
रायपुर। CG DASTAK
छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोककथाओं और महान साहित्यकारों से अब देशभर के बच्चे परिचित होंगे। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा तैयार की जा रही कक्षा 5वीं और 8वीं की नई किताबों में छत्तीसगढ़ से जुड़ी महत्वपूर्ण सामग्री को शामिल किया गया है।
नई पाठ्यपुस्तकों में छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति के साथ यहां के प्रमुख साहित्यकारों और चर्चित लोक-कथाओं को भी जगह दी गई है। इनमें ‘गंगाराम मगरमच्छ’ की कहानी खास तौर पर शामिल है, जो बच्चों को इंसान और बेजुबान जीवों के बीच संवेदनशील रिश्ते की कहानी बताएगी।
‘गंगाराम’ मगरमच्छ की कहानी पढ़ेंगे बच्चे
कक्षा 5वीं के बच्चों को बेमेतरा जिले के बाबा मोहतरा गांव से जुड़ी चर्चित मगरमच्छ ‘गंगाराम’ की कहानी पढ़ाई जाएगी। बताया जाता है कि यह मगरमच्छ लंबे समय तक गांव के तालाब में रहा और ग्रामीणों, महिलाओं तथा बच्चों के साथ उसका अनोखा आत्मीय रिश्ता बन गया था।
पंडित मुकुटधर पांडेय और पंडित माधवराव सप्रे भी पाठ्यक्रम में
नई किताबों में छत्तीसगढ़ के प्रमुख साहित्यकारों को भी स्थान दिया गया है। छायावाद के जनक पंडित मुकुटधर पांडेय की जीवनी को कक्षा 8वीं के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।
वहीं हिंदी पत्रकारिता के प्रमुख व्यक्तित्व पंडित माधवराव सप्रे से जुड़ी सामग्री को भी पाठ्यक्रम में जगह मिली है। इसके अलावा पहले सामाजिक विज्ञान में पढ़ाए जाने वाले कुछ पाठों को कम करके नए और स्थानीय संदर्भों को शामिल किया गया है।
‘जो जीता वही बाजीराव’ की जगह अब ‘जो जीता वही बाजीराव’
पाठ्यक्रम में ऐतिहासिक व्यक्तित्वों से जुड़ी सामग्री में भी बदलाव किया गया है। पेशवा बाजीराव के जीवन और उनके युद्धों से जुड़ा पाठ अब बच्चों को पढ़ाया जाएगा। बताया गया है कि बाजीराव ने अपने जीवनकाल में कई युद्ध लड़े और उनमें सफलता हासिल की।
राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े अध्यायों को भी प्रमुखता
नई किताबों में पिछले कुछ वर्षों से अपेक्षाकृत कम प्रमुखता पाने वाले राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय भाषा और राष्ट्रीय चिन्हों से जुड़े अध्यायों को भी दोबारा प्रमुखता दी गई है।
देशभर के बच्चों तक पहुंचेगी छत्तीसगढ़ की पहचान
NCERT का पाठ्यक्रम देशभर के बड़ी संख्या में स्कूलों में पढ़ाया जाता है। ऐसे में छत्तीसगढ़ की लोककथाओं, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को इन किताबों में जगह मिलने से राज्य की पहचान और यहां की कहानियां देश के अलग-अलग हिस्सों में पढ़ने वाले बच्चों तक पहुंचेंगी।
इससे छत्तीसगढ़ की स्थानीय संस्कृति, साहित्य और लोकपरंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।










