
रायपुर। CG DASTAK
कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम एवं निवारण अधिनियम पर FDP के द्वितीय दिवस व्याख्यान
रायपुर। शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर में “प्रशासनिक दक्षता, सुशासन एवं संस्थागत उत्कृष्टता” विषय पर आयोजित एक सप्ताह के फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) के दूसरे दिन कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध एवं निवारण विषय पर महत्वपूर्ण व्याख्यान आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. यामिनी ने FDP के प्रथम दिवस की कार्यक्रम रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसके बाद बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल सम्मान एवं राज्य अलंकरण पुरस्कार से सम्मानित डॉ. भूपेंद्र करवंदे, सहायक प्राध्यापक, शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर का प्रतिभागियों से परिचय कराया गया।
महिलाओं की गरिमा और अधिकारों से जुड़ा विषय
तकनीकी सत्र में डॉ. भूपेंद्र करवंदे ने “कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013” विषय पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न केवल व्यक्तिगत गरिमा से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के संविधान प्रदत्त समानता, भेदभाव से सुरक्षा, स्वतंत्रता तथा जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकारों से भी जुड़ा हुआ है।

डॉ. करवंदे ने अधिनियम की आवश्यकता और इसकी पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए विशाखा दिशा-निर्देशों के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए स्पष्ट वैधानिक व्यवस्था का होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि अधिनियम का उद्देश्य महिलाओं को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से सुरक्षा देना, ऐसी घटनाओं की रोकथाम करना तथा शिकायतों के प्रभावी निवारण के लिए आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
संस्थानों की भी है महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
व्याख्यान के दौरान डॉ. करवंदे ने अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के साथ-साथ कार्यस्थल पर सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण बनाने में संस्थानों की भूमिका पर भी चर्चा की।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक संस्थान में ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित की जानी चाहिए, जहां महिलाएं बिना किसी भय, दबाव या असहजता के अपने कार्य का निर्वहन कर सकें।
प्रतिभागियों ने पूछे सवाल
व्याख्यान के बाद इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किया गया। इसमें प्रतिभागियों ने कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा, शिकायतों और अधिनियम के प्रावधानों से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे।
डॉ. करवंदे ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए व्यावहारिक परिस्थितियों के उदाहरणों के माध्यम से विषय को समझाया। संवादात्मक चर्चा के चलते सत्र प्रतिभागियों के लिए उपयोगी और ज्ञानवर्धक रहा।
संस्थागत उत्कृष्टता के लिए जरूरी है सुरक्षित कार्यस्थल
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. नियति गुरुद्वान ने कहा कि सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल सुनिश्चित करना संस्थागत उत्कृष्टता का महत्वपूर्ण आधार है।
उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम कर्मचारियों को उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ संवेदनशील एवं सकारात्मक कार्यसंस्कृति विकसित करने में मदद करते हैं।

कार्यक्रम के अंत में आयोजन सचिव श्री लखपति पटेल ने आभार प्रदर्शन किया। उन्होंने रिसोर्स पर्सन डॉ. भूपेंद्र करवंदे, कार्यक्रम समन्वयक डॉ. नियति गुरुद्वान, डॉ. यामिनी और सभी प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
19 से 25 अगस्त तक चल रहा FDP
उल्लेखनीय है कि 19 से 25 अगस्त 2026 तक आयोजित इस एक सप्ताह के फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में प्रशासनिक दक्षता, सुशासन और संस्थागत उत्कृष्टता से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया जा रहा है। कार्यक्रम में महाविद्यालय सहित अन्य महाविद्यालयों के शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों समेत 100 से अधिक प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं।









