
रायपुर। CG DASTAK
रायपुर। समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर रायपुर में आयोजित चर्चा के दौरान महिलाओं ने विवाह, लिव-इन रिलेशनशिप, संपत्ति में अधिकार, तलाक की प्रक्रिया और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अपने सुझाव रखे। रायपुर जिले के धरसींवा और गरियाबंद जिले से आई महिला स्व-सहायता समूहों की पदाधिकारियों ने कहा कि कानून ऐसा होना चाहिए, जिससे महिलाओं को समानता और न्याय मिले तथा उनके अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
बैठक में महिलाओं ने लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीयन अनिवार्य करने, पैतृक और व्यक्तिगत संपत्ति में महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार देने और तलाक की प्रक्रिया को सरल बनाने जैसे सुझाव दिए। चर्चा में शामिल समिति के सदस्यों ने महिलाओं की बातों और सुझावों को रिपोर्ट में शामिल करने का आश्वासन दिया।
लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीयन की मांग
महिला पदाधिकारियों ने सुझाव दिया कि लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीयन अनिवार्य किया जाना चाहिए, ताकि ऐसे संबंधों में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की जा सके और शोषण की आशंकाओं को कम किया जा सके।
महिलाओं ने यह भी कहा कि ऐसे संबंधों से जन्म लेने वाले बच्चों को पालन-पोषण और उत्तराधिकार से जुड़े अधिकार मिलने चाहिए। उनके अनुसार, कानून में महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
पैतृक संपत्ति में बराबरी के अधिकार पर जोर
चर्चा के दौरान पैतृक और व्यक्तिगत संपत्ति में महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार देने की मांग उठी। महिलाओं ने कहा कि संपत्ति और उत्तराधिकार से जुड़े मामलों में समानता सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए।
महिला प्रतिनिधियों ने तलाक की प्रक्रिया को आपसी सहमति के आधार पर सरल बनाने और दहेज से जुड़े नियमों में समानता लाने का सुझाव भी दिया। उनका कहना था कि कानून ऐसा हो, जिससे महिलाओं को न्याय मिले और समाज में मौजूद भेदभाव को कम किया जा सके।
आदिवासी परंपराओं और संस्कृति के सम्मान की बात
छत्तीसगढ़ में आदिवासी समुदायों की बड़ी आबादी को देखते हुए महिलाओं ने समान नागरिक संहिता पर विचार करते समय स्थानीय परंपराओं, रीति-रिवाजों और संस्कृति का सम्मान करने की जरूरत बताई।
ग्रामीण महिला प्रतिनिधियों ने कहा कि कानून का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए गांवों में जागरूकता बढ़ाने और महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देने पर भी जोर दिया गया।
समिति ने सुझावों को रिपोर्ट में शामिल करने का दिया आश्वासन
चर्चा में समिति के सदस्य एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एम.के. राउत और वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार ने महिलाओं की बातें सुनीं। उन्होंने महिलाओं के व्यावहारिक सुझावों को रिपोर्ट में शामिल करने का आश्वासन दिया।
बैठक में ‘एक राष्ट्र, एक कानून’ की अवधारणा के संदर्भ में महिलाओं के अधिकारों, सामाजिक समानता और न्याय से जुड़े मुद्दों पर विचार किया गया। महिलाओं ने कहा कि किसी भी कानून का उद्देश्य सभी को न्याय और समान अवसर उपलब्ध कराना होना चाहिए।
महत्वपूर्ण: बैठक में रखे गए ये सुझाव हैं। इन्हें समान नागरिक संहिता के लागू प्रावधान या सरकार द्वारा स्वीकार किए गए निर्णय के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।
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