
बालोद। CG DASTAK
पुलिस सेवा को अक्सर कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन बालोद जिले के नवागांव (कनेरी) निवासी और वर्तमान में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) बघेरा, दुर्ग में डीएसपी के पद पर पदस्थ ओमप्रकाश सैनी अपनी अलग पहल के लिए चर्चा में हैं। राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक से सम्मानित ओमप्रकाश सैनी अपनी मासिक आय का करीब 5 से 7 प्रतिशत हिस्सा जरूरतमंदों की मदद में खर्च करते हैं।

उनकी यह पहल किसी प्रचार या सोशल मीडिया दिखावे से दूर है। जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने के लिए वे कपड़े और दैनिक उपयोग की सामग्री पैकेट में रखकर देते हैं। इन पैकेटों पर ‘हैप्पी बर्थडे’ लिखा होता है, ताकि मदद पाने वाले बच्चों और परिवारों को यह सहायता किसी उपहार की तरह महसूस हो।
300 से ज्यादा जरूरतमंदों तक पहुंची मदद
ओमप्रकाश सैनी के मुताबिक वे अब तक 300 से अधिक लोगों और बच्चों तक इस तरह सहायता पहुंचा चुके हैं। उनका मानना है कि किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए बहुत बड़े बजट या किसी बड़ी संस्था की जरूरत नहीं होती।
उनका कहना है कि कमाई का छोटा-सा हिस्सा भी यदि सही जगह लगाया जाए तो वह किसी के जीवन में बड़ी खुशी ला सकता है। यही सोच उनकी जनसेवा की पहल का आधार है।

वे जरूरतमंदों की सहायता करते समय तस्वीरें खिंचवाने या अपनी सेवा का प्रचार करने से भी बचते हैं। उनका उद्देश्य सहायता को प्रचार का माध्यम बनाना नहीं, बल्कि जरूरतमंद तक वास्तविक मदद पहुंचाना है।
2012 में शुरू की थी पहल
डीएसपी ओमप्रकाश सैनी ने जरूरतमंदों की आर्थिक मदद करने की यह पहल साल 2012 में शुरू की थी। तब से अब तक उनकी इस पहल के माध्यम से सैकड़ों बच्चों और जरूरतमंद परिवारों तक कपड़े तथा दैनिक उपयोग की सामग्री पहुंचाई जा चुकी है।
वे सहायता के लिए ऐसे लोगों को प्राथमिकता देते हैं, जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत होती है। पैकेट में कपड़े और रोजमर्रा के उपयोग की सामग्री रखी जाती है। ‘हैप्पी बर्थडे’ लिखे इन पैकेटों का उद्देश्य बच्चों को सहायता के साथ खुशी का एहसास कराना भी है।
जनसेवा के साथ गांव में बनवाया यात्री प्रतीक्षालय और मंदिर
ओमप्रकाश सैनी केवल व्यक्तिगत स्तर पर आर्थिक मदद तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने अपने गांव और आसपास के क्षेत्र में जनसुविधा से जुड़े कार्यों में भी योगदान दिया है।
जानकारी के मुताबिक गुरुर ब्लॉक के नवागांव (कनेरी) में उन्होंने साल 2021-22 में यात्री प्रतीक्षालय सहित अन्य निर्माण कार्यों में योगदान दिया। इसके अलावा तीन स्थानों पर मंदिर निर्माण में भी सहयोग किया है।
वे सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में भी लगातार सहभागी रहते हैं। उनका मानना है कि समाज के लिए काम करने के लिए हमेशा किसी बड़े बजट या संस्था की आवश्यकता नहीं होती। अपनी क्षमता के अनुसार किया गया छोटा प्रयास भी किसी जरूरतमंद के लिए बड़ी मदद साबित हो सकता है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए 2 हजार पौधे लगाए
जनसेवा के साथ ओमप्रकाश सैनी पर्यावरण संरक्षण को भी अपनी जिम्मेदारी मानते हैं। पिछले करीब 15 वर्षों में उन्होंने लोगों के सहयोग और अपने खर्च से बरगद, पीपल और बेल सहित करीब 2 हजार पौधे लगाए हैं।
उनका कहना है कि पौधे लगाने का असली लाभ आने वाली पीढ़ियों को मिलेगा। इसलिए पर्यावरण संरक्षण की यह पहल आगे भी जारी रहेगी। उनका प्रयास पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल और संरक्षण पर भी केंद्रित रहता है।
नक्सल मोर्चे पर भी निभा चुके हैं जिम्मेदारी
ओमप्रकाश सैनी ने साल 2008 में आरक्षक के पद पर पुलिस सेवा में भर्ती होकर अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने एसटीएफ में कंपनी कमांडर की जिम्मेदारी संभाली और बस्तर, बीजापुर तथा सुकमा जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी सेवाएं दीं।
नक्सल विरोधी अभियानों में पुलिस टीम के साथ उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पुलिस सेवा और वीरता के लिए उन्हें वर्ष 2017 और 2021 में राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक से सम्मानित किया जा चुका है।
वर्तमान में वे एसटीएफ बघेरा, दुर्ग में डीएसपी के पद पर पदस्थ हैं।
पुलिस सेवा में रहते हुए नक्सल मोर्चे पर जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ जरूरतमंदों की सहायता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कार्यों में योगदान देने की उनकी पहल यह संदेश देती है कि समाज के लिए बदलाव लाने के लिए बड़े संसाधनों से ज्यादा जरूरी इच्छाशक्ति और संवेदनशीलता है।









