
विशाखापट्टनम | CG DASTAK
भारत ने अपनी सामरिक शक्ति को नई ऊंचाई पर पहुंचाते हुए बंगाल की खाड़ी में न्यूक्लियर पावर्ड सबमरीन INS अरिघाट से 3,500 किलोमीटर रेंज वाली K-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण मंगलवार को विशाखापट्टनम तट के पास किया गया।
इस सफल परीक्षण के साथ ही भारत ने जमीन और हवा के बाद अब समुद्र से भी परमाणु हथियार लॉन्च करने की पूर्ण क्षमता हासिल कर ली है। यह भारत की न्यूक्लियर ट्रायड (Land-Air-Sea) को और अधिक मजबूत बनाता है।
🔴 K-4 मिसाइल की प्रमुख विशेषताएं
- रेंज: लगभग 3,500 किलोमीटर
- वॉरहेड क्षमता: 2 टन तक का परमाणु वॉरहेड
- लॉन्च प्लेटफॉर्म: परमाणु पनडुब्बी
- विशेषता: पनडुब्बी से दागी जाने वाली अत्याधुनिक बैलिस्टिक मिसाइल
K-सीरीज की मिसाइलों में “K” अक्षर मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के सम्मान में रखा गया है, जिनका भारत के मिसाइल कार्यक्रम में ऐतिहासिक योगदान रहा है।
🔴 वैश्विक संदेश: भारत की बढ़ती सामरिक ताकत
इस परीक्षण का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी जासूसी जहाजों की मौजूदगी के बावजूद भारत ने यह परीक्षण सफलतापूर्वक अंजाम दिया। यह साफ संकेत है कि भारत अपनी सुरक्षा और सामरिक तैयारियों को लेकर पूरी तरह सतर्क और सक्षम है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले 10–15 वर्षों तक दुनिया के पास ऐसा कोई प्रभावी एयर डिफेंस सिस्टम नहीं होगा, जो K-4 मिसाइल को इंटरसेप्ट कर सके। इससे भारत की डिटरेंस क्षमता (Deterrence Power) कई गुना बढ़ गई है।
🔴 भारत की सामरिक बढ़त
समुद्र के भीतर छिपकर परमाणु हमला करने की क्षमता दुश्मन के पहले हमले की स्थिति में भी जवाबी कार्रवाई संभव हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की स्थिति और मजबूत
🔴 निष्कर्ष
INS अरिघाट से K-4 मिसाइल का सफल परीक्षण न सिर्फ भारत की सैन्य तकनीक की सफलता है, बल्कि यह दुनिया को भारत की रणनीतिक शक्ति और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता का स्पष्ट संदेश भी देता है।
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