भाजपा सरकार में शिक्षा व्यवस्था बदहाल, छात्रों को समय पर किताब और साइकिल तक नहीं – विधायक चातुरी नंद

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विधानसभा में शिक्षा विभाग के अनुदान मांगों पर शिक्षकों को पेंशन, शिक्षक भर्ती, बीएड डीएड हड़ताल सहित विभिन्न मुद्दों को उठाया

सरायपाली 15 मार्च 2026। सरायपाली विधायक चातुरी नंद ने विधानसभा में मांग संख्या 27 के विरोध में बोलते हुए प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने भले ही बजट में शिक्षा के लिए ₹22,360 करोड़ का प्रावधान किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर शिक्षा व्यवस्था बदहाल होती जा रही है।

विधायक चातुरी नंद ने कहा कि शिक्षा की मूल आवश्यकता पाठ्यपुस्तक होती है, लेकिन राज्य में बच्चों को समय पर किताबें तक उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। वर्ष 2025-26 में निःशुल्क पाठ्य पुस्तक योजना के लिए 213.28 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था, जिसमें से 139 करोड़ रुपए खर्च भी किए गए, इसके बावजूद कई जिलों में किताबें समय पर स्कूलों तक नहीं पहुंच पाईं। उन्होंने कहा कि महासमुंद जिले में स्कूलों में दिसंबर महीने में किताबें पहुंची, जबकि तब तक आधा सत्र समाप्त हो चुका था। इतना ही नहीं, आज भी कई विषयों की किताबें तीसरी कक्षा के बच्चों को उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था की घोर लापरवाही बताते हुए कहा कि हर वर्ष ऐसी स्थिति बनना जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता को दर्शाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले शैक्षणिक सत्र की किताबों की छपाई के लिए अब तक कागज की खरीदी तक नहीं हो पाई है, जिससे स्पष्ट है कि सरकार और विभाग के पास कोई ठोस योजना नहीं है। विधायक ने रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव सहित कई जिलों में पाठ्यपुस्तकों को कबाड़ी में बेचने के मामले को भी गंभीर बताया और कहा कि इस मामले में केवल छोटे कर्मचारियों को दोषी ठहराया जा रहा है, जबकि बड़े अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

विधायक चातुरी नंद ने कहा कि भाजपा सरकार ने “मोदी की गारंटी” के नाम पर बालक-बालिकाओं को निःशुल्क साइकिल देने का वादा किया था, लेकिन बालकों को अब तक साइकिल नहीं दी गई है। जहां साइकिलें वितरित की गई हैं, उनकी गुणवत्ता भी बेहद खराब है। उन्होंने कहा कि स्कूल 16 जून से शुरू हो जाते हैं, लेकिन साइकिलों का वितरण सत्र समाप्ति के समय किया जाता है, जिससे छात्राओं को पूरे वर्ष पैदल स्कूल जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में प्रदेश के गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के उद्देश्य से स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की स्थापना की गई थी। इन स्कूलों की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई थी कि पालक अपने बच्चों को निजी स्कूलों से निकालकर आत्मानंद स्कूलों में प्रवेश दिला रहे थे। लेकिन भाजपा सरकार आने के बाद इन स्कूलों की स्थिति खराब होती जा रही है और पिछले दो वर्षों से इनके संचालन के लिए पर्याप्त राशि तक जारी नहीं की गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रदेश के गरीब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार नहीं है।

विधायक चातुरी नंद ने राज्य में शिक्षकों की भारी कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 30,700 प्राथमिक स्कूलों में से 6,872 स्कूल ऐसे हैं जहां केवल एक ही शिक्षक पदस्थ है, जबकि 212 स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी शिक्षक नहीं है। वहीं 13,149 प्री-मिडिल स्कूलों में से 255 स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक है। उन्होंने कहा कि सरकार युक्तियुक्तरण के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन वास्तविकता यह है कि आज भी हजारों स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि “मोदी की गारंटी” के तहत 57 हजार शिक्षकों की भर्ती का दावा किया गया था, लेकिन अब यह संख्या घटकर मात्र 5 हजार भर्ती तक सिमट गई है और उसकी प्रक्रिया भी अब तक पूरी नहीं हो पाई है।

विधायक चातुरी नंद ने यह भी कहा कि राज्य के करीब पौने दो लाख शिक्षाकर्मियों को नियमित तो कर दिया गया है, लेकिन 15 हजार से अधिक शिक्षकों को पेंशन योजना का लाभ नहीं मिलेगा। 2018 में घोषित पेंशन योजना में न्यूनतम 10 वर्ष की सेवा अनिवार्य कर दी गई है, जिसके कारण हजारों शिक्षक पेंशन से वंचित हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षक लगातार पेंशन की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार इस विषय पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं ले रही है।

उन्होंने पिछले कई महीनों से बीएड और डीएड धारक युवाओं के आंदोलन का भी मुद्दा उठाया और कहा कि अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे युवाओं की बात सुनने के बजाय सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही है और उन्हें जेल भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षक भर्ती 2023 में सहायक शिक्षक के 2300 रिक्त पदों पर नियुक्ति देने का आदेश छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा 26 सितंबर 2025 को दिया जा चुका है, लेकिन आज तक नियुक्ति नहीं दी गई है।

विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में हुई शिक्षक भर्तियों में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास 37 ऐसे शिक्षकों की सूची है जो निर्धारित योग्यता पूरी नहीं करते, न तो उन्होंने समय पर टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण की है और न ही बीएड-डीएड की वैध डिग्री प्राप्त की है, इसके बावजूद उनकी नियुक्ति कर दी गई है।

विधायक चातुरी नंद ने अंत में अपने विधानसभा क्षेत्र सरायपाली की कुछ महत्वपूर्ण मांगें भी सरकार के सामने रखीं। उन्होंने ग्राम केंदुआ और खोकसा में हायर सेकेंडरी स्कूल भवन निर्माण, ग्राम पझरापाली में हाई स्कूल भवन निर्माण, पूर्व माध्यमिक शाला घाटकछार को हाई स्कूल में उन्नयन, प्राथमिक शाला बरिहापाली को मिडिल स्कूल में उन्नयन तथा हाई स्कूल भोथलडीह में आहाता निर्माण की मांग की।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सरकार को केवल घोषणाओं तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर ठोस और प्रभावी कदम उठाने होंगे, ताकि प्रदेश के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और समुचित शिक्षा मिल सके।

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