New Income Tax Bill 2025: छह दशक पुराने कानून को बदलने आया नया विधेयक, सेलेक्ट कमेटी के 500+ सुझाव शामिल, जानें क्या हैं बड़े बदलाव

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोमवार, 11 अगस्त को नया इनकम टैक्स बिल 2025 संसद में पेश किया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में इसका संशोधित संस्करण रखा, जिसमें बीजेपी सांसद बैजयंत पांडा की अध्यक्षता वाली सेलेक्ट कमेटी की अधिकांश सिफारिशें शामिल की गई हैं।

यह नया बिल 1961 के पुराने Income Tax Act को पूरी तरह से बदलने के लिए लाया गया है। फरवरी 2025 में इसका पहला ड्राफ्ट पेश किया गया था, लेकिन उसमें भाषा, प्रावधानों और ड्राफ्टिंग से जुड़ी कुछ तकनीकी गड़बड़ियां थीं। सरकार ने उस समय बिल को सेलेक्ट कमेटी को भेज दिया था। समिति की रिपोर्ट आने के बाद पुराने बिल को वापस लेकर, सभी आवश्यक सुधारों के साथ नया और स्पष्ट ड्राफ्ट पेश किया गया है।

क्यों बदला गया इनकम टैक्स कानून?

वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा —

“पुराना इनकम टैक्स एक्ट 6 दशक पुराना हो चुका था। इसमें कई जटिल और अप्रासंगिक प्रावधान थे। नए बिल का मकसद भाषा को सरल बनाना, अस्पष्टताओं को खत्म करना और टैक्स सिस्टम को मौजूदा अर्थव्यवस्था के हिसाब से आधुनिक बनाना है।”

सेलेक्ट कमेटी की प्रमुख सिफारिशें

सेलेक्ट कमेटी ने 4,584 पेज की रिपोर्ट में 566 सुझाव दिए, जिनमें से 285 बदलावों को बिल में लागू किया गया है। मुख्य सिफारिशें इस प्रकार हैं:

1. परिभाषाओं में स्पष्टता – टैक्स कानून की परिभाषाओं को और सटीक किया जाए ताकि कोई भ्रम न रहे।

2. आईटीआर रिफंड नियम में बदलाव – पुराने प्रावधान में लेट ITR फाइल करने पर रिफंड रोकने का नियम था। समिति ने इसे हटाने का सुझाव दिया।

3. धारा 80M में बदलाव – स्पेशल टैक्स रेट वाली कंपनियों के इंटर-कॉर्पोरेट डिविडेंड पर मिलने वाली डिडक्शन में संशोधन।

4. जीरो TDS सर्टिफिकेट – टैक्सपेयर्स को यह सुविधा देने का प्रस्ताव कि वे जीरो TDS सर्टिफिकेट ले सकें।

5. MSME की परिभाषा में एकरूपता – माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज की परिभाषा को MSME एक्ट के अनुरूप करने की सिफारिश।

6. अडवांस रूलिंग फीस, PF पर TDS और पेनल्टी पावर्स में स्पष्टता – इन क्षेत्रों में अनावश्यक अस्पष्टताओं को खत्म करना।

टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं

टैक्सपेयर्स के बीच सबसे बड़ा सवाल था कि क्या नए बिल में आयकर स्लैब बदले जाएंगे?

आयकर विभाग ने साफ किया है —

  • टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं।
  • LTCG टैक्स रेट्स में कोई संशोधन नहीं।
  • मुख्य फोकस केवल कानून की भाषा, स्ट्रक्चर और अनावश्यक प्रावधानों को हटाने पर है।

क्यों है यह बिल महत्वपूर्ण?

  • 60 साल पुराना कानून बदलेगा — इससे टैक्स कानून आधुनिक जरूरतों के अनुरूप होगा।
  • भाषा होगी सरल — आम करदाता भी आसानी से समझ सकेगा कि उसके लिए क्या नियम लागू हैं।
  • अनावश्यक नियम हटेंगे — कई प्रावधान जो अब अप्रासंगिक हो चुके हैं, उन्हें हटाया जाएगा।
  • पारदर्शिता और स्पष्टता बढ़ेगी — क्रॉस-रेफरेंस और ड्राफ्टिंग की गलतियां सुधारी गई हैं।

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