
– 15 नवंबर 2025 की स्थिति में 3850 राजस्व मामले महासमुंद जिले में लंबित
– विधायक चातुरी नंद ने लोक सेवा गारंटी कानून सिर्फ कागज़ों में होने का लगाया बड़ा आरोप
सरायपाली, 18 नवंबर 2025 : महासमुंद जिले के राजस्व न्यायालयों में वर्षों से लंबित मामलों को लेकर विधायक चातुरी नंद ने विधानसभा में सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उनके प्रश्न के लिखित उत्तर में सरकार ने स्वयं स्वीकार किया है कि वर्ष 2023-24 से 15 नवंबर 2025 तक जिले में कुल 3850 राजस्व प्रकरण लंबित हैं, जबकि इन मामलों के निराकरण के लिए लोक सेवा गारंटी कानून में स्पष्ट समय-सीमा तय है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार लंबित प्रकरणों में सीमांकन – 35, नामांतरण – 429, बंटवारा – 212 तथा आबादी भूमि बंटन – 312 मामले शामिल हैं। ये ऐसे विषय हैं जिनसे सीधे किसान, ग्रामीण, महिलाएं और छोटे भू-स्वामी प्रभावित होते हैं।
विधायक चातुरी नंद ने मीडिया को जारी किए प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि “राज्य सरकार लोक सेवा गारंटी कानून का बड़े-बड़े मंचों से प्रचार करती है, लेकिन महासमुंद जिले की ज़मीनी सच्चाई बिल्कुल उलट है। यहां किसान, गरीब और आम नागरिक सालों से नामांतरण, सीमांकन और बंटवारे जैसे बुनियादी मामलों के लिए राजस्व न्यायालयों के चक्कर काट रहे हैं। कानून में 3 और 6 महीने की समय-सीमा तय है, फिर भी सैकड़ों प्रकरण वर्षों से लंबित हैं। यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि जनता के अधिकारों के साथ सीधा खिलवाड़ है। अगर सरकार सच में संवेदनशील होती, तो न्याय तारीख़ों और फाइलों में कैद नहीं होता।”
सरकार ने अपने उत्तर में यह भी स्वीकार किया है कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 के तहत अविवादित मामलों के लिए 3 माह और विवादित मामलों के लिए 6 माह की समय-सीमा निर्धारित है। समय-सीमा में निराकरण न होने पर नोटिस और समीक्षा बैठकों की बात कही गई है।
आंकड़ों की स्थिति (सरकारी उत्तर के अनुसार)
राजस्व न्यायालयों में लंबित प्रकरण (2023-24 से 15 नवंबर 2025 तक):
सीमांकन – 35
नामांतरण – 429
बंटवारा – 212
आबादी भूमि बंटन – 312
कुल – 988
जिले में कुल लंबित मामलों की स्थिति:
वर्ष 2023-24 – 6728
15 नवंबर 2025 की स्थिति – 3850
इस अवधि में निराकृत – 2878
विधायक चातुरी नंद ने कहा कि “सिर्फ बैठकों और नोटिस से जनता को राहत नहीं मिलती। जरूरत है कि महासमुंद जिले में विशेष अभियान चलाकर पुराने सभी प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण किया जाए और लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि आम लोगों को वर्षों की कानूनी और मानसिक परेशानी से मुक्ति मिल सके।”










