विजयादशमी पर साल में एक बार खुलते हैं रायपुर के कंकाली मठ के कपाट, 1000 साल पुराने अस्त्र-शस्त्रों के होते हैं दर्शन

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रायपुर। CG DASTAK 

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की पुरानी बस्ती स्थित कंकाली मठ में विजयादशमी के अवसर पर साल में एक बार कपाट खोले जाते हैं। मंगलवार सुबह 6 बजे से ही श्रद्धालु माता कंकाली के दर्शन और मठ में रखी प्राचीन वस्तुओं को देखने पहुंचने लगे। इस विशेष अवसर पर श्रद्धालुओं को रात 12 बजे तक दर्शन करने का अवसर मिलता है। इसके बाद मठ के कपाट फिर एक साल के लिए बंद कर दिए जाते हैं।

मठ में नागा साधुओं से जुड़ी करीब 1000 साल पुरानी बताई जाने वाली प्राचीन वस्तुएं रखी हैं। इनमें कमंडल, कपड़े, चिमटा, त्रिशूल, ढाल, कुल्हाड़ी सहित अन्य पारंपरिक वस्तुएं शामिल हैं। विजयादशमी पर इन वस्तुओं की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

माता कंकाली के स्वप्न से जुड़ी है मंदिर की मान्यता

कंकाली मठ के इतिहास को लेकर स्थानीय मान्यता है कि माता कंकाली ने एक बार महंत कृपाल गिरि महाराज को स्वप्न में तालाब के किनारे मंदिर बनवाकर प्रतिमा स्थापित करने का निर्देश दिया था। इसके बाद माता की प्रतिमा को मठ के मंदिर में स्थापित किया गया।

मान्यता के अनुसार, प्रतिमा स्थापना के बाद महंत कृपाल गिरि महाराज दुखी रहने लगे। तब माता ने उन्हें दर्शन देकर कहा कि वह विजयादशमी के दिन अपने पुराने घर यानी मठ में विराजमान रहेंगी। इसी मान्यता के चलते हर साल दशहरे पर मठ के कपाट खोले जाते हैं और विशेष पूजा की जाती है।

नागा साधुओं की साधना का प्रमुख केंद्र रहा है मठ

कंकाली मठ का निर्माण श्मशान घाट के क्षेत्र में हुआ था। इसे नागा साधुओं की तांत्रिक साधना के प्रमुख केंद्रों में गिना जाता है। मठ के आसपास नागा साधुओं की समाधियां और कई अन्य मंदिर भी स्थित हैं। यहां रखी प्राचीन वस्तुओं को साधुओं की साधना और पुरानी धार्मिक परंपराओं से जुड़ा माना जाता है।

करीब 650 साल पुराना बताया जाता है कंकाली तालाब

कंकाली तालाब और मंदिर का भी विशेष धार्मिक महत्व है। स्थानीय मान्यता के मुताबिक, तालाब करीब 650 साल पुराना है और पहले इसे कंकाली कुंड के नाम से जाना जाता था। बताया जाता है कि महंत कृपाल गिरि महाराज ने मंदिर और तालाब का निर्माण करवाया था। श्रद्धालु यहां अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं।

नवरात्र में ज्योत-जंवारा का विसर्जन

कंकाली मंदिर और तालाब में चैत्र तथा शारदीय नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। परंपरा के अनुसार, नवमी और दशमी के अवसर पर तालाब में ज्योत-जंवारा का विसर्जन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं और प्राचीन परंपराओं के कारण कंकाली मंदिर और मठ रायपुर के प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल हैं।

वेबसाइट: www.cgdastak.com

नोट: मठ के इतिहास, प्राचीन वस्तुओं की आयु और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी जानकारियां स्थानीय परंपराओं के आधार पर प्रस्तुत की गई हैं।

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