दंतेवाड़ा में पैंगोलिन तस्करी पर वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, 6 आरोपी पकड़े; 14 किलो खाल और शल्क बरामद

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दंतेवाड़ा। CG DASTAK 

दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए छह आरोपियों को पकड़ा है। विभाग के अनुसार, आरोपियों के कब्जे से करीब 14 किलोग्राम पैंगोलिन की खाल और शल्क बरामद किए गए हैं। आशंका जताई जा रही है कि बरामद सामग्री कई पैंगोलिन के शिकार से जुड़ी हो सकती है। मामले की जांच की जा रही है।

वन विभाग को मुखबिर से सूचना मिली थी कि गीदम वन परिक्षेत्र में कुछ लोग अलग-अलग वाहनों से पैंगोलिन की खाल लेकर घूम रहे हैं और उसे बेचने के लिए ग्राहक तलाश रहे हैं। सूचना के आधार पर टीम गठित कर कार्रवाई की गई।

गीदम क्षेत्र में वन विभाग की कार्रवाई

वन विभाग की टीम ने शुरुआती कार्रवाई के दौरान गीदम पुलिस थाना के पास से तीन लोगों को पकड़ा। इसके बाद मिली जानकारी के आधार पर जावंगा के पास भी दबिश दी गई, जहां से तीन अन्य लोगों को हिरासत में लिया गया।

वाहनों की तलाशी के दौरान एक गाड़ी में टायर की स्टेपनी के पास रखी बोरी से पैंगोलिन की खाल और शल्क बरामद किए गए। वन विभाग के मुताबिक, जब्त सामग्री का कुल वजन करीब 14 किलोग्राम है।

छह आरोपियों के नाम सामने आए

वन विभाग की शुरुआती जांच में पकड़े गए लोगों के नाम लक्ष्मण तेलाम, दीपक, मासा मूर्ति, हेमंत वासम, कुहरम भीमा और मसराम मंडावी बताए गए हैं।

विभाग के अनुसार, लक्ष्मण तेलाम दंतेवाड़ा जिले का निवासी है, जबकि अन्य आरोपियों को बीजापुर जिले का निवासी बताया गया है। मामले में सभी की कथित भूमिका और बरामद सामग्री के स्रोत की जांच की जा रही है।

आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई संबंधित वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत की जा सकती है। हालांकि, मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

6 से 7 पैंगोलिन के शिकार की आशंका

वन विभाग का कहना है कि करीब 14 किलोग्राम खाल और शल्क बरामद हुए हैं। विभाग ने आशंका जताई है कि यह सामग्री छह से सात पैंगोलिन के शिकार के बाद जुटाई गई हो सकती है। यह संख्या फिलहाल विभाग की ओर से जताई गई आशंका है, जिसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

वन विभाग की टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर पैंगोलिन का शिकार कहां किया गया और बरामद सामग्री किसे बेची जानी थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पैंगोलिन के शल्कों की मांग के कारण इस वन्यजीव की तस्करी के मामले सामने आते रहे हैं।

क्या होता है पैंगोलिन?

पैंगोलिन एक दुर्लभ स्तनधारी वन्यजीव है, जिसके शरीर पर कठोर शल्क होते हैं। खतरा महसूस होने पर यह अपने शरीर को गोलाकार कर लेता है। यह मुख्य रूप से चींटियां और दीमक खाता है तथा जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इसके शल्क केराटिन नामक पदार्थ से बने होते हैं। केराटिन वही प्रोटीन है, जिससे मनुष्यों के बाल और नाखून बनते हैं। कुछ पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इनके शल्कों के उपयोग के दावे किए जाते हैं, लेकिन इनके जरिए स्वास्थ्य लाभ होने के विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं।

वन्यजीव तस्करी पर सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान

भारत में पैंगोलिन वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत संरक्षित है। इसका अवैध शिकार, कब्जा और व्यापार गंभीर अपराध हो सकता है। अपराध की प्रकृति और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर दोष सिद्ध होने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान है।

इस कार्रवाई में DFO रंगनाथा राधाकृष्णा वाय और SDO शिवेंद्र सिंह के निर्देश पर टीम गठित की गई थी। कार्रवाई में गीदम रेंजर शिव टंडन, बचेली रेंजर डॉ. प्रीतेश पांडेय, डिप्टी रेंजर के. राजू और बीट गार्ड लक्ष्मी प्रसाद चालकी सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे।

वन विभाग अब बरामद सामग्री के स्रोत और कथित तस्करी नेटवर्क से जुड़े पहलुओं की जांच कर रहा है।

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