
रायगढ़। CG DASTAK
रायगढ़ पुलिस की कार्रवाई; आरोपी पर तत्कालीन पटवारी समेत अन्य लोगों के साथ मिलकर जमीन की रजिस्ट्री कराने का आरोप, बदले में ₹10 हजार मिलने की बात सामने आई
रायगढ़। जिले में पंडो जनजाति की जमीन को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए गैर-आदिवासी के नाम दर्ज कराने और रजिस्ट्री कराने के मामले में पुलिस ने फरार आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी सुखन राठिया (50) को कोरबा से गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि मामले में आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए तमिलनाडु चला गया था और बाद में कोरबा में छिपकर रह रहा था।

यह मामला कापू थाना क्षेत्र से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार पंडो जनजाति की जमीन को फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से गैर-आदिवासी के नाम कराने, सरकारी जमीन से जुड़े दस्तावेज तैयार करने और रजिस्ट्री कराने की जांच चल रही है।
रजिस्ट्री कराने के बदले मिले थे ₹10 हजार
पुलिस के मुताबिक पूछताछ में आरोपी ने बताया कि तत्कालीन पटवारी राकेश कुमार साय और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर जमीन की रजिस्ट्री कराने में उसने भूमिका निभाई थी। इसके बदले उसे ₹10 हजार दिए गए थे।
जांच के दौरान पुलिस ने बताया कि आरोपी ने कथित तौर पर तत्कालीन पटवारी राकेश साय और अन्य लोगों के साथ मिलकर जमीन की रजिस्ट्री के लिए दस्तावेजी प्रक्रिया में भूमिका निभाई। मामले में तत्कालीन पटवारी राकेश कुमार साय और रजिस्ट्री के गवाह अगस्तस खलखो को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
पुलिस अब मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
तमिलनाडु से भागकर कोरबा में छिपा था
पुलिस के अनुसार मामले में अपराध दर्ज होने के बाद आरोपी फरार हो गया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह तमिलनाडु चला गया। इसके बाद वह कोरबा में रहने लगा।
पुलिस को आरोपी के कोरबा में होने की सूचना मिली, जिसके बाद कापू पुलिस ने उसे हिरासत में लिया और रायगढ़ लाया। पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
जमीन की रजिस्ट्री में दस्तावेजों को लेकर उठे सवाल
पुलिस के अनुसार जांच में ग्राम पंचायत रायमेर की सरकारी जमीन से जुड़े दस्तावेज और पट्टे तैयार करने की बात सामने आई है। इसी मामले में जमीन की रजिस्ट्री कराने की प्रक्रिया की जांच की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक डुमरनारा की खसरा नंबर 409 वाली जमीन पहले पंडो जनजाति के लोगों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज थी। वर्ष 2023-24 के रिकॉर्ड की जांच के दौरान कथित तौर पर बिना सक्षम अधिकारी के आदेश के जमीन का नाम बदलकर सुखन के पिता बजरंग रावत के नाम दर्ज होने की जानकारी सामने आई।
इसके बाद 21 फरवरी 2024 को पंजीकृत विक्रय पत्र के माध्यम से जमीन को रायपुर निवासी संतोष देवी गुप्ता के नाम किए जाने की बात जांच में सामने आई।
फर्जी पहचान और आधार कार्ड के इस्तेमाल का आरोप
जांच में पुलिस के अनुसार यह भी सामने आया कि जमीन के विक्रेता के रूप में पेश किए गए व्यक्ति की वास्तविक पहचान अलग थी। पुलिस का आरोप है कि दस्तावेजों में फर्जी पहचान और आधार कार्ड का इस्तेमाल किया गया।
जांच के दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि तत्कालीन हल्का पटवारी राकेश कुमार साय की ओर से जमीन की बिक्री के लिए कथित रूप से चाही गई प्रक्रिया में भूमिका थी। इसके आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
पहले भी हो चुकी है गिरफ्तारियां
पुलिस के अनुसार इस मामले में तत्कालीन पटवारी राकेश कुमार साय और रजिस्ट्री के गवाह अगस्तस खलखो को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। अब फरार आरोपी सुखन राठिया की गिरफ्तारी के बाद पुलिस मामले में दस्तावेजों, राजस्व रिकॉर्ड और रजिस्ट्री प्रक्रिया से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।
मामले में लगे आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होगी। पुलिस की जांच के आधार पर ही अन्य लोगों की भूमिका और जिम्मेदारी स्पष्ट होगी।









