
महासमुंद, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में खैर लकड़ी के कथित अवैध परिवहन, तस्करी और फर्जी एनओसी-बिलिंग से जुड़े मामले में पुलिस की जांच कई राज्यों तक पहुंच गई है। उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कार्रवाई के दौरान अब तक करीब 70 टन खैर लकड़ी बरामद किए जाने और लगभग 1 करोड़ 70 लाख रुपये नकद जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में हिमाचल प्रदेश से एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार कर महासमुंद लाए जाने का भी उल्लेख है।

पुलिस के अनुसार, जांच का दायरा कथित लकड़ी तस्करी के साथ-साथ फर्जी दस्तावेज तैयार करने, ट्रांजिट पास के कथित दुरुपयोग और वित्तीय लेन-देन तक फैला हुआ है। मामले में कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
9 जुलाई 2026 को दर्ज हुआ था मामला
मीडिया रिपोर्ट में दी गई जानकारी के अनुसार, खैर लकड़ी के कथित अवैध परिवहन और एनटीपीएस एनओसी में कथित कूटरचना से जुड़े मामले में 9 जुलाई 2026 को पिथौरा थाने में अपराध क्रमांक 172/2026 दर्ज किया गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, वन परिक्षेत्र अधिकारी पिथौरा के आवेदन के आधार पर मामला दर्ज किया गया। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS), आर्म्स एक्ट और भारतीय वन अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई का उल्लेख है। हालांकि, लागू धाराओं की सटीक पुष्टि प्राथमिकी की प्रमाणित प्रति से की जानी चाहिए।
प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने कथित अवैध लकड़ी परिवहन, दस्तावेजों की वैधता और संबंधित कारोबारी गतिविधियों की पड़ताल शुरू की।
सरसींवा में दबिश, 81 लाख रुपये नकद जब्त करने की जानकारी
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, 7 सितंबर 2026 को पुलिस ने आरोपी मनीष अग्रवाल से जुड़े ग्राम मुड़पार, थाना सरसींवा स्थित एक मकान में दबिश दी थी। इस कार्रवाई के दौरान 81 लाख रुपये नकद जब्त किए जाने की जानकारी दी गई है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि मामले की जांच में 23,350 किलोग्राम खैर लकड़ी के कथित अवैध परिवहन से जुड़ी धोखाधड़ी की पड़ताल की जा रही है।
पुलिस के कथित निष्कर्षों के अनुसार, जब्त रकम और लकड़ी के कारोबार के बीच संबंध की जांच की जा रही है। नकदी का स्रोत, वित्तीय लेन-देन और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जा सकेगा।
हिमाचल प्रदेश में कार्रवाई, 1.70 करोड़ रुपये की नकदी जब्ती का दावा
मामले की आगे की जांच के दौरान महासमुंद पुलिस की विशेष टीम ने हिमाचल प्रदेश में भी कार्रवाई की। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस कार्रवाई के दौरान मनीष अग्रवाल और संजय छाबड़िया से जुड़े कथित अवैध कारोबार की जांच की गई और कुल 1 करोड़ 70 लाख रुपये नकद जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई।
पुलिस के अनुसार, कथित रूप से खैर लकड़ी के कारोबार से अर्जित रकम, वित्तीय लेन-देन और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। इन वित्तीय गतिविधियों का वास्तविक स्वरूप संबंधित बैंक रिकॉर्ड, जब्ती दस्तावेजों और जांच के निष्कर्षों से स्पष्ट होगा।
हरियाणा के गोदाम से करीब 15 टन खैर लकड़ी बरामद
रिपोर्ट के अनुसार, 10 अक्टूबर 2026 को महासमुंद पुलिस ने हरियाणा के गुरुग्राम जिले की पटौदी तहसील के ग्राम बहोड़ा कलां में स्थित ‘श्री बालाजी ट्रेडिंग’ नामक फर्म के गोदाम में तलाशी ली थी।
इस कार्रवाई के दौरान करीब 15 टन खैर लकड़ी बरामद कर जब्त किए जाने की जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में फर्म को मनीष अग्रवाल से संबंधित बताया गया है।
पुलिस की जांच का एक प्रमुख पहलू यह है कि विभिन्न स्थानों से बरामद लकड़ी का आपस में क्या संबंध है, उसके परिवहन के लिए कौन से दस्तावेज इस्तेमाल किए गए और संबंधित कारोबार में किन लोगों की भूमिका रही।
उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, ओडिशा, मध्य प्रदेश, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों में कार्रवाई की गई है। इन कार्रवाइयों में कुल करीब 70 टन खैर लकड़ी बरामद किए जाने का दावा किया गया है।
हिमाचल प्रदेश से 67 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार
मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि 12 अक्टूबर 2026 को हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के कालाअंब क्षेत्र से 67 वर्षीय सतपाल सिंह को गिरफ्तार किया गया। उन्हें हिमाचल प्रदेश से महासमुंद लाए जाने की जानकारी दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, सतपाल सिंह का संबंध ‘शिव ट्रेडर्स’ नामक फर्म से बताया गया है। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने कथित आपराधिक साजिश में भूमिका निभाई और वास्तविक खैर लकड़ी की आपूर्ति के बिना विभिन्न फर्मों से बड़े पैमाने पर बिल हासिल किए गए।
पुलिस के मुताबिक, कथित बिलिंग को वैध दिखाने के लिए वन विभाग के फर्जी ट्रांजिट पास तैयार किए गए और एचएसएन कोड के दुरुपयोग की भी जांच की जा रही है।
इन आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और जांच के निष्कर्षों से होना बाकी है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को न्यायालय में सिद्ध होना आवश्यक है।
फर्जी एनओसी और बिलिंग के आरोपों की जांच
इस मामले में पुलिस की जांच केवल लकड़ी की बरामदगी तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, कथित फर्जी एनओसी, बिलिंग और ट्रांजिट पास के माध्यम से लकड़ी के कारोबार को वैध दिखाने की आशंका की जांच की जा रही है।
पुलिस ने कथित वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों के माध्यम से रकम के हस्तांतरण और कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल किए जाने की जानकारी दी है।
जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया, वे किसने तैयार किए, लकड़ी की वास्तविक आपूर्ति कहां से हुई और कथित आर्थिक लाभ किन व्यक्तियों तक पहुंचा।
पहले भी गिरफ्तार हो चुके हैं कई आरोपी
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सतपाल सिंह की गिरफ्तारी से पहले मनीष अग्रवाल, पारितोष मिश्रा और अखिलेश सिंघल को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। रिपोर्ट में इन व्यक्तियों को कथित कारोबार और बिलिंग से जुड़े मामले में आरोपी बताया गया है।
पुलिस की जांच के अनुसार, इस नेटवर्क में अन्य व्यक्तियों, कारोबारी संस्थाओं और वित्तीय लेन-देन की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
मामले में अलग-अलग राज्यों से बरामद लकड़ी और नकदी के बीच संबंध स्थापित करना, दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच करना तथा प्रत्येक आरोपी की भूमिका निर्धारित करना आगे की जांच के महत्वपूर्ण बिंदु हैं।
आगे क्या?
महासमुंद पुलिस की जांच के दौरान बरामद लकड़ी, नकदी, बैंक लेन-देन और कथित फर्जी दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण होगी। इस मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस की विवेचना और न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।
फिलहाल उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों में करीब 70 टन खैर लकड़ी बरामद किए जाने, नकदी जब्ती और हिमाचल प्रदेश से आरोपी की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई है। मामले में सभी आरोपों और आंकड़ों की आधिकारिक दस्तावेजों से पुष्टि किया जाना आवश्यक है।
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