दुर्ग में साइबर ठगी के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले 13 आरोपी गिरफ्तार, बैंक एजेंट भी शामिल

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दुर्ग। CG DASTAK

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साइबर ठगी की रकम अपने बैंक खातों में मंगाने और दूसरे खातों में ट्रांसफर करने के लिए खाते उपलब्ध कराने के आरोप में पुलिस ने 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में इंडियन बैंक का एक एजेंट भी शामिल है। जांच के दौरान इन खातों के माध्यम से लाखों रुपये के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है।

छह थानों की टीम ने चलाया विशेष अभियान

पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर 21 अक्टूबर को विशेष अभियान चलाया गया। इस कार्रवाई में नेवई, पुरानी भिलाई, भिलाई भट्ठी, भिलाई नगर, सुपेला और खुर्सीपार थानों की टीमों ने एसीसीयू के साथ मिलकर कार्रवाई की।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक, सिम कार्ड, मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं। पुलिस का कहना है कि बैंक खातों में हुए लेन-देन और तकनीकी साक्ष्यों की जांच के बाद आरोपियों की भूमिका सामने आई है।

कमीशन के लालच में उपलब्ध कराते थे खाते

पुलिस के मुताबिक, आरोपी कथित तौर पर 5 हजार से 15 हजार रुपये तक के कमीशन के लालच में अपने या अन्य लोगों के बैंक खाते साइबर ठगी करने वालों को उपलब्ध कराते थे। इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम जमा करने और उसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। इससे ठगी की रकम के वास्तविक स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो जाता था।

पुलिस अब संबंधित खातों से हुए लेन-देन और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

किस थाने से कितने आरोपी गिरफ्तार?

पुलिस की ओर से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों का थाना-वार विवरण इस प्रकार है:

नेवई थाना — 4 आरोपी: प्रेक्षित कामड़े (28), सत्यवान नायक (21), रैया माधव राव (48) और रमेश कुमार कुर्रे (55)।

पुरानी भिलाई थाना — 3 आरोपी: विनोद कश्यप (36), भावेश उइके (27) और ऋषभ यादव (22)।

भिलाई भट्ठी थाना — 1 आरोपी: कुलेश्वर ठाकुर (36)।

भिलाई नगर थाना — 2 आरोपी: गगनदीप सिंह (25) और अनिश अग्रवाल (22)।

सुपेला थाना — 2 आरोपी: आनंद शंकर (42) और नितिन वालेचा (31)।

खुर्सीपार थाना — 1 आरोपी: हिमांशु गोडाने उर्फ कालू (31), जिसे पुलिस ने इंडियन बैंक का एजेंट बताया है।

पुलिस की लोगों से अपील

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड या बैंकिंग दस्तावेज किसी दूसरे व्यक्ति को उपलब्ध न कराएं। साइबर ठगी में ऐसे खातों का इस्तेमाल होने पर खाताधारक भी जांच और कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।

पुलिस मामले में आगे की जांच कर रही है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाया जा रहा है।

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