दोंदेखुर्द में शराब दुकान खोलने का ग्रामीणों ने किया विरोध, महिलाओं ने सरकार को घेरा: चेताया – नहीं माने तो करेंगे चक्काजाम और विधानसभा घेराव

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रायपुर। राजधानी से लगे ग्राम दोंदेखुर्द में शराब दुकान खोलने के फैसले के खिलाफ ग्रामीणों, खासकर महिलाओं ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। अम्बेडकर चौक पर तख्तियां लेकर बैठीं महिलाओं ने पूछा कि क्या “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” का यही मतलब है कि गांव-गांव में शराब की दुकानें खोल दी जाएं?

प्रदर्शन के दौरान महिलाओं और ग्रामीणों ने कहा कि यदि शराब दुकान खोलने का फैसला वापस नहीं लिया गया, तो वे चक्काजाम और फिर विधानसभा घेराव करेंगे।

बेटी बचाओ’ के नाम पर ‘बेटी बर्बाद’ की योजना?

प्रदर्शन में शामिल महिलाओं का कहना था कि सरकार एक तरफ महिला सशक्तिकरण और बेटी बचाओ की बात करती है, वहीं दूसरी ओर गांव-गांव शराब की दुकानें खोलकर सामाजिक ढांचे को तोड़ने में लगी है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से सवाल किया कि क्या शराब दुकान खोलने से गांव की बेटियां सुरक्षित रहेंगी? क्या इससे घरेलू हिंसा, नशाखोरी, अपराध और बेरोजगारी नहीं बढ़ेगी?

सरपंच की सहमति से थोपे जा रहे हैं शराब दुकानें?

ग्रामीणों का आरोप है कि दोंदेखुर्द समेत आस-पास के गांवों जैसे छपोरा, लालपुर, सेमरिया, मटिया और दोंदे कला में ग्रामीणों ने शराब दुकान खोलने की अनुमति नहीं दी, इसके बावजूद सरपंच अशोक साहू की सहमति से दोंदेखुर्द में जबरन दुकान खोली जा रही है।

गांव वालों का कहना है कि यह फैसला जनभावना के खिलाफ है और इससे युवाओं का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।

2013 में भी शराब के खिलाफ खड़ा हुआ था गांव

ग्रामीण गीता गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2013 में गांव में संघर्ष समिति बनाकर शराब दुकान बंद कराई गई थी। तब से अब तक गांव शराब मुक्त रहा है। पंचायत स्तर पर शराब पीकर हुज्जत करने वालों पर कार्रवाई की जाती रही है। अब सरकार उसी गांव में फिर से नशे की दुकान खोलने की कोशिश कर रही है, जो गलत है।

प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन, दी चेतावनी

प्रदर्शन की सूचना मिलने पर प्रशासनिक अधिकारी उमाशंकर बांदे मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने उन्हें ज्ञापन सौंपते हुए साफ कहा कि यदि निर्णय वापस नहीं लिया गया तो सड़क पर उतर कर आंदोलन किया जाएगा और विधानसभा घेराव किया जाएगा।

ग्रामीणों की मांगें:

1. दोंदेखुर्द में प्रस्तावित शराब दुकान तत्काल प्रभाव से रद्द की जाए।

2. गांव को शराब मुक्त क्षेत्र घोषित किया जाए।

3. पंचायत की सहमति और जनभावना की अनदेखी न की जाए।

4. अगर निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो होगा उग्र आंदोलन।

रिपोर्ट: CG Dastak

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