
रायपुर। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी पर लगे यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप के मामले में अब नया मोड़ आ गया है। सोशल मीडिया पर आरोप लगाने वाली महिला का एक ऑडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह खुद कह रही है कि उसके साथ कोई यौन उत्पीड़न नहीं हुआ। इस खुलासे के बाद मामला एकदम से उलट गया है।
शिकायतकर्ता महिला की बहन और जीजा ने भी इस पूरे विवाद को झूठा बताया है। उन्होंने मीडिया से कहा कि उनके परिवार को पहले भी झूठे मामलों में फंसाया जा चुका है। उनका दावा है कि यह पूरा विवाद ब्लैकमेलिंग और साजिश का हिस्सा है।
इधर, आईपीएस रतनलाल डांगी ने भी इस पूरे घटनाक्रम को एक राजनीतिक और व्यक्तिगत साजिश बताया है। उनका कहना है कि उनकी ईमानदार और साफ-सुथरी छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए ये आरोप लगाए जा रहे हैं, ताकि उनकी संभावित उच्च पदस्थ नियुक्तियों को रोका जा सके।
मामले की शुरुआत तब हुई जब एक सब इंस्पेक्टर की पत्नी ने रतनलाल डांगी पर 7 साल से उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए उच्च अधिकारियों को डिजिटल साक्ष्य सौंपे। शिकायत में कहा गया कि डांगी से 2017 में संपर्क हुआ था, जब वे कोरबा एसपी थे। बाद में उनके दंतेवाड़ा और राजनांदगांव पदस्थापनाओं के दौरान भी संपर्क बना रहा।
पीड़िता ने आरोप लगाया था कि बिलासपुर आईजी रहते हुए डांगी ने उसे परेशान करना शुरू किया और कई बार बंगले पर बुलाया।
हालांकि, अब वायरल ऑडियो और पीड़िता के परिजनों के बयानों के बाद कहानी का रुख बदलता नजर आ रहा है।
इसी बीच, आईपीएस डांगी ने डीजीपी अरुण देव गौतम को एक चिट्ठी लिखकर इस महिला और उसके सहयोगियों पर ब्लैकमेलिंग, धमकी और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं।
वहीं, राज्य सरकार ने भी इस मामले की जांच शुरू कर दी है। आईपीएस आनंद छाबड़ा और मिलना कुर्रे को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही विभाग अगली कार्रवाई करेगा।
इस पूरे विवाद पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि –
“चाहे कोई भी अधिकारी हो, अगर उस पर आरोप लगे हैं तो जांच जरूर होगी। और यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो कार्रवाई तय है।”
इस तरह यह मामला अब सत्य और साजिश के बीच की जंग बन गया है, जिस पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी हैं।










