Mahasamund : ये स्कूल है या किसी हॉरर फिल्म का सेट, छत पर दिखेंगे उल्टे लटके डरावने चमगादड़, पढ़िए हमारी ये खास रिपोर्ट

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महासमुंद शहर से लगा ग्राम पंचायत नांदगांव जहां के सरकारी हाई स्कूल के भीतर घुसते ही लगेगा जैसे आप किसी हॉरर फिल्म स्टूडियों के सेट पर पहुंच गए हैं और वहां पर कोई हॉरर फिल्म का सेट लगा हो, स्कूल के भीतर घुसते ही आपको स्कूल के छत पर उल्टे लटके डरावने चमगादड़ दिखने लगेंगे और उनके बीट की बदबू आने लगेगी। लाखों रुपए की लागत से बनने वाला दो मंजिला स्कूल बाहर से तो स्कूल दिखता है लेकिन अंदर से खंडहर है।

पढ़िए हमारी ये खास रिपोर्ट

हम बात कर रहे हैं महासमुंद शहर से लगभग 7 किलो मीटर दूर का ग्राम पंचायत नांदगांव जहां शासकीय हाई स्कूल भवन जो बाहर से तो स्कूल नजर आता है, लेकिन अंदर पूरी तरह डरावनी फिल्म के खंडहर की तरह दिखता है। इस स्कूल की छतों पर चमगादड़ उल्टे लटके दिखेंगे, इसे देखकर आपके हृदय की गति कुछ पल के लिए बढ़ने लग जाती है।

इस हाई स्कूल का निर्माण 2011_2012 में शुरू हुआ लेकिन यह भवन लगभग 12 साल बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। जिला शिक्षा कार्यालय से मिली जानकारी अनुसार इस भवन में 48 लाख 75 हजार रूपए पूरे खर्च हो चुके है, और भवन को बनाने वाली कार्य एजेंसी लोक निर्माण विभाग है। भवन को देख कर बिल्कुल भी यह नहीं लगता कि इस भवन में 48 लाख 75 हजार रूपए खर्च कर दिया गया है और पूरा नहीं हुआ है। इस नादगांव के हाई स्कूल में व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। लगभग 12 साल बीत जाने के बाद यह अपूर्ण भवन जर्जर हो चुका है।

इस स्कूल भवन के पहले तल पर नांदगांव और पास के गांव के बच्चे लगभग 111 छात्र छात्राएं 2 कक्ष में डर के साए में अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं।

इस हाई स्कूल का निर्माण केन्द्र सरकार ने मिले बजट से कराया गया है, जो 12 साल बीत जाने के बाद पूरा नहीं हो पाया। स्कूल के अपूर्ण रह जाने से पिछले 12 साल से यहां के बच्चों को लाइब्रेरी नहीं मिल पाई है और ना प्रयोगशाला। इस स्कूल के बच्चों की पढ़ाई अब भगवान भरोसे चल रही है।

मालूम हो कि स्कूल जिला शिक्षा विभाग के जब हम इस विषय पर जानकारी लेने पहुंचे तब हमें कोई विशेष जानकारी यहां से नहीं मिल पाई के आखिर स्कूल भवन आधा अधूरा क्यों रह गया है। हां पर इस बात की जानकारी जरूर मिली कि स्कूल भवन के लिए 47 लाख 75 हजार का आबंटन आया था, जिस पर विभाग ने ठेकेदार को 48 लाख 75 हजार 5 सौ का भुगतान किया है, बावजूद इसके यह हाई स्कूल अधूरा रह गया है। इस लापरवाही और भ्रष्टाचार के लिए कौन जिम्मेदार है इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

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