
जामगांव-आर। CG DASTAK
बरगद, पीपल, नीम और कदम के पौधों का रोपण, ग्रामीणों ने लिया पर्यावरण संरक्षण का संकल्प
जामगांव-आर। धार्मिक आस्था, सामाजिक सरोकार और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ते हुए जामगांव-आर में ‘उषा-बसंत हरित सेतु’ पहल की शुरुआत की गई। श्रीराम मंदिर निर्माण परिवार एवं रामोत्सव समिति, जामगांव-आर की ओर से डोंगिया तालाब परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान तालाब की मेड़ पर विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए। इस अवसर पर ग्रामीणों ने पौधों के संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में बरगद, पीपल, नीम और कदम जैसे पौधों का रोपण किया गया। आयोजकों के अनुसार, पहल का उद्देश्य केवल तालाब परिसर की सुंदरता बढ़ाना नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में यहां हरियाली विकसित करना और ग्रामीणों को प्रकृति संरक्षण से जोड़ना है।
🌱 पौधरोपण को बताया आने वाली पीढ़ियों की जिम्मेदारी
कार्यक्रम में ग्राम पंचायत सरपंच रूपेंद्र शुक्ला ने कहा कि पौधरोपण को केवल औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखना चाहिए। लगाए गए पौधे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थायी विरासत बन सकते हैं। उन्होंने वृक्षारोपण को एक तरह का यज्ञ बताते हुए स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण के निर्माण पर जोर दिया।

शासकीय महाविद्यालय जामगांव-आर के समिति अध्यक्ष नरेश केला ने कहा कि श्रीराम मंदिर निर्माण के बाद पर्यावरण संरक्षण की दिशा में शुरू की गई यह पहल सामाजिक हित से जुड़ी है। उन्होंने ऐसे प्रयासों को गांव के विकास में सकारात्मक सोच का प्रतीक बताया।

सेजेस बेल्हारी के अध्यक्ष मनीष चंद्राकर ने कहा कि पर्यावरण आधारित आयोजन युवाओं और ग्रामीणों को सकारात्मक सामाजिक कार्यों से जोड़ने का काम करते हैं।
भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष किशोर साहू ने भी ग्रामीणों से इस पहल में सहयोग करने और पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी निभाने की अपील की।
🌿 ‘उषा-बसंत हरित सेतु’ सिर्फ नाम नहीं, एक विचार
कार्यक्रम के मुख्य आयोजक एवं सामाजिक कार्यकर्ता संदीप चंद्राकर ने डोंगिया तालाब को गांव की पुरानी यादों, भावनाओं और ग्रामीण जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान बताया।

उन्होंने कहा कि तालाब केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि गांव की पहचान का हिस्सा है। इसलिए इसके आसपास हरियाली विकसित करना सामूहिक जिम्मेदारी है।
संदीप चंद्राकर ने ‘उषा-बसंत हरित सेतु’ नाम की अवधारणा भी समझाई। उनके अनुसार—
‘उषा’ नई सुबह, नई आशा और नई शुरुआत का प्रतीक है।
‘बसंत’ नवजीवन, हरियाली, ऊर्जा और खुशहाली को दर्शाता है।
‘हरित’ प्रकृति, वृक्ष और पर्यावरण का संदेश देता है।
‘सेतु’ एक पीढ़ी को दूसरी पीढ़ी से जोड़ने वाले पुल का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि आज लगाया गया एक पौधा आने वाले वर्षों में पेड़ बनेगा और उसका लाभ उन पीढ़ियों को भी मिलेगा, जो आज यहां मौजूद नहीं हैं। इसी सोच के साथ डोंगिया तालाब को हरियाली से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
🌳 पौधा लगाने के साथ संरक्षण पर भी जोर
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि पौधरोपण तभी सार्थक होगा, जब लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल और सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों से अपील की गई कि वे केवल पौधा लगाने तक सीमित न रहें, बल्कि उसके विकास और संरक्षण में भी सहभागी बनें।
कार्यक्रम में रूपेंद्र शुक्ला, नरेश केला, किशोर साहू, जिला मंत्री शैलेंद्री मांडवी, मनीष चंद्राकर, पूर्णेंद्र सिन्हा, उपसरपंच मुकेश साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
🌱 धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
‘उषा-बसंत हरित सेतु’ के जरिए जामगांव-आर ने धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की पहल की है। डोंगिया तालाब की मेड़ पर लगाए गए पौधों के माध्यम से गांव को आने वाले समय में हरित और पर्यावरण-अनुकूल स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है।
संदेश साफ है—आज लगाया गया पौधा सिर्फ आज के लिए नहीं, आने वाली पीढ़ियों के लिए है।









