डोंगरगढ़ में गैस सिलेंडरों से हेराफेरी का संदेह, प्रशासन की कार्रवाई के दौरान 4 लोग फरार; जांच के घेरे में गैस एजेंसी

0

डोंगरगढ़, राजनांदगांव। CG DASTAK 

डोंगरगढ़, राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में रसोई गैस सिलेंडरों से कथित हेराफेरी का मामला सामने आया है। शहर के बाहर एक सुनसान मैदान में सिलेंडरों से भरी मालवाहक गाड़ी के पास संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने पर एसडीएम और खाद्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची। जांच के बाद वाहन को गैस एजेंसी ले जाया गया और पंचनामा कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद चार लोग फरार हो गए।

इस घटना के बाद गैस वितरण व्यवस्था, सिलेंडरों में गैस की मात्रा और उपभोक्ताओं की पुरानी शिकायतों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, सिलेंडरों का वजन कराकर गैस की कमी की पुष्टि हुई है या नहीं, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

इंडेन की गैस एजेंसी से जुड़ा मामला

मामला डोंगरगढ़ स्थित इंडेन कंपनी की प्रॉमिनेंट फ्यूल सेंटर गैस एजेंसी से जुड़ा बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, आदर्श नगर और भूरवा टोला के बीच एक सुनसान मैदान में सिलेंडरों से लदी मालवाहक गाड़ी के आसपास कुछ लोग मौजूद थे।

स्थानीय लोगों ने उनसे पूछताछ की। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर प्रशासन को सूचना दी गई। इसके बाद अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच की और मालवाहक गाड़ी को एजेंसी ले जाकर पंचनामा तैयार कराया।

इस कार्रवाई के दौरान चार लोगों के फरार होने की जानकारी सामने आई है। उनकी पहचान, तलाश और कथित हेराफेरी में उनकी भूमिका को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

तीन महीने पहले रखे गए थे कर्मचारी, सत्यापन पर सवाल

मिली जानकारी के अनुसार, संदेह के दायरे में आए लोग गैस एजेंसी में सिलेंडरों के वितरण का काम करते थे। बताया जा रहा है कि उन्हें करीब तीन महीने पहले काम पर रखा गया था और वे राजस्थान के रहने वाले हैं।

यह दावा भी सामने आया है कि एजेंसी के जिम्मेदार लोगों को इन कर्मचारियों के नाम तक की जानकारी नहीं थी। इन बातों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। यदि जांच में ऐसा पाया जाता है, तो कर्मचारियों की नियुक्ति, पहचान सत्यापन और वितरण व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े होंगे।

कम गैस मिलने की पुरानी शिकायतों की भी जांच जरूरी

स्थानीय स्तर पर उपभोक्ताओं की ओर से सिलेंडरों में कम गैस मिलने की शिकायतें किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि पहले मिली शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई थी।

प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि वितरण के लिए निकले सिलेंडरों का रिकॉर्ड कैसे रखा जाता है, गैस की मात्रा की जांच किस तरह होती है और शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया क्या रही है।

यदि पहले भी शिकायतें मिली थीं, तो उनसे जुड़े रिकॉर्ड और कार्रवाई के दस्तावेजों की जांच मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाने में मदद कर सकती है।

सिलेंडरों का वजन और स्टॉक रिकॉर्ड जांचना जरूरी

इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि क्या सिलेंडरों का वजन कराया गया, क्या गैस की मात्रा में कमी पाई गई और क्या कथित हेराफेरी में इस्तेमाल होने वाली कोई सामग्री बरामद हुई।

जांच को स्पष्ट बनाने के लिए सिलेंडरों के वजन, एजेंसी के स्टॉक रजिस्टर, वितरण रिकॉर्ड, वाहन से संबंधित दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का मिलान जरूरी है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि गैस की हेराफेरी हुई थी या नहीं और इसमें किन लोगों की भूमिका थी।

LPG की आपूर्ति और वितरण से जुड़े नियमों के तहत निर्धारित अनुमति के बिना गैस का अवैध स्थानांतरण प्रतिबंधित है। यदि जांच में संबंधित नियमों के उल्लंघन के प्रमाण मिलते हैं, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

गैस एजेंसी संचालक ने कही FIR दर्ज कराने की बात

गैस एजेंसी के मालिक विवेक वासनिक ने संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की बात कही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में एफआईआर दर्ज होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

अब यह स्पष्ट होना बाकी है कि मामला दर्ज हुआ है या नहीं, फरार लोगों की पहचान और तलाश के लिए क्या कदम उठाए गए हैं तथा जांच में अब तक कौन-कौन से तथ्य सामने आए हैं।

खाद्य विभाग के आधिकारिक पक्ष का इंतजार

मामले में एसडीएम और फूड इंस्पेक्टर मौके पर पहुंचे थे तथा पंचनामा कार्रवाई की गई। वहीं, फूड इंस्पेक्टर से कैमरे पर आधिकारिक पक्ष जानने की कोशिश किए जाने पर उन्होंने बयान देने से इनकार करते हुए उच्च अधिकारियों से संपर्क करने की बात कही।

जांच के दौरान सभी तथ्य तत्काल सार्वजनिक नहीं किए जा सकते, लेकिन उपभोक्ताओं के हित में प्रशासन को जांच की स्थिति और आगे की कार्रवाई के बारे में उचित जानकारी देनी चाहिए।

एसडीएम और खाद्य विभाग की ओर से यह स्पष्ट किया जाना महत्वपूर्ण है कि कितने सिलेंडरों की जांच हुई, गैस की कमी की पुष्टि हुई या नहीं, कौन-से दस्तावेज जब्त किए गए और मामले में कानूनी कार्रवाई किस स्थिति में है।

उपभोक्ताओं को जवाब मिलने का इंतजार

डोंगरगढ़ में सामने आए इस मामले ने गैस वितरण व्यवस्था की निगरानी और उपभोक्ताओं की शिकायतों के निपटारे पर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल, कथित हेराफेरी की पुष्टि जांच के निष्कर्षों और साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।

अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन की जांच में क्या सामने आता है, फरार बताए गए चार लोगों के संबंध में क्या कार्रवाई होती है और गैस एजेंसी की वितरण व्यवस्था को लेकर उठे सवालों का जवाब कब मिलता है।

डोंगरगढ़ से जुड़ी खबरों और जांच की आगे की अपडेट के लिए पढ़ते रहें CG Dastak।

🌐 https://www.cgdastak.com

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here