Amit Baghel पर दो और FIR, 19 दिसंबर तक जेल — लेकिन सवाल उठ रहा: क्या छत्तीसगढ़ियों का अपमान करने वालों पर भी कभी हुई कार्रवाई?

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रायपुर। छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रमुख अमित बघेल पर कानूनी कार्रवाई लगातार बढ़ती जा रही है। देवेंद्र नगर पुलिस ने सोमवार को दो नई FIR दर्ज कीं, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें 19 दिसंबर तक न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। रायपुर में अब तक उनके खिलाफ 10 FIR, जबकि अन्य राज्यों में 12 FIR दर्ज हैं। यानी कुल 22 मामलों में वे घिर चुके हैं।

पुलिस अब बाकी 7 मामलों में भी गिरफ्तारी की तैयारी कर रही है।

यह कार्रवाई धार्मिक व सामाजिक भावनाएं आहत करने वाले बयानों के आधार पर की गई है। देवेंद्र नगर, तेलीबांधा और कोतवाली थाने में नई FIR दर्ज हुई हैं। कई शिकायतें छिंदवाड़ा और दुर्ग से रायपुर ट्रांसफर होकर आई हैं।

लेकिन अब जनता का बड़ा सवाल — क्या एकतरफा कार्रवाई हो रही है?

जब भी किसी छत्तीसगढ़िया नेता, संस्थान या समाज से जुड़े विवाद सामने आते हैं, पुलिस तुरंत FIR दर्ज करती है, गिरफ्तारी करती है, रिमांड मांगती है।

लेकिन…

👉 क्या कभी पुलिस ने सोशल मीडिया पर छत्तीसगढ़ियों को गाली देने वाले “परदेसियों” पर FIR दर्ज की है?

👉 क्या शराब पीकर, लाइव आकर, छत्तीसगढ़ियों के खान-पान, बोली, पहनावे और संस्कृति का मज़ाक उड़ाने वालों को कभी गिरफ्तार किया गया है?

👉 क्या किसी एक भी ऐसे व्यक्ति पर कार्रवाई हुई है जिसने लगातार छत्तीसगढ़ियों को अपमानित किया हो?

उत्तर है — नहीं।

कोई रिकॉर्ड नहीं, कोई FIR नहीं, कोई गिरफ्तारी नहीं।

यही बात आज छत्तीसगढ़ के लोगों के मन में चोट कर रही है।

छत्तीसगढ़ में रहकर, यहीं की मिट्टी खाकर, यहीं की सड़कों पर चलते हुए,

कुछ परदेसियों द्वारा—

  • छत्तीसगढ़ियों को ललकारना,
  • मजाक उड़ाना,
  • संस्कृति का अपमान करना,
  • खान-पान और बोली पर तंज कसना, लगातार होता रहा है।

लेकिन किसी पर कार्रवाई नहीं होती

👉 क्या इसका मतलब यह है कि छत्तीसगढ़ियों का अपमान “सरकारी संरक्षण” में हो रहा है?

आज आम जनता यही सवाल पूछ रही है।

  • अगर किसी छत्तीसगढ़िया से एक गलती हो जाए तो FIR, गिरफ्तारी और रिमांड तुरंत होती है।
  • लेकिन परदेसियों द्वारा खुला अपमान करने पर प्रशासन खामोश क्यों?
  • कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए — छत्तीसगढ़ियों के लिए भी।

📌 जनता की आवाज़

“दो नई FIR दर्ज कर दी गईं… मगर आज मेरा सवाल है —

जब परदेसियों ने छत्तीसगढ़ियों को गाली दी, सांस्कृतिक अपमान किया,

  • तब छत्तीसगढ़ पुलिस कहाँ थी?
  • क्या एक भी गिरफ्तारी हुई?
  • क्या एक भी FIR दर्ज हुई?

नहीं।

इसका सीधा मतलब यह है कि छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ियों का अपमान सरकारी संरक्षण में हो रहा है।”

यह सवाल अब सिर्फ एक संगठन का नहीं, पूरे छत्तीसगढ़ का है।

छत्तीसगढ़िया समाज अब जवाब चाहता है,

कानून बराबर चले या फिर यह स्वीकार किया जाए कि न्याय कुछ लोगों के लिए है और बाकी लोग सिर्फ दर्शक हैं।

 

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