
रायपुर। देशभर के हजारों मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए एक अहम मुद्दा सामने आया है। एमसीसी (Medical Counselling Committee) द्वारा MBBS काउंसलिंग के दूसरे चरण (Round-2) के बाद नई सीटें जोड़े जाने से छात्रों में गहरा असंतोष है। खासकर छत्तीसगढ़ के छात्रों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, क्योंकि नई सीटें जोड़े जाने का निर्णय त्यागपत्र (Resignation) की समय-सीमा समाप्त होने के बाद लिया गया।
एमसीसी काउंसलिंग के राउंड-2 में छत्तीसगढ़ के कई छात्रों को देशभर के डीम्ड यूनिवर्सिटीज़ में महंगी फीस पर सीटें आवंटित हुईं। इनमें से अनेक छात्र आर्थिक रूप से साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं। वहीं, 26 सितंबर 2025 और 11 अक्टूबर 2025 को एनएमसी (National Medical Commission) की अधिसूचनाओं के अनुसार, छत्तीसगढ़ के निजी मेडिकल कॉलेजों में क्रमशः 300 और 50 नई MBBS सीटें जोड़ी गईं।
समस्या यह है कि ये सीटें तब जोड़ी गईं जब त्यागपत्र की समयसीमा पहले ही समाप्त हो चुकी थी। ऐसे में वे छात्र, जो अपने गृह राज्य में कम फीस वाले कॉलेजों में प्रवेश लेना चाहते थे, अब इस अवसर से वंचित रह गए हैं।
छात्रों की प्रमुख मांग:
एमसीसी को त्यागपत्र (Resignation) की सुविधा पुनः खोलनी चाहिए ताकि जो विद्यार्थी अपने राज्य में नई जोड़ी गई सीटों पर एडमिशन लेना चाहते हैं, वे ऐसा कर सकें।
छात्रों का कहना है —
“हमने Round-2 में डीम्ड यूनिवर्सिटी की सीट ली क्योंकि उस समय राज्य में सीटें सीमित थीं। लेकिन अब जब छत्तीसगढ़ में नई 350 सीटें बढ़ा दी गई हैं, तो हमें अपने राज्य के कॉलेजों में पढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। एमसीसी को छात्रों के हित में Resignation Window फिर से खोलनी चाहिए।”
छात्रों ने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य काउंसलिंग का तीसरे चरण (Round-3) का परिणाम 26 अक्टूबर 2025 को जारी होना है और कॉलेज में रिपोर्ट करने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2025 तय की गई है। यदि एमसीसी समय रहते Resignation का विकल्प फिर से खोल दे, तो हजारों अभ्यर्थी अपने गृह राज्य में स्थानांतरित होकर पढ़ाई शुरू कर सकते हैं।
आर्थिक पहलू भी गंभीर:
डीम्ड यूनिवर्सिटी में MBBS की वार्षिक फीस जहाँ ₹20 लाख से अधिक है, वहीं राज्य के निजी मेडिकल कॉलेजों में यह फीस लगभग ₹8–10 लाख के बीच है। ऐसे में Resignation की अनुमति न मिलने से छात्रों पर लाखों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
शिक्षा विशेषज्ञों और पैरेंट्स एसोसिएशनों ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा है कि —
“एनएमसी द्वारा नई सीटें जोड़े जाने का समय छात्रों के प्रति अन्यायपूर्ण साबित हुआ है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और लचीलापन ज़रूरी है ताकि deserving students को समान अवसर मिल सके।”
छात्र अब इस विषय को लेकर शिक्षा मंत्रालय और एमसीसी को ज्ञापन भेजने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि न्यायसंगत समाधान निकाला जा सके।










