Raipur: जमीन डायवर्सन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी — 15 दिन में आदेश, नहीं तो ऑटोमेटिक मंजूरी

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में जमीन डायवर्सन (भूमि उपयोग परिवर्तन) की प्रक्रिया अब पूरी तरह ऑनलाइन होने जा रही है। इसके लागू होते ही गांव से लेकर शहर तक किसानों और भूमि स्वामियों को एसडीएम कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। राज्य सरकार ने इस नई व्यवस्था का प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लागू किया जाएगा।

💻 ऑनलाइन आवेदन और भुगतान की सुविधा

नई व्यवस्था के तहत जमीन का डायवर्सन कराने के लिए भूमि स्वामी को सरकारी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा।

आवेदन के साथ—

तय भू-राजस्व, और प्रीमियम दर का ऑनलाइन भुगतान भी किया जाएगा।आवेदन सीधे संबंधित जिले के एसडीएम के पास ऑनलाइन पहुंचेगा।

⏱️ 15 दिन में आदेश अनिवार्य, वरना ऑटोमेटिक मंजूरी

नियमों के अनुसार एसडीएम को आवेदन मिलने के 15 दिनों के भीतर डायवर्सन आदेश जारी करना अनिवार्य होगा।

यदि तय समय में आदेश जारी नहीं होता है, तो—

➡️ 16वें दिन सिस्टम से स्वतः आदेश जारी हो जाएगा,

➡️ और डायवर्सन स्वतः मान्य माना जाएगा।

यह प्रावधान समयबद्ध और जवाबदेह व्यवस्था सुनिश्चित करेगा।

📝 15 दिन का समय दावा-आपत्ति के लिए

राज्य सरकार ने इसके लिए छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (व्यपवर्तित भूमि के लिए भू-राजस्व का निर्धारण तथा पुनर्निधारण) नियम 2025 तैयार किया है।

इन नियमों पर 15 दिनों तक दावा-आपत्ति आमंत्रित की गई है।

दावा-आपत्तियों के निराकरण के बाद नियमों को अंतिम रूप देकर लागू किया जाएगा।

🏢 एसडीएम कार्यालय के चक्कर से मिलेगी राहत

अब तक डायवर्सन प्रक्रिया लंबी और जटिल मानी जाती थी।पहले एसडीएम को 60 दिन तक का समय मिलता था, फिर भी आवेदकों को बार-बार दफ्तर जाना पड़ता था। इसी वजह से राज्य में हजारों डायवर्सन प्रकरण लंबित हैं।

नई ऑनलाइन व्यवस्था से न केवल लंबित मामलों में कमी आएगी, बल्कि अघोषित लेन-देन पर भी रोक लगने की उम्मीद है।

💰 प्रीमियम दरें होंगी लागू

नई प्रणाली में डायवर्सन के लिए प्रीमियम दरें तय की गई हैं—न्यूनतम लगभग ₹3 प्रति वर्गमीटर, अधिकतम ₹25 प्रति वर्गमीटर तक।

ये दरें—

नगर निगम, नगरपालिका, नगर पंचायत, और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग-अलग होंगी।

साथ ही उपयोग के अनुसार भी अलग दरें लागू होंगी, जैसे—

आवासीय, कॉलोनी परियोजना, वाणिज्यिक, औद्योगिक, मिश्रित उपयोग, सार्वजनिक एवं संस्थागत, चिकित्सा सुविधाएं, और विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ)।

सरकार का दावा

राज्य सरकार का कहना है कि इस नई ऑनलाइन व्यवस्था से डायवर्सन प्रक्रिया पारदर्शी, समयबद्ध, और आसान होगी, जिसका सीधा लाभ किसानों, जमीन मालिकों और निवेशकों को मिलेगा।

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