया अपनाई गई।

फिलहाल जांच पूरी नहीं हुई है, इसलिए शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होने की बात कही गई है।









