पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी 1.7% रहने का दावा, ब्रिटिश संगठन की रिपोर्ट में धार्मिक उत्पीड़न का जिक्र

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अंतरराष्ट्रीय डेस्क। CG DASTAK 

अंतरराष्ट्रीय डेस्क। पाकिस्तान में हिंदू समुदाय की आबादी और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर एक नई रिपोर्ट चर्चा में है। ब्रिटेन स्थित हिंदू संगठन INSIGHT UK ने पाकिस्तान में हिंदुओं की स्थिति पर एक रिपोर्ट पेश की है। इसमें हिंदू समुदाय की आबादी में गिरावट, धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ी चुनौतियों, संपत्ति के अधिकार और कथित जबरन धर्म परिवर्तन जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। रिपोर्ट को ब्रिटिश हिंदुओं के लिए गठित ऑल-पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप (APPG) के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 1941 में उस क्षेत्र की आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी लगभग 14.6 प्रतिशत थी, जो बाद में पश्चिमी पाकिस्तान बना। रिपोर्ट के अनुसार, आज पाकिस्तान की कुल आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी करीब 1.7 प्रतिशत रह गई है।

हालांकि, इन आंकड़ों की तुलना करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि 1941 का आंकड़ा आज के पूरे पाकिस्तान का नहीं, बल्कि उस क्षेत्र का बताया गया है जो बाद में पश्चिमी पाकिस्तान बना। वहीं, पाकिस्तान की 2023 की जनगणना में हिंदू जति समुदाय की हिस्सेदारी 1.61 प्रतिशत दर्ज की गई थी। इसलिए ऐतिहासिक और वर्तमान आंकड़ों को उनके संबंधित क्षेत्र और परिभाषा के संदर्भ में समझना जरूरी है।

बंटवारे और संपत्ति के अधिकारों का मुद्दा

INSIGHT UK की रिपोर्ट में 1947 के बंटवारे के दौरान हुई हिंसा और उसके बाद हिंदू परिवारों के विस्थापन का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट का दावा है कि कई परिवारों को अपने पुश्तैनी घरों, जमीनों और खेती से जुड़े संसाधनों से हाथ धोना पड़ा।

रिपोर्ट में पाकिस्तान के संपत्ति कानूनों का भी जिक्र है। संगठन के मुताबिक, कुछ कानूनी व्यवस्थाओं और संपत्ति पर कब्जे से जुड़े मामलों ने हिंदू समुदाय के कई परिवारों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया।

ये आरोप रिपोर्ट में प्रस्तुत किए गए संगठन के निष्कर्ष हैं। अलग-अलग मामलों की परिस्थितियों और कानूनी स्थिति की पुष्टि के लिए संबंधित रिकॉर्ड तथा स्वतंत्र जांच को देखना आवश्यक है।

धार्मिक स्वतंत्रता और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप

रिपोर्ट में धार्मिक स्वतंत्रता पर कथित प्रतिबंधों और जबरन धर्म परिवर्तन के मामलों को लेकर भी चिंता जताई गई है। इसमें दावा किया गया है कि हिंदू और ईसाई समुदायों की महिलाओं तथा लड़कियों के अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और विवाह से जुड़े मामले सामने आते हैं।

रिपोर्ट में ऐसे मामलों की संख्या एक हजार या उससे अधिक प्रतिवर्ष होने का अनुमान भी दिया गया है। यह रिपोर्ट में प्रस्तुत दावा है; इसे सभी मामलों की स्वतंत्र रूप से सत्यापित आधिकारिक संख्या नहीं माना जाना चाहिए।

संगठन ने कहा है कि धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, उनकी गरिमा और धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। रिपोर्ट में ऐसे मामलों में पीड़ितों को न्याय दिलाने और उनकी सुरक्षा मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया गया है।

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री पद को लेकर संवैधानिक प्रावधान

रिपोर्ट में पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 41 और 91 का भी उल्लेख किया गया है। इन प्रावधानों के तहत राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के पद के लिए मुस्लिम होना आवश्यक है।

संगठन ने इन प्रावधानों को धार्मिक अल्पसंख्यकों की राजनीतिक भागीदारी के संदर्भ में उठाया है। रिपोर्ट में इन नियमों में बदलाव से संबंधित प्रस्तावों का भी जिक्र किया गया है।

ब्रिटेन सरकार से की गईं पांच प्रमुख मांगें

रिपोर्ट में INSIGHT UK ने ब्रिटेन सरकार से अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने की मांग की है। संगठन की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:

धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और धार्मिक मामलों से जुड़े विवादों की सुनवाई में तेजी लाना।

पाकिस्तान को दी जाने वाली ब्रिटिश सहायता को मानवाधिकारों में सुधार से जोड़ने पर विचार करना।

इस्लामाबाद स्थित ब्रिटिश हाई कमीशन में अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े मामलों की निगरानी मजबूत करना।

हिंदू, ईसाई, सिख और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की सामाजिक तथा आर्थिक स्थिति पर नियमित रिपोर्ट जारी करना।

कथित जबरन धर्म परिवर्तन और धार्मिक उत्पीड़न से प्रभावित लोगों के लिए ब्रिटेन में सुरक्षित शरण के रास्ते तैयार करना।

ये संगठन की ओर से रखी गई मांगें हैं। इन्हें ब्रिटिश सरकार द्वारा स्वीकार किए गए निर्णय या लागू की गई नीति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय चर्चा

पाकिस्तान में हिंदू समुदाय की स्थिति और धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों का मुद्दा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा में आया है। INSIGHT UK की रिपोर्ट में ऐतिहासिक आंकड़ों और वर्तमान परिस्थितियों को सामने रखते हुए ब्रिटेन सरकार से हस्तक्षेप की मांग की गई है।

इस मामले में जनगणना के आंकड़ों, व्यक्तिगत शिकायतों, न्यायिक रिकॉर्ड और स्वतंत्र मानवाधिकार रिपोर्टों को साथ देखकर स्थिति का आकलन करना महत्वपूर्ण है। धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच तथा पीड़ितों को न्याय मिलना इस चर्चा का प्रमुख विषय है।

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