महासमुंद में जलभराव से 50 एकड़ फसल पर संकट, किसानों ने सड़क पर दिया धरना; ड्रेनेज खुलने के बाद मिली राहत

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महासमुंद। CG DASTAK 

महासमुंद। जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच ग्राम तुमाडबरी में जलभराव की समस्या ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। करीब 50 एकड़ कृषि भूमि में बारिश का पानी भर जाने से किसानों की फसल प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया। खेतों से पानी की निकासी नहीं होने से परेशान किसानों ने मंगलवार को तुमाडबरी रोड परसदा के पास सड़क पर बैठकर करीब एक घंटे तक धरना दिया और प्रशासन से तत्काल जल निकासी की व्यवस्था करने की मांग की।

किसानों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण खेतों में कई दिनों से पानी जमा है। यदि समय रहते पानी की निकासी नहीं हुई तो खड़ी फसल खराब हो सकती है। इससे किसानों को फसल के साथ-साथ बीज, खाद, दवा और मजदूरी में किए गए खर्च का भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

सड़क पर बैठकर किसानों ने जताया विरोध

जलभराव की समस्या को लेकर किसानों ने तुमाडबरी रोड परसदा के पास सड़क पर बैठकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने तत्काल पानी निकासी की व्यवस्था करने की मांग रखी।

किसानों के मुताबिक, यह समस्या पहली बार सामने नहीं आई है। बारिश के दौरान क्षेत्र में पानी निकासी की व्यवस्था पर्याप्त नहीं होने के कारण खेतों में जलभराव की स्थिति बन जाती है। उनका आरोप है कि पहले खेतों से बारिश के पानी की निकासी के लिए एक पुलिया थी, लेकिन बाद में उसे तोड़कर वहां पेट्रोल पंप बनाया गया और पानी की निकासी के लिए पाइप लगाया गया।

पाइप की क्षमता कम होने से बढ़ी परेशानी

किसानों का कहना है कि सामान्य बारिश के दौरान पाइप के जरिए पानी निकल जाता है, लेकिन तेज और लगातार बारिश होने पर इसकी क्षमता कम पड़ जाती है। इसके चलते पानी खेतों में वापस भरने लगता है और जलभराव की स्थिति पैदा हो जाती है।

किसानों के अनुसार इस बार करीब 50 एकड़ खेत जलमग्न हो गए हैं। कई खेतों में पिछले 7 से 8 दिनों से पानी जमा है। लंबे समय तक खेत पानी में डूबे रहने के कारण फसल खराब होने का खतरा बढ़ गया है।

किसानों ने बताया कि खेती में बीज, खाद, दवा, मजदूरी और अन्य संसाधनों पर काफी पैसा खर्च किया जाता है। यदि फसल खराब होती है तो उनकी पूरी मेहनत और लागत दोनों प्रभावित होंगी।

पहले भी जनदर्शन में दे चुके हैं आवेदन

किसानों के मुताबिक उन्होंने जलभराव की समस्या को लेकर पहले भी कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन दिया था। उन्होंने प्रशासन से स्थल निरीक्षण कराने और बारिश के पानी की स्थायी निकासी की व्यवस्था करने की मांग की थी।

किसानों का कहना है कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों और सीईओ से भी मुलाकात की थी। उन्हें नाली और पाइप की व्यवस्था कराने का आश्वासन मिला था, लेकिन स्थायी समाधान नहीं होने के कारण समस्या लगातार बनी हुई है।

तहसीलदार पहुंचे मौके पर, खुलवाया ड्रेनेज

मंगलवार को धरना शुरू होने की जानकारी प्रशासन तक पहुंची। इसके बाद करीब एक घंटे बाद तहसीलदार जुगल किशोर पटेल मौके पर पहुंचे और किसानों से चर्चा की।

किसानों ने उनके सामने तत्काल पानी निकासी की मांग रखी। इसके बाद तहसीलदार के निर्देश पर पेट्रोल पंप के ड्रेनेज को खुलवाकर पानी की निकासी की व्यवस्था की गई। पानी निकलने की व्यवस्था शुरू होने के बाद किसानों ने अपना धरना समाप्त कर दिया।

हालांकि किसानों का कहना है कि ड्रेनेज खुलने से फिलहाल राहत मिली है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है।

हर तेज बारिश में सड़क पर उतरने की मजबूरी

किसानों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था के कारण तेज बारिश होने पर दोबारा खेतों में पानी भरने की आशंका बनी रहेगी। उनका कहना है कि हर बार सड़क पर उतरकर जल निकासी की मांग करने के बजाय प्रशासन को क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था का स्थायी समाधान करना चाहिए।

किसानों ने प्रशासन से पूरे क्षेत्र का स्थल निरीक्षण, जल निकासी की तकनीकी स्थिति की जांच और पर्याप्त क्षमता वाली पाइपलाइन, नाली या पुलिया का स्थायी निर्माण कराने की मांग की है।

उनका कहना है कि यदि पानी समय पर खेतों से निकल जाए तो खड़ी फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है। किसानों ने प्रशासन से ऐसी व्यवस्था करने की मांग की है, जिससे भविष्य में तेज बारिश के दौरान खेतों में जलभराव न हो।

फिलहाल ड्रेनेज खुलने के बाद किसानों को तत्काल राहत मिली है, लेकिन करीब 50 एकड़ कृषि भूमि और भविष्य में होने वाले जलभराव को देखते हुए किसान स्थायी जल निकासी व्यवस्था की मांग पर कायम हैं।

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