
बिलासपुर में दुर्गोत्सव की धूम: कहीं 18 लाख का स्टेशनरी थीम पंडाल, तो कहीं बाढ़ राहत और गांव की संस्कृति की झांकी
बिलासपुर। CG DASTAK
न्यायधानी बिलासपुर में दुर्गोत्सव के दौरान शहर के अलग-अलग इलाकों में सजे आकर्षक पंडाल और अनूठी झांकियां लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। कहीं स्टेशनरी सामग्री से मां दुर्गा की प्रतिमा और पंडाल सजाया गया है, तो कहीं बाढ़ राहत-बचाव, धार्मिक प्रसंगों और छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति को झांकियों के माध्यम से दर्शाया गया है। देर रात तक श्रद्धालु परिवार के साथ पंडालों में पहुंचकर मां दुर्गा के दर्शन कर रहे हैं।

मसानगंज में 18 लाख रुपये की स्टेशनरी थीम
मसानगंज नवयुवक दुर्गोत्सव समिति ने इस बार किताब, कॉपी, पेन, पेंसिल, शार्पनर, रबर, कैंची और फेवीकोल जैसी स्टेशनरी सामग्री से मां दुर्गा की प्रतिमा और पंडाल सजाया है। रिपोर्ट के अनुसार, समिति के 58वें दुर्गोत्सव में इस आयोजन पर 18 लाख रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं।

बताया गया है कि एसएसपी रजनेश सिंह की पहल पर स्टेशनरी सामग्री को संस्थाओं के माध्यम से आदिवासी क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों के बच्चों में वितरित करने की योजना भी है। सोमवार को 300 कन्याओं को भोजन कराने का कार्यक्रम रखा गया है।
शिव टॉकीज चौक-टिकरापारा में बाढ़ राहत-बचाव की झांकी
सिंहवाहिनी दुर्गा उत्सव समिति ने इस बार बाढ़ और राहत-बचाव कार्यों पर आधारित झांकी तैयार की है। इसमें बाढ़ में फंसे लोगों को नाव और हेलीकॉप्टर के माध्यम से बचाने का दृश्य दिखाया गया है। झांकी में भगवान गणेश, मां दुर्गा सहित अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, मां दुर्गा की प्रतिमा राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव से बनवाई गई है, जबकि पंडाल कोलकाता के कारीगरों ने तैयार किया है।
तिलक नगर में बांके बिहारी मंदिर की झलक
तिलक नगर दुर्गा उत्सव समिति ने वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर की तर्ज पर पंडाल तैयार कराया है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण के जीवन की विभिन्न लीलाओं को झांकियों के जरिए प्रस्तुत किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कोलकाता के कारीगरों ने चार महीने में पंडाल तैयार किया। यहां 27 साल से दुर्गा पूजा का आयोजन हो रहा है। इस बार इस्कॉन बिलासपुर की भजन संध्या भी रखी गई है।
साइंस कॉलेज मैदान में ‘त्रिनेत्र’ थीम पर मां दुर्गा का दरबार
शिवदुति दुर्गा उत्सव के चौथे वर्ष साइंस कॉलेज मैदान में मां दुर्गा की स्थापना की गई है। इस बार मां भगवती का दरबार ‘त्रिनेत्र’ थीम पर सजाया गया है। यहां श्रीमद् देवी भागवत कथा का आयोजन भी हो रहा है। नवरात्रि के नौ दिनों तक पंडित सुयश शर्मा कथा सुनाएंगे।
त्रिशूलिनी फाउंडेशन की ‘सेवा की थाली’ मुहिम के तहत प्रतिदिन भोजन की व्यवस्था भी की जा रही है।
पुराना सरकंडा में ‘महतारी के आंगन’ थीम
पुराना सरकंडा के दैहानपारा में मां महामाया दुर्गोत्सव समिति ने ‘महतारी के आंगन’ थीम पर पंडाल बनाया है। समिति के अध्यक्ष समीर सिंह ठाकुर के मुताबिक, यह आयोजन 19वें वर्ष में है। पंडाल में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक गांव की झलक प्रस्तुत की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इसे तैयार करने में लगभग 14 से 15 लाख रुपये खर्च हुए हैं और करीब 60 फीट लंबी गली में झांकियां सजाई जाएंगी।
मिलन मंदिर में 1956 से चली आ रही अनूठी परंपरा
मिलन मंदिर की दुर्गा पूजा अपनी अलग परंपरा के लिए जानी जाती है। समिति सदस्य डॉ. सुबीर सेन के अनुसार, वर्ष 1956 में जिस लकड़ी पर पहली बार मां की प्रतिमा बनाई गई थी, उसी लकड़ी पर आज भी प्रतिमा तैयार की जाती है। इसे ‘कोठमा’ कहा जाता है। विसर्जन के बाद लकड़ी को सुरक्षित रख लिया जाता है और अगले वर्ष पूजा के लिए फिर इस्तेमाल किया जाता है।
देर रात तक पंडालों में उमड़ रहे श्रद्धालु
बिलासपुर में दुर्गोत्सव के पंडालों और झांकियों को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है। परिवारों के साथ श्रद्धालु देर रात तक दर्शन करने पहुंच रहे हैं। धार्मिक प्रसंगों, सामाजिक संदेशों और स्थानीय संस्कृति को समेटे ये पंडाल शहर के दुर्गोत्सव को खास बना रहे हैं।
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