
जशपुर/बिलासपुर। CG DASTAK
जशपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए पति की अपील खारिज कर दी। मामला पत्नी के अलग रहने, दहेज की मांग, मारपीट और घरेलू हिंसा के आरोपों से जुड़ा था। हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड में मौजूद परिस्थितियों को देखते हुए फैमिली कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार किया।
2022 में हुई थी शादी
मामला जशपुर जिले के रहने वाले प्रवीण कुमार यादव और प्रियंका से जुड़ा है। दोनों की शादी फरवरी 2022 में हुई थी। रिकॉर्ड के मुताबिक अक्टूबर 2022 में पत्नी की मां की तबीयत खराब होने की जानकारी मिलने पर पति उसे मायके छोड़कर आया था। बाद में वह पत्नी को वापस लेने गया, लेकिन पत्नी उसके साथ लौटने के लिए तैयार नहीं हुई।
इसके बाद पति कई बार पत्नी को वापस लाने के लिए मायके गया। पत्नी के वापस नहीं आने पर पति ने कानूनी नोटिस भी भेजा।
पत्नी को वापस लाने के लिए किए गए प्रयास
बताया गया कि पति ने 31 अक्टूबर, 7 नवंबर और 11 नवंबर को पत्नी को वापस लाने का प्रयास किया। 24 नवंबर को पत्नी के माता-पिता भी उसे ससुराल भेजने के लिए पहुंचे, लेकिन वह नहीं आई।
पति ने एसडीओ पत्थलगांव के सामने भी पत्नी को वापस लाने के लिए आवेदन किया था, जिसे 31 मार्च 2023 को खारिज कर दिया गया। इसके बाद मार्च 2023 में पति ने पत्नी को साथ रहने के लिए कानूनी नोटिस भेजा।
पत्नी ने वैवाहिक जीवन दोबारा शुरू नहीं किया। इसके बाद पति ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत पत्नी को साथ रहने का निर्देश देने की मांग की। फैमिली कोर्ट ने पति का आवेदन खारिज कर दिया, जिसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट में अपील की।
पत्नी ने लगाए दहेज और प्रताड़ना के आरोप
हाईकोर्ट में पत्नी ने पति के दावों का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि उसे लगातार प्रताड़ित किया गया। उसके मुताबिक शादी के कुछ दिन बाद ही मायके से मिली स्कूटी को ससुराल पक्ष ने घटिया बताते हुए वापस कर दिया और करीब एक सप्ताह बाद कार तथा 5 लाख रुपये नकद की मांग की गई।
पत्नी ने पति और ससुराल पक्ष पर मारपीट तथा मानसिक प्रताड़ना के भी आरोप लगाए। उसने यह भी आरोप लगाया कि 19 फरवरी 2022 को मारपीट और प्रताड़ना के कारण उसका गर्भपात हुआ। मामले में घरेलू हिंसा से संबंधित शिकायत की कार्रवाई भी शुरू होने की बात रिकॉर्ड में सामने आई।
इसके अलावा पत्नी ने पति के किसी अन्य युवती से संबंध होने का भी आरोप लगाया। इन आरोपों को लेकर दोनों पक्षों की अपनी-अपनी दलीलें हाईकोर्ट के सामने रखी गईं।
हाईकोर्ट ने किन बातों पर दिया जोर?
डिवीजन बेंच ने कहा कि मामले को केवल इस आधार पर नहीं देखा जा सकता कि पति पत्नी को वापस लाने के लिए कई बार मायके गया या उसने कानूनी नोटिस भेजे।
अदालत ने पत्नी की ओर से लगाए गए मारपीट, दहेज में कार और 5 लाख रुपये की मांग, गर्भपात से जुड़े आरोपों और घरेलू हिंसा की कार्रवाई को भी रिकॉर्ड पर मौजूद परिस्थितियों के रूप में देखा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यह देखना जरूरी है कि पत्नी अलग क्यों रह रही है और क्या उसके पास अलग रहने का उचित आधार है।
फैमिली कोर्ट का फैसला बरकरार
हाईकोर्ट ने पाया कि फैमिली कोर्ट के फैसले में ऐसी कोई गंभीर कानूनी त्रुटि नहीं है, जिसके आधार पर उसमें हस्तक्षेप किया जाए। इसके बाद डिवीजन बेंच ने फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए पति की अपील खारिज कर दी।
हाईकोर्ट ने पति के पास पत्नी के कुछ दस्तावेज रखे जाने के मुद्दे को भी महत्वपूर्ण माना और पत्नी के दस्तावेज वापस किए जाने संबंधी निर्देश को रिकॉर्ड में रखा।
महत्वपूर्ण: यह मामला न्यायालय में दर्ज पक्षों के आरोपों और उपलब्ध रिकॉर्ड पर आधारित है। पत्नी द्वारा लगाए गए आरोपों को यहां आरोप के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है; उन्हें स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।









