रायपुर: फोरेंसिक लैब पहुंचे 50 विद्यार्थी, आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों और DNA जांच की बारीकियां सीखीं

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रायपुर। CG DASTAK 

रायपुर। वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक फोरेंसिक तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी हासिल करने के लिए शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर के एमएससी रसायन विज्ञान एवं भौतिकी तृतीय सेमेस्टर के लगभग 50 विद्यार्थियों ने राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला, रायपुर का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों, नमूनों के विश्लेषण और न्यायालयिक जांच में विज्ञान की भूमिका को समझा।

26 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को कक्षा में प्राप्त सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ वैज्ञानिक परीक्षणों और विश्लेषण की व्यावहारिक जानकारी देना था।

आधुनिक फोरेंसिक तकनीकों से हुए परिचित

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गिरिश कांत पांडेय ने इस तरह के शैक्षणिक भ्रमण को विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक शिक्षा में सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव भी महत्वपूर्ण है। इससे विद्यार्थियों में अनुसंधानपरक सोच, विश्लेषणात्मक क्षमता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होता है।

रसायन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. गोवर्धन व्यास के अनुसार, भ्रमण में रसायन विज्ञान विभाग से डॉ. यामिनी ठाकुर, डॉ. रेखा सोनी एवं डॉ. भारती मनीष पारधी तथा भौतिकी विभाग से डॉ. लखपति पटेल, डॉ. रत्नमाला गांजिर, सुश्री रोशनी वर्मा एवं श्री पंकज कुमार विद्यार्थियों के साथ मौजूद रहे।

प्रयोगशाला के संयुक्त निदेशक डॉ. एच.एस. भवारा एवं डॉ. शिखा तिवारी के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने विभिन्न वैज्ञानिक अनुभागों की कार्यप्रणाली, आधुनिक जांच तकनीकों और प्रयोगशाला में अपनाए जाने वाले सुरक्षा मानकों की जानकारी प्राप्त की।

SEM और EDXRF तकनीक को समझा

भौतिकी अनुभाग में वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. दिनेश कुमार साहू ने पदार्थों की पहचान, धातुओं की शुद्धता की जांच और सूक्ष्म संरचनाओं के विश्लेषण में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के बारे में बताया।

विद्यार्थियों ने स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी (SEM) और ऊर्जा-विक्षेपी एक्स-रे प्रतिदीप्ति तकनीक (EDXRF) के सिद्धांतों एवं उपयोगों को समझा। इन तकनीकों की मदद से पदार्थों की सूक्ष्म संरचना और उनमें मौजूद तत्वों का विश्लेषण किया जा सकता है।

रासायनिक विश्लेषण और विषविज्ञान की जानकारी

रसायन विज्ञान एवं विषविज्ञान अनुभाग में वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. संदीप वैष्णव ने नमूनों के रासायनिक विश्लेषण, संदिग्ध पदार्थों की पहचान और विषविज्ञान संबंधी जांच में रसायन विज्ञान की भूमिका समझाई।

इस दौरान विद्यार्थियों को गैस क्रोमैटोग्राफी और मास स्पेक्ट्रोमेट्री जैसी आधुनिक तकनीकों के बारे में जानकारी दी गई। इन तकनीकों का उपयोग नमूनों में मौजूद रासायनिक पदार्थों की पहचान और विश्लेषण के लिए किया जाता है।

DNA फिंगरप्रिंटिंग और PCR की कार्यप्रणाली जानी

जीवविज्ञान अनुभाग में संयुक्त निदेशक डॉ. एस.के. सिंह एवं वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. वसीम ने जैविक साक्ष्यों के विश्लेषण में जीवविज्ञान की भूमिका बताई।

DNA इकाई में डॉ. जिप्सी चंद्रा ने विद्यार्थियों को DNA फिंगरप्रिंटिंग के वैज्ञानिक सिद्धांतों, परीक्षण प्रक्रिया और न्यायिक जांच में इसके उपयोगों से परिचित कराया। विद्यार्थियों ने PCR, स्वचालित DNA निष्कर्षण उपकरणों और जेनेटिक एनालाइजर की कार्यप्रणाली के बारे में भी जानकारी प्राप्त की।

न्यायालयिक मनोविज्ञान की भूमिका पर चर्चा

न्यायालयिक मनोविज्ञान अनुभाग में डॉ. एच.एस. भवारा ने न्यायालयिक मनोविज्ञान के महत्व और जांच में इसके व्यावहारिक उपयोगों की जानकारी दी। विद्यार्थियों ने समझा कि भौतिक एवं रासायनिक साक्ष्यों के विश्लेषण के साथ दूसरे वैज्ञानिक विषय भी न्यायालयिक जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भ्रमण के बाद आयोजित संवादात्मक सत्र में विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए और आधुनिक तकनीकों, अनुसंधान के अवसरों तथा फोरेंसिक विज्ञान में करियर से जुड़े प्रश्न पूछे।

वैज्ञानिक नैतिकता और सटीकता पर जोर

समापन अवसर पर संयुक्त निदेशक डॉ. एस.के. सिंह ने वैज्ञानिक अनुसंधान में सटीकता, निष्पक्षता और नैतिक उत्तरदायित्व के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को निर्धारित वैज्ञानिक मानकों का पालन करने और जिम्मेदारी के साथ अनुसंधान कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

महाविद्यालय की पूर्व कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. अंजलि भटनागर ने कहा कि व्यावहारिक अनुभव विषयों की बेहतर समझ विकसित करने के साथ विद्यार्थियों को रोजगार और अनुसंधान के अवसरों की पहचान करने में भी मदद करता है।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गिरिश कांत पांडेय ने प्रयोगशाला के अधिकारियों, वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने भविष्य में भी विद्यार्थियों के लिए इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण और अनुसंधानपरक गतिविधियां आयोजित करने पर जोर दिया।

इस भ्रमण से एमएससी रसायन विज्ञान एवं भौतिकी के विद्यार्थियों को आधुनिक फोरेंसिक जांच, वैज्ञानिक उपकरणों और अंतर्विषयक अनुसंधान के व्यावहारिक अनुप्रयोगों को समझने का अवसर मिला।

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