
📍स्थान: बीजापुर, छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सामान्य वन विभाग ने टिम्बर माफियाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। जिला मुख्यालय के न्यू पुलिस लाइन के सामने और भट्टीपारा स्थित डेयरी फार्म से वन विभाग ने दो टिप्पर और लगभग पांच से छह घनमीटर अवैध सागौन की लकड़ी बरामद की है। बरामद की गई लकड़ी की कीमत लाखों रुपये आंकी जा रही है।

जानकारी के अनुसार, बीजापुर के आसपास लंबे समय से अवैध लकड़ी तस्करी की शिकायतें मिल रही थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर विभाग ने सोमवार देर रात गुप्त सूचना के बाद छापा मारा। सुबह होते ही कार्रवाई शुरू की गई, जिसके दौरान भारी मात्रा में सागौन की लकड़ी का भंडार पकड़ा गया।

वन विभाग की टीम ने बताया कि जिस स्थान से लकड़ी जब्त की गई है, वह जिला पुलिस लाइन से सटा हुआ और सुरक्षित क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में विभागीय मिलीभगत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
🌲 विभागीय साठगांठ पर उठे सवाल:
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में लकड़ी वनकर्मियों की जानकारी के बिना जमा नहीं की जा सकती। इससे रेंजर, बीट गार्ड और अन्य वन अमले की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल, विभाग ने इस पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है।
🌿 वन मंडलाधिकारी ने दी जानकारी:
बीजापुर सामान्य वन विभाग के वन मंडलाधिकारी एन. रंगनाथन ने बताया कि —
> “देर रात गुप्त सूचना मिली थी, जिसके बाद टीम को मौके पर रवाना किया गया। सुबह से कार्रवाई जारी है। दोनों जगहों से लगभग छह घनमीटर से अधिक सागौन की लकड़ी जब्त की गई है। फिलहाल लकड़ी का माप और कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है, जिसके बाद इसकी वास्तविक कीमत और मालिक की पहचान हो सकेगी।”
इस बीच, विभाग ने जिले के कई फर्नीचर मार्टों में भी तलाशी अभियान शुरू कर दिया है ताकि लकड़ी के स्रोत और तस्करों के नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
🚨 निष्कर्ष:
बीजापुर में हुई यह कार्रवाई अब तक की सबसे बड़ी लकड़ी बरामदगी में से एक मानी जा रही है। वन विभाग की जांच से यह साफ हो पाएगा कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर अवैध लकड़ी भंडारण के पीछे कौन से टिम्बर माफिया और विभागीय अधिकारी शामिल थे।










