
नई दिल्ली। वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों को ऐतिहासिक सफलता मिली है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने छत्तीसगढ़ के घने और कठिन अबूझमाड़ क्षेत्र में एक वर्ष के भीतर रणनीतिक विस्तार पूरा कर लिया है, जिससे नक्सलियों का अंतिम प्रमुख अंतरराज्यीय मूवमेंट कॉरिडोर पूरी तरह सील हो गया है।
नारायणपुर से लगभग 135 किलोमीटर दूर लंका कंपनी ऑपरेटिंग बेस (COB) की स्थापना ITBP और छत्तीसगढ़ पुलिस ने संयुक्त रूप से की है। यह कैम्प पिछले तीन महीनों में सुरक्षा बलों द्वारा स्थापित नौवां कैंप है। कभी नक्सलियों का सबसे मजबूत गढ़ माना जाने वाला अबूझमाड़ अब सुरक्षा बलों की पहुंच में आ चुका है.
ITBP का रणनीतिक कब्जा — दक्षिण-पूर्वी कॉरिडोर बंद
ITBP की 44वीं बटालियन, छत्तीसगढ़ पुलिस और DRG की संयुक्त टीम ने लंका COB को महाराष्ट्र सीमा से मात्र 3 किमी दूरी पर स्थापित किया है।
इससे माओवादी संगठन का वह महत्वपूर्ण कॉरिडोर सील हो गया है जो—
- गढ़चिरौली (महाराष्ट्र)
- बीजापुर (छत्तीसगढ़)
- तेलंगाना के नक्सल प्रभावित इलाकों को जोड़ता था।
यह वही मार्ग था जिसका उपयोग नक्सली वर्षों से
✔ हथियार और राशन की सप्लाई,
✔ कैडर मूवमेंट,
✔ और सुरक्षित ठिकानों में रोटेशन जैसी गतिविधियों के लिए करते थे।
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इस कॉरिडोर का बंद होना नक्सली तंत्र के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।
लगातार 9 कैम्प—अबूझमाड़ में पहली बार इतनी गहराई तक सुरक्षा उपस्थिति
बीते 3 महीनों में ITBP और राज्य पुलिस ने—
- कोकोनार
- कोटगांव
- जौंदर
- मेटल
- गढ़चिरौली बॉर्डर सेक्टर सहित रणनीतिक बिंदुओं पर कैंप स्थापित किए हैं।
लंका COB की स्थापना से अब सुरक्षा बल अबूझमाड़ के सबसे दुर्गम हिस्सों तक पहुंच चुके हैं। यह वही इलाका है जहां दशकों से नक्सली शासन चलता था और आमजन कभी स्वतंत्र रूप से आवाजाही नहीं कर पाते थे।
प्रशासनिक पहुंच और विकास के नए द्वार
कॉरिडोर के बंद होने से—
- गांवों में पहली बार स्वास्थ्य व शिक्षा सेवाएँ पहुँचेगी
- सड़क निर्माण तेज होगा
- ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा
- नक्सलियों की सप्लाई लाइन कटेगी
सुरक्षा बलों का दावा है कि आने वाले समय में अबूझमाड़ पूरी तरह मुख्यधारा में आ जाएगा।










