
हरिद्वार। CG DASTAK
जेल से रिहाई के बाद ‘सदा राम’ नाम से रह रहा था कोली, चाय की दुकान चलाने लगा था; मौत की परिस्थितियों की जांच जारी
हरिद्वार। निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत हो गई। शुक्रवार को भूपतवाला क्षेत्र में उसकी चाय की दुकान के अंदर उसका शव मिला। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि मौत की परिस्थितियों की जांच जारी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। घटनास्थल से तत्काल कोई सुसाइड नोट नहीं मिला।

कोली करीब 10 महीने पहले जेल से बाहर आया था। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने निठारी कांड से जुड़े उसके अंतिम लंबित मामले में उसे बरी कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, यह मामला रिम्पा हलदर की हत्या से संबंधित था। इसी के साथ उसके खिलाफ निठारी से जुड़े 13 मामलों की लंबी कानूनी प्रक्रिया समाप्त हुई।
जेल से बाहर आने के बाद बदली पहचान
रिपोर्टों के मुताबिक, जेल से निकलने के बाद कोली हरिद्वार पहुंचा और ‘सदा राम’ नाम से रहने लगा। पहले उसने सुरक्षा गार्ड के तौर पर काम किया और बाद में भूपतवाला इलाके में चाय की दुकान शुरू की। स्थानीय लोगों को उसकी असली पहचान बाद में पता चली।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, वह हरिद्वार में करीब एक महीने से रह रहा था और मौत से कुछ दिन पहले उसने चाय की दुकान शुरू की थी।
निठारी कांड की कहानी क्या थी?
नोएडा के सेक्टर-31 स्थित निठारी में 2005-06 के दौरान कई बच्चों और महिलाओं के लापता होने के मामले सामने आए थे। बाद में एक मकान के पीछे नाले और आसपास के क्षेत्र से मानव अवशेष मिलने के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुआ।

सुरेंद्र कोली उस मकान में घरेलू सहायक के तौर पर काम करता था। मकान मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर भी मामले में आरोपी बनाया गया था। पुलिस और CBI की जांच के बाद दोनों के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हुए। कुल 19 FIR दर्ज किए गए थे।
कोली को अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराते हुए कई बार मौत की सजा सुनाई गई थी। लेकिन बाद की न्यायिक प्रक्रिया में उसके खिलाफ कई मामलों की दोषसिद्धियां खत्म होती गईं।
कोर्ट में कबूलनामे और जांच पर उठे सवाल
नए सामने आए विवरण में सुरेंद्र कोली के कथित कबूलनामे और जांच प्रक्रिया पर गंभीर कानूनी सवालों का उल्लेख है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2023 में निठारी से जुड़े 12 मामलों में कोली को बरी किया था। इन मामलों में अभियोजन की कहानी मुख्य रूप से कोली के कथित confession और recovery evidence पर आधारित थी।

सुप्रीम कोर्ट के 2025 के आदेश में भी यह दर्ज है कि 12 मामलों में हाईकोर्ट ने समान confession और recovery के आधार पर कोली को बरी किया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उन मामलों में राज्य की अपीलें खारिज कर हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
जांच को लेकर अदालत के सामने मुख्य सवाल
1. जांच और सबूत जुटाने की प्रक्रिया
बचाव पक्ष की ओर से जांच की प्रक्रिया और सबूत जुटाने के तरीके पर सवाल उठाए गए। अदालतों में यह मुद्दा उठा कि क्या अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय थे।
2. कबूलनामे की विश्वसनीयता
कोली के कथित कबूलनामे को लेकर भी सवाल उठे। अदालतों ने इस बात पर विचार किया कि ऐसे बयान को अन्य स्वतंत्र और विश्वसनीय साक्ष्यों से किस तरह पुष्ट किया गया।
3. कथित ‘ऑर्गन ट्रेड’ एंगल
दस्तावेजों में पंढेर से जुड़े एक कथित ऑर्गन ट्रेड एंगल की जांच नहीं होने का मुद्दा भी उठाया गया था। हालांकि, इस पहलू को लेकर अलग-अलग दावे और आरोप सामने आते रहे हैं। इसलिए इसे स्थापित तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि जांच से जुड़े एक उठाए गए सवाल के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि जिन साक्ष्यों को अदालतें पहले ही खारिज कर चुकी हैं, उन्हीं के आधार पर कोली को दोषी ठहराना संवैधानिक अधिकारों से जुड़े सवाल पैदा करता है।
तीन बार मिली मौत की सजा, फिर कैसे बचा?
कोली को निठारी से जुड़े अलग-अलग मामलों में कई बार मौत की सजा सुनाई गई थी।
रिम्पा हलदर हत्याकांड में 2009 में ट्रायल कोर्ट ने उसे दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने उसकी सजा बरकरार रखी थी। बाद में 2015 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दया याचिका के निपटारे में देरी को आधार बनाकर मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया।
इसके बाद निठारी से जुड़े 12 मामलों में 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसे बरी कर दिया। 30 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों में राज्य की अपीलें खारिज कर हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
इसके बाद नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने रिम्पा हलदर मामले में भी कोली को बरी कर दिया और वह जेल से बाहर आ गया।
हरिद्वार में मौत पर अब क्या होगा?
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। प्रारंभिक जांच में पुलिस आत्महत्या की आशंका जता रही है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम और जांच के बाद ही सामने आएगा।
निठारी कांड से जुड़े पीड़ित परिवारों की ओर से भी कोली की मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाए गए हैं। एक पीड़ित के पिता ने उसकी मौत को लेकर गहरी जांच की मांग की है। यह उनका आरोप है; पुलिस जांच और पोस्टमार्टम के निष्कर्ष अलग विषय हैं।
इस तरह सुरेंद्र कोली की कहानी में एक बड़ा कानूनी मोड़ यह रहा कि जिस व्यक्ति को कभी कई मामलों में मौत की सजा मिली थी, वही बाद में अदालतों में अभियोजन के साक्ष्यों पर सवाल उठने के बाद सभी 13 मामलों में बरी हुआ और जेल से बाहर आने के करीब 10 महीने बाद हरिद्वार में मृत मिला।









