
नई दिल्ली/मुंबई। CG DASTAK
नई दिल्ली/मुंबई। हथियारों की कथित तस्करी से जुड़े एक मामले में पुलिस की जांच में अमृतसर से मुंबई तक हथियार पहुंचाने के नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक, कुणाल और सुमित अमृतसर से एक पिस्टल और 20 कारतूस लेकर आए थे। इसके बाद हथियार मुंबई पहुंचाने की जिम्मेदारी राधा और बबिता नाम की दो महिलाओं को सौंपे जाने का आरोप है। इस काम के लिए दोनों महिलाओं को 10 से 12 हजार रुपये दिए गए थे।

पुलिस के अनुसार, मामले में अनिल पंडित की भूमिका भी जांच के दायरे में है। आरोप है कि उसने हथियार रखे जाने की लोकेशन कुणाल को भेजी थी। दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने 20 अक्टूबर को चारों आरोपियों को हिरासत में लिया था। इसके बाद मुंबई पुलिस की सीआईडी टीम ने अदालत से पूछताछ और औपचारिक गिरफ्तारी की अनुमति मांगी। अदालत ने तीन दिन की ट्रांजिट रिमांड मंजूर की।
अमृतसर में तय लोकेशन से उठाए गए हथियार
पुलिस के मुताबिक, हरियाणा के सोनीपत में रहने वाले कुणाल और सुमित को करीब दो सप्ताह पहले अमृतसर से हथियार लाने का काम सौंपा गया था। आरोप है कि उन्हें किसी व्यक्ति से सीधे हथियार लेने के बजाय एक पूर्व निर्धारित स्थान से उन्हें उठाना था।

जांच के अनुसार, हथियार रखे जाने की लोकेशन अनिल पंडित ने कुणाल को भेजी थी। पुलिस का कहना है कि हथियार रखने वाले व्यक्ति और उन्हें उठाने वालों के बीच सीधे संपर्क के बजाय पहले से तय स्थान का इस्तेमाल किया गया।
क्या होता है ‘डेड लेटर बॉक्स’?
पुलिस की जांच में सामने आए कथित तरीके को ‘डेड लेटर बॉक्स’ कहा जाता है। इसमें किसी सामान या संदेश को एक तय स्थान पर रख दिया जाता है और दूसरा व्यक्ति वहां से उसे उठा लेता है। इस व्यवस्था में दोनों व्यक्तियों का आमने-सामने मिलना जरूरी नहीं होता।

पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि हथियारों की आपूर्ति करने वाले लोग कौन थे और इस नेटवर्क में किसकी क्या भूमिका थी।
कुणाल की गर्लफ्रेंड राधा को सौंपी गई थी जिम्मेदारी
पुलिस के अनुसार, कुणाल ने अपनी गर्लफ्रेंड राधा को हथियार मुंबई पहुंचाने के लिए तैयार किया था। बबिता भी इस काम में शामिल बताई जा रही है। आरोप है कि दोनों महिलाओं को हथियार पहुंचाने के बदले 10 से 12 हजार रुपये दिए गए थे।
जांच में एन्क्रिप्टेड ऐप के जरिए संपर्क बनाए रखने की बात भी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, हथियार कहां से लेने हैं और आगे किसे सौंपने हैं, इस संबंध में निर्देश कुणाल के माध्यम से पहुंचाए जा रहे थे।
15 अक्टूबर को दिल्ली से मुंबई रवाना हुई थीं दोनों महिलाएं
पुलिस के मुताबिक, 15 अक्टूबर को कुणाल राधा और बबिता को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन लेकर पहुंचा था। आरोप है कि पिस्टल राधा के बैग में रखी गई थी, जिसके बाद दोनों महिलाएं मुंबई के लिए रवाना हुईं।
पुलिस का दावा है कि इस दौरान कुणाल एन्क्रिप्टेड ऐप के माध्यम से संपर्क में रहा। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि हथियारों को मुंबई में किसे सौंपा जाना था और इस पूरे नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।
चार आरोपियों की तीन दिन की ट्रांजिट रिमांड मंजूर
20 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने चारों आरोपियों को हिरासत में लिया। इसके बाद मुंबई पुलिस की सीआईडी टीम ने अदालत में आरोपियों से पूछताछ और औपचारिक गिरफ्तारी की अनुमति मांगी।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत ने अनुमति देने के साथ तीन दिन की ट्रांजिट रिमांड भी मंजूर की। मामले में हथियारों के स्रोत, कथित नेटवर्क और आरोपियों की भूमिका को लेकर आगे की जांच जारी है।
CG Dastak की नजर: हथियारों की कथित सप्लाई से जुड़े इस मामले में जांच एजेंसियों के सामने हथियारों के स्रोत, उन्हें मुंबई पहुंचाने के उद्देश्य और संभावित अन्य संपर्कों का पता लगाना अहम होगा।
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नोट: खबर पुलिस के अनुसार उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और अदालत में दोष सिद्ध होना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।









