आदर्श महाविद्यालय रायपुर में भारतीय ज्ञान परंपरा और NEP-2020 पर राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

0
76

समग्र, मूल्य-आधारित और परिवर्तनकारी उच्च शिक्षा पर हुआ गहन मंथन

रायपुर | 20 दिसंबर 2025

आदर्श महाविद्यालय, दतरेंगा, रायपुर द्वारा कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर तथा वीतराग रिसर्च फाउंडेशन, रायपुर के सहयोग से 19–20 दिसंबर 2025 को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय था—

“भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) और राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 का सामंजस्य: समग्र एवं परिवर्तनकारी उच्च शिक्षा की दिशा में”।

संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता डॉ. वर्णिका शर्मा, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मुख्य अतिथि के रूप में की। अपने उद्घाटन उद्बोधन में उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के नैतिक, सामाजिक एवं मानवीय मूल्यों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के साथ जोड़ते हुए बाल-केंद्रित एवं मूल्य-आधारित शिक्षा की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्य व्याख्यान (Keynote Address) डॉ. अभा दुबे, उप-प्राचार्य, कोलंबिया कॉलेज, रायपुर द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने एनईपी-2020 की परिकल्पना के अनुरूप बहुविषयक, समग्र एवं मूल्य-आधारित शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका पर प्रकाश डाला।

तकनीकी सत्रों में देश के प्रतिष्ठित विद्वानों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रथम तकनीकी सत्र में डॉ. राजीव चौधरी, प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, शारीरिक शिक्षा अध्ययनशाला तथा अधिष्ठाता, छात्र कल्याण, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर ने भारतीय ज्ञान परंपरा और अनुभवात्मक अधिगम के समन्वय पर सारगर्भित व्याख्यान दिया।

इसके पश्चात् आयोजित सत्रों में डॉ. आलोक कुमार सिंह, सहायक प्राध्यापक, प्राणीशास्त्र विभाग, रामजस कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय तथा डॉ. अश्विनी कुमार राय, सहायक प्राध्यापक, पर्यावरण अध्ययन विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय ने अंतर्विषयक शिक्षा, सतत विकास एवं पारंपरिक ज्ञान के आधुनिक संदर्भों पर अपने विचार साझा किए।

डॉ. अंजली ओढिया, संयुक्त निदेशक, रूसा, राज्य परियोजना निदेशालय, रायपुर ने एनईपी-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, संस्थागत गुणवत्ता संवर्धन तथा NAAC मानकों के अनुरूप रणनीतियों पर प्रकाश डाला।

संगोष्ठी के दौरान शोध-पत्र प्रस्तुति सत्र भी आयोजित किए गए, जिनमें देश के विभिन्न भागों से आए शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। उत्कृष्ट शोध कार्यों के लिए श्रेष्ठ शोध-पत्र पुरस्कार प्रदान कर विद्वानों को सम्मानित किया गया।

समापन सत्र के मुख्य अतिथि डॉ. बंश गोपाल सिंह, पूर्व कुलपति, पं. सुंदरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय, बिलासपुर रहे। अपने समापन उद्बोधन में उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शैक्षिक सुधारों के समन्वय को राष्ट्र निर्माण की दिशा में अत्यंत आवश्यक बताया।

यह राष्ट्रीय संगोष्ठी उच्च शिक्षा में मूल्य-आधारित, समग्र एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि सिद्ध हुई। आयोजकों ने सभी अतिथियों, संसाधन व्यक्तियों, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।

संगोष्ठी के अंतर्गत प्रस्तुत उत्कृष्ट शोध कार्यों को प्रोत्साहित करने हेतु श्रेष्ठ शोध-पत्र पुरस्कार प्रदान किए गए। प्रथम स्थान का पुरस्कार डॉ. प्रियंका तिवारी, विप्र कॉलेज, रायपुर को प्रदान किया गया। द्वितीय स्थान भावना क्षत्रिय, आई.टी. कॉलेज, भिलाई को तथा तृतीय स्थान नोमेश्वरी साहू, आदर्श कॉलेज, रायपुर को प्रदान किया गया। निर्णायक मंडल द्वारा शोध-पत्रों का मूल्यांकन अकादमिक गुणवत्ता, नवाचार, विषय की प्रासंगिकता एवं शोध-दृष्टि के आधार पर किया गया। पुरस्कार वितरण के माध्यम से शोधार्थियों एवं शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण और मूल्य-आधारित शोध के लिए प्रेरित किया गया।

इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन आदर्श महाविद्यालय, दतरेंगा, रायपुर के निदेशक श्री विवेक सक्सेना के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के संरक्षक के रूप में डॉ. दिव्या शर्मा (वीतराग रिसर्च फाउंडेशन) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संगोष्ठी के संयोजक के रूप में डॉ. रोली तिवारी ने संपूर्ण आयोजन का प्रभावी समन्वय किया, जबकि प्राचार्य डॉ. बरनाली रॉय के नेतृत्व में आयोजन समिति ने कार्यक्रम को सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया। आयोजकों के कुशल नेतृत्व, अकादमिक प्रतिबद्धता एवं समन्वित प्रयासों से यह राष्ट्रीय संगोष्ठी उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि सिद्ध हुई।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here