शराब घोटाले में भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, हाईकोर्ट जाने की सलाह

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से शराब घोटाला मामले में राहत नहीं मिल सकी। उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई और मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम (PMLA) 2002 की धारा 44, 50 और 63 को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की बेंच ने याचिका पर विचार करने से इंकार कर दिया और उन्हें हाईकोर्ट जाने की सलाह दी। कोर्ट ने कहा कि इन प्रावधानों में कोई कानूनी खामी नहीं है, अगर इनका दुरुपयोग हो रहा है तो पीड़ित व्यक्ति हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है।

भूपेश बघेल का आरोप:

पूर्व मुख्यमंत्री ने ईडी पर आरोप लगाया कि वह पुराने मामलों को दोबारा खोलकर कार्रवाई कर रही है और कुछ ऐसे लोगों के बयानों पर गिरफ्तारी कर रही है जिन पर पहले से ही नॉन-बेलेबल वारंट (NBW) जारी है, लेकिन वे आज भी खुलेआम घूम रहे हैं। बघेल ने खासतौर पर PMLA की धारा 44 को लेकर आपत्ति जताई, जिसके तहत पहले से चार्जशीट दाखिल मामलों में बिना कोर्ट अनुमति के दोबारा जांच की जा सकती है। उनका कहना है कि यह न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। धारा 50 के तहत आरोपी से खुद के खिलाफ गवाही लेने की प्रक्रिया पर भी उन्होंने सवाल उठाए।

4 अगस्त की सुनवाई:

सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर करीब आधे घंटे बहस हुई, जिसमें बघेल ने चैतन्य बघेल के मामले का हवाला दिया। चैतन्य को पुराने मामले में दोबारा पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया था। अंत में सुप्रीम कोर्ट ने भूपेश बघेल को हाईकोर्ट में जाने की स्वतंत्रता दी।

क्या है पूरा मामला:

ईडी के मुताबिक, 2019 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ में 2,100 करोड़ रुपये का कथित शराब घोटाला हुआ, जिसे चैतन्य बघेल ने मैनेज किया। आरोप है कि उन्होंने 16.7 करोड़ रुपये अपनी रियल एस्टेट परियोजना में लगाए। इस मामले में ईडी ने पूर्व मंत्री कवासी लखमा, कांग्रेस नेता अनवर ढेबर, पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, आईटीएस अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया।

चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी:

ईडी ने चैतन्य बघेल को 18 जुलाई को गिरफ्तार किया। 22 जुलाई को कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक से इनकार कर उन्हें भी हाईकोर्ट जाने को कहा। अब मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में है, जहां जल्द सुनवाई होने की संभावना है।

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