
नारायणपुर से लगभग 50 किलोमीटर दूर, घने जंगलों के बीच बसा ग्राम कुतुल, अबूझमाड़ क्षेत्र का हिस्सा है। यह इलाका लंबे समय तक नक्सल प्रभाव में रहा, जहां आजादी के बाद से कभी तिरंगा नहीं फहराया गया था। वर्षों तक यहां केवल काला और लाल झंडा ही लहराता था, जो नक्सलवाद का प्रतीक था।
स्थिति में बदलाव 5 फरवरी 2025 को तब आया, जब शासन द्वारा यहां बेस कैंप की स्थापना की गई। इस बेस कैंप में डिस्ट्रिक्ट रिज़र्व गार्ड (DRG) और BSF के जवान तैनात किए गए। इससे पहले गांव में नक्सली स्मारक मौजूद था, जिसे DRG ने ध्वस्त कर दिया था।
आज गांव में आश्रम और छात्रावास भी खुल चुके हैं, जिससे शिक्षा और विकास की नई राह बनी है। नक्सलियों के खात्मे और सुरक्षा बलों की मौजूदगी से यहां के लोगों के जीवन में नई रफ़्तार आई है। अबूझमाड़ के इस दूरस्थ इलाके में तिरंगा फहरने से गांववासियों के चेहरों पर गर्व और खुशी साफ झलक रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल झंडा फहराने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि वर्षों की भय और अलगाव की दीवार को तोड़ने का प्रतीक है। सरकार की पहल और सुरक्षा बलों के प्रयासों ने अबूझमाड़ के विकास और शांति की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम रखा है।
