
45 करोड़ रुपये का फंड दिलाने और विशेष केमिकल से काले कागज को असली नोट बनाने का झांसा देकर ठगे 1.13 करोड़ रुपये, नागपुर और मुंबई से आरोपियों को दबोचा
रायपुर/बालोद। CG DASTAK
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के एक युवा कारोबारी से 45 करोड़ रुपये का फंड दिलाने और विशेष केमिकल से काले कागज को असली नोट में बदलने का झांसा देकर 1.13 करोड़ रुपये की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मामले में पुलिस ने नागपुर और मुंबई में छापेमारी कर तीन महिलाओं को हिरासत में लिया है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
पुलिस के अनुसार, बालोद जिले के बोरिदकला निवासी उमेश गुप्ता नवा रायपुर स्थित एक रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी का संचालन करते हैं। कारोबार विस्तार के लिए उन्हें 45 करोड़ रुपये की आवश्यकता थी। इसी दौरान उनकी मुलाकात कुछ लोगों से हुई, जिन्होंने बड़े फंड की व्यवस्था कराने और विदेशी तकनीक से विशेष केमिकल के जरिए काले कागज को असली नोट में बदलने का दावा किया।
चेन्नई, मुंबई और नागपुर बुलाकर रची साजिश
आरोपियों ने उमेश गुप्ता को पहले चेन्नई, फिर मुंबई और नागपुर बुलाया। अलग-अलग होटलों में बैठकें कर उन्हें विदेशी तकनीक और हाई पावर केमिकल का प्रदर्शन दिखाया गया। विश्वास जीतने के लिए 10 हजार रुपये लेकर कथित केमिकल प्रक्रिया के बाद 20 हजार रुपये लौटाए गए, जिससे कारोबारी उनके झांसे में आ गया।
फंड स्वीकृति और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर वसूले 1.13 करोड़
आरोपियों ने 45 करोड़ रुपये का फंड स्वीकृत कराने, फाइल प्रोसेसिंग, विदेशी टेस्टिंग, सुरक्षा मंजूरी और अन्य औपचारिकताओं का हवाला देकर किस्तों में रकम मांगनी शुरू की। कारोबारी ने अलग-अलग चरणों में कुल 1.13 करोड़ रुपये आरोपियों को दे दिए। बाद में जब फंड नहीं मिला और आरोपी बहाने बनाने लगे, तब उन्हें ठगी का अहसास हुआ और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
व्हाट्सएप कॉल और आईएमओ ऐप से करते थे संपर्क
जांच में सामने आया कि आरोपी व्हाट्सएप कॉल और आईएमओ ऐप के जरिए लगातार कारोबारी के संपर्क में रहते थे। विदेशी नंबरों और ऑनलाइन माध्यमों का इस्तेमाल कर खुद को अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ा बताते थे, ताकि पीड़ित का भरोसा बना रहे।
तीन महिलाएं हिरासत में, गिरोह की तलाश जारी
पुलिस ने नागपुर में छापेमारी कर कोलकाता निवासी फातिमा उर्फ भावना पांडेय (25) और दीपिका पावीवाल (24) सहित तीन महिलाओं को हिरासत में लिया है। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि दोनों महिलाओं का काम लोगों का विश्वास जीतकर उन्हें गिरोह के जाल में फंसाना था। पुलिस का दावा है कि यह गिरोह पहले भी कई राज्यों में इसी तरह की ठगी की वारदातों को अंजाम दे चुका है।
जांच जारी
पुलिस मामले की जांच कर रही है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि देशभर में इस नेटवर्क ने कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।










