दुर्ग के जामुल में साइबर ठगी का मामला: CSC संचालक के खाते से 1 लाख रुपए पार, पुलिस ने दर्ज किया केस

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मेडिकल इमरजेंसी का झांसा देकर बैंक खाते की जानकारी हासिल करने का आरोप; कई CSC संचालकों के खातों के इस्तेमाल की भी शिकायत

📍 दुर्ग | जामुल CG DASTAK 

दुर्ग जिले के जामुल थाना क्षेत्र में मनी म्यूलिंग से जुड़ा साइबर ठगी का मामला सामने आया है। शिकायत के अनुसार, एक CSP (कॉमन सर्विस सेंटर) संचालक चंदन साहू के बैंक खाते का कथित रूप से साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किया गया और खाते में जमा करीब 1 लाख रुपए UPI के माध्यम से ट्रांसफर कर नकद निकाल लिए गए।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, घटना 10 मार्च 2026 की शाम करीब 6:10 बजे की है। चंदन साहू जामुल स्थित बिजली ऑफिस के पास अपने ऑनलाइन CSC सेंटर में मौजूद थे। इसी दौरान एक महिला कथित रूप से उनके पास पहुंची और घर में मेडिकल इमरजेंसी होने की बात कहते हुए परिजनों द्वारा पैसे भेजे जाने की जानकारी दी।

आरोप है कि मदद के नाम पर चंदन साहू से उनके IDFC FIRST Bank खाते का नंबर और मोबाइल नंबर लिया गया। इसके बाद महिला ने कथित तौर पर किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क कर खाते की जानकारी साझा की।

खाते में आए 1 लाख रुपए, फिर निकाली गई रकम

शिकायत के अनुसार, कुछ ही देर बाद चंदन साहू के खाते में UPI के माध्यम से दो बार 50-50 हजार रुपए, यानी कुल 1 लाख रुपए जमा हुए। आरोप है कि रकम खाते में आने के बाद महिला ने पूरी राशि नकद निकाल ली और वहां से चली गई।

घटना के दो दिन बाद 12 मार्च को चंदन साहू को बैंक की ओर से जानकारी मिली कि साइबर ठगी से संबंधित लेनदेन के चलते उनका बैंक खाता होल्ड कर दिया गया है। इसके बाद उन्हें पता चला कि उनके खाते में आई रकम कथित तौर पर किसी धोखाधड़ी से जुड़े खाते से भेजी गई थी।

कई CSP संचालकों के खातों के इस्तेमाल का आरोप

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इसी तरह अन्य CSP संचालकों के बैंक खातों का भी इस्तेमाल किया गया। शिकायतकर्ता ने देव साहू, अखिलेश कुमार, बच्चन कुमार और ईश्वरी देवांगन समेत अन्य खातों से जुड़े लेनदेन का उल्लेख किया है।

शिकायत के मुताबिक, इन खातों के जरिए अलग-अलग रकम ट्रांसफर कर नकद निकाले जाने की बात सामने आई है। मामले में करीब 3 प्रतिशत कमीशन लिए जाने का आरोप भी लगाया गया है।

पुलिस ने दर्ज किया अपराध, जांच शुरू

चंदन साहू के लिखित आवेदन का अवलोकन करने के बाद जामुल पुलिस ने प्रथम दृष्टया भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 3(5) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस अब संबंधित बैंक खातों के लेनदेन, UPI ट्रांजेक्शन, मोबाइल नंबर और रकम के स्रोत की जांच कर रही है। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कथित साइबर ठगी के नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं और रकम कहां से आई तथा आगे कहां पहुंचाई गई।

फिलहाल मामले में पुलिस की जांच जारी है। आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

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