
सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक के रिकवरी एजेंटों पर लगा जबरन गाड़ी छीनने का गंभीर आरोप। पीड़ित पक्ष का दावा है कि बैंक की किस्त नियमित जमा होने के बावजूद 10-15 गुंडों ने बीच सड़क पर रास्ता रोककर गाड़ी पर कब्ज़ा कर लिया। इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
बिलासपुर (CG DASTAK न्यूज़ डेस्क):
क्या बैंक से फाइनेंस कराई गई गाड़ी की किस्त चुकाने के बावजूद रिकवरी एजेंट आपकी गाड़ी बीच सड़क से छीन सकते हैं? बिलासपुर के सकरी थाना क्षेत्र से एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जो सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट और आरबीआई (RBI) की गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ाता दिख रहा है। गाड़ी मालिक के सुपरवाइजर ने पुलिस अधीक्षक (SP) और सकरी थाना प्रभारी को लिखित शिकायत देकर न्याय की गुहार लगाई है।
सरेराह गुंडागर्दी और छीना-झपटी
शिकायतकर्ता फिरोज रजा (जो राणा सौरभ सिंह की गाड़ियों की देख-रेख करते हैं) के अनुसार, दिनांक 11 अगस्त 2026 की सुबह लगभग 11 बजे उनकी ट्रक (क्रमांक CG04 PM 6007) को पारस पावर प्लांट की ओर जाते समय बीच रास्ते में रोक लिया गया। आरोप है कि एक कार में सवार चार लोगों ने जबरन गाड़ी को साइड लगवाया और उसके बाद 10 से 15 अन्य लोगों को बुलाकर ड्राइवर राजेश कुमार यादव के साथ डरा-धमका कर गाड़ी लूटने की कोशिश की गई।
क्या यह रिकवरी के नाम पर फर्जीवाड़ा है?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब गाड़ी की ईएमआई जमा की जा रही थी, तो फिर यह किस तरह का फर्जीवाड़ा है? पीड़ित पक्ष द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों (बैंक स्टेटमेंट और यूपीआई स्क्रीनशॉट) के अनुसार, 31 जुलाई 2026 को ही सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक में 99,466 रुपये और 32,715 रुपये की किस्तें जमा की गई हैं।
हैरानी की बात यह है कि शिकायत में अरबाज खान नाम के एक व्यक्ति पर ब्लैकमेलिंग का आरोप भी लगाया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि अरबाज खान ने गाड़ी चलाने देने के एवज में धमकी देकर 30 जुलाई को 10,000 रुपये ऐंठ लिए थे, जिसके पुख्ता यूपीआई साक्ष्य (UPI Proof) भी पुलिस को सौंपे गए हैं।

पुलिस की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
घटना के दौरान जब विवाद बढ़ा, तो पीड़ित पक्ष ने डायल 112 को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस दोनों पक्षों को सकरी थाना ले गई। लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि थाने से बिना किसी ठोस जांच के, एक व्यक्ति को चाबी सौंप दी गई और वे लोग थाने के बाहर से ही गाड़ी लेकर चले गए।
प्राइवेट यार्ड में ले जाकर खड़ा किया ट्रक
बाद में जब गाड़ी मालिक के लोग अपनी गाड़ी की तलाश करते हुए एक प्राइवेट यार्ड (जिसे स्वप्निल जैन और सुधीर जैन का यार्ड बताया जा रहा है) पहुंचे, तो वहाँ उनकी गाड़ी खड़ी मिली। जब उन्होंने इसका वीडियो बनाने की कोशिश की, तो यार्ड के अंदर मौजूद लोगों ने उन्हें डरा-धमका कर वीडियो बनाने से रोक दिया और वहां से भगा दिया।
कड़ी कार्रवाई की मांग
पीड़ित फिरोज रजा ने 12 अगस्त 2026 को इस घटना की पूरी लिखित जानकारी बिलासपुर एसपी और सकरी थाने में जमा करा दी है। उन्होंने मांग की है कि ऐसे असामाजिक तत्वों, गुंडागर्दी और ब्लैकमेल कर लूट करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह की अराजकता न फैला सके।

अब देखना यह है कि सारे सबूत और वीडियो सामने होने के बावजूद, स्थानीय प्रशासन और पुलिस इन मनबढ़ रिकवरी एजेंटों पर क्या ठोस कार्रवाई करती है।










