दुर्ग: अपोलो कॉलेज अंजोरा में अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और वैज्ञानिक सोच पर जोर

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अंजोरा, दुर्ग। शैक्षिक अनुसंधान की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और शिक्षा के क्षेत्र में नए विचारों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 31 अक्टूबर 2026 को अपोलो कॉलेज, अंजोरा में अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का आयोजन किया गया। अपोलो कॉलेज, अंजोरा, दुर्ग एवं संस्कार सिटी कॉलेज ऑफ एजुकेशन, ठाकुरटोला, राजनांदगांव के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस संगोष्ठी का विषय “शैक्षिक अनुसंधान को सशक्त बनाना: विचारों से साक्ष्य तक” रहा।

संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य शैक्षिक अनुसंधान की गुणवत्ता बढ़ाना, शोध की नवीन प्रवृत्तियों और वैज्ञानिक पद्धतियों से प्रतिभागियों को परिचित कराना तथा शिक्षा के क्षेत्र में शोधपरक दृष्टिकोण विकसित करना था। कार्यक्रम में बीएड, एमएड और डीएलएड के छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों एवं पूर्व छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय शिक्षाविदों ने रखे विचार

संगोष्ठी में अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं के रूप में नेपाल स्थित त्रिभुवन विश्वविद्यालय की डॉ. प्रतिभा मंडल और डॉ. धर्मेंद्र शुक्ला तथा प्रयागराज के ईश्वर शरण पीजी कॉलेज के शिक्षा विभाग के फैकल्टी सदस्य डॉ. अविनाश पांडेय ने अपने विचार प्रस्तुत किए।

वक्ताओं ने शैक्षिक अनुसंधान के विभिन्न आयामों, शोध समस्या के चयन, शोध अभिकल्प, अनुसंधान पद्धतियों, तथ्य संकलन, विश्लेषण और शोध निष्कर्षों की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने बताया कि शोध केवल जानकारी जुटाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक व्यवस्थित और वैज्ञानिक कार्यप्रणाली है। इसके माध्यम से शिक्षा से जुड़ी समस्याओं की पहचान की जा सकती है और उनके प्रभावी एवं व्यावहारिक समाधान तलाशे जा सकते हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और कौशल आधारित शिक्षा पर जोर

संगोष्ठी के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, कौशल आधारित, नवाचारयुक्त और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।

वक्ताओं ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान और साक्ष्य आधारित निष्कर्ष शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शोध के निष्कर्षों का उपयोग शिक्षण पद्धतियों में सुधार, विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने और शैक्षिक समस्याओं के समाधान में किया जा सकता है।

प्रतिभागियों को अनुसंधान के दौरान मौलिकता, नैतिकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण बनाए रखने के लिए भी प्रेरित किया गया। साथ ही, आधुनिक तकनीकी संसाधनों का उचित उपयोग करते हुए शोध कार्य को अधिक प्रभावी और उपयोगी बनाने की आवश्यकता बताई गई।

शोधार्थियों और विद्यार्थियों को मिला सीखने का अवसर

कार्यक्रम में शामिल विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अनुभवी शिक्षाविदों के विचार सुनने तथा शोध के सैद्धांतिक और व्यावहारिक पक्षों को समझने का अवसर मिला। संगोष्ठी के माध्यम से प्रतिभागियों को शोध विषय के चयन से लेकर निष्कर्षों के विश्लेषण तक की प्रक्रिया के महत्व से परिचित कराया गया।

आयोजकों के अनुसार, इस तरह के अकादमिक आयोजन विद्यार्थियों में वैज्ञानिक चिंतन, आलोचनात्मक दृष्टिकोण और नवाचार की भावना विकसित करने में सहायक होते हैं। इससे शोध कार्य को अधिक व्यवस्थित, गुणवत्तापूर्ण और समाजोपयोगी बनाने की दिशा में प्रोत्साहन मिलता है।

कॉलेज प्रबंधन और आयोजन समिति का सहयोग

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का आयोजन मुख्य संरक्षक डॉ. बी.पी. भाटिया के मार्गदर्शन में किया गया। संरक्षक के रूप में डॉ. मनी जैन, डॉ. संजय अग्रवाल और डॉ. आशीष अग्रवाल का संरक्षण रहा।

कार्यक्रम में सचिव श्री अतुल देशलहरा तथा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सिद्धार्थ जैन का विशेष सहयोग रहा। संगोष्ठी का संयोजन डॉ. राठी शर्मा एवं प्रो. डॉ. गुरमीत कौर ने किया।

आयोजन के दौरान प्रतिभागियों को शोध के सैद्धांतिक और व्यावहारिक पहलुओं को समझने तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के शिक्षाविदों के विचारों से लाभान्वित होने का अवसर मिला।

गुणवत्तापूर्ण और समाजोपयोगी शोध का संकल्प

संगोष्ठी का समापन शैक्षिक अनुसंधान को गुणवत्तापूर्ण, उपयोगी और समाजोपयोगी बनाने के संकल्प के साथ हुआ। कार्यक्रम में शोध के प्रति रुचि, वैज्ञानिक चिंतन, आलोचनात्मक दृष्टिकोण और नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

आयोजन का संदेश रहा कि शिक्षा के क्षेत्र में शोध को केवल अकादमिक आवश्यकता तक सीमित न रखकर वास्तविक समस्याओं के समाधान और शिक्षण व्यवस्था में सुधार का माध्यम बनाया जाना चाहिए।

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