
रायपुर। CG DASTAK
मोतीबाग और महोबा बाजार में 24-24 जर्जर भवन, खमतराई से फाफाडीह तक कई इलाके सूची में; बारिश और भीड़भाड़ के बीच हादसे का डर
रायपुर। राजधानी रायपुर में पुराने और जर्जर भवन अब सिर्फ पुरानी इमारतों की पहचान नहीं रह गए हैं, बल्कि लोगों की सुरक्षा के लिए संभावित खतरा बनते जा रहे हैं। हाल ही में सदर बाजार में करीब 100 साल पुराने जर्जर भवन का एक हिस्सा सड़क पर गिरने के बाद नगर निगम की कार्रवाई ने शहर में मौजूद ऐसी इमारतों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। गनीमत रही कि घटना के समय मलबे की चपेट में कोई व्यक्ति नहीं आया। सूचना मिलने के बाद नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और भवन के खतरनाक हिस्से को हटाने की कार्रवाई की।
इस घटना के बाद शहर में चिन्हित 100 से ज्यादा जर्जर भवनों को लेकर सवाल फिर उठने लगे हैं। नगर निगम के जोनवार आंकड़ों के मुताबिक इन भवनों में कई ऐसी जगहों पर स्थित हैं, जहां दिनभर बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे में इन इमारतों की स्थिति को लेकर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा हादसा हो सकता है।
भाठागांव में सबसे ज्यादा 36 जर्जर भवन
नगर निगम के जोनवार आंकड़ों में जोन-6 भाठागांव क्षेत्र में सबसे ज्यादा 36 जर्जर भवन चिन्हित किए गए हैं। इसके बाद जोन-4 मोतीबाग और जोन-8 महोबा बाजार में 24-24 भवन जर्जर स्थिति में चिन्हित हैं।
वहीं जोन-7 समता कॉलोनी में 14, जोन-5 ईदगाहभाठा में 12, जोन-1 खमतराई में 10, जोन-3 शंकरनगर में 9 और जोन-2 फाफाडीह में 8 जर्जर भवन चिन्हित किए गए हैं।
सदर बाजार की घटना ने बढ़ाई चिंता
सदर बाजार में जर्जर भवन का हिस्सा सड़क पर गिरने की घटना ने इस समस्या की गंभीरता सामने ला दी। रिपोर्ट के मुताबिक भवन करीब 100 साल पुराना था। घटना के समय कोई व्यक्ति इसकी चपेट में नहीं आया, जिसके चलते बड़ा हादसा टल गया। सूचना मिलने के बाद नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर खतरनाक हिस्से को हटाया।
अब सवाल यह है कि शहर में चिन्हित बाकी जर्जर भवनों को लेकर नगर निगम की अगली कार्रवाई क्या होगी। खासकर वे इमारतें जो मुख्य सड़कों, बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में हैं, वहां खतरा ज्यादा गंभीर माना जा रहा है।
नोटिस के बाद क्या होता है?
नगर निगम जर्जर भवनों को चिन्हित करने के बाद उनके मालिकों को नोटिस जारी करता है। बारिश से पहले ऐसे भवनों पर नोटिस चस्पा किए जाने की कार्रवाई भी की जाती है। गणेश उत्सव के दौरान झांकी और विसर्जन के मार्गों पर मौजूद जर्जर भवनों को लेकर भी निगम की ओर से कार्रवाई की जाती है।
कई मामलों में भवन मालिक को इमारत खाली कराने या स्वयं उसे गिराने के लिए कहा जाता है। यदि मालिक कार्रवाई नहीं करता तो आगे की प्रक्रिया में समय लग सकता है। इस दौरान भवन अपनी जगह पर खड़ा रहता है और उसके आसपास लोगों की आवाजाही जारी रहती है।
भीड़भाड़ वाले बाजारों में ज्यादा खतरा
जर्जर भवनों से खतरा सिर्फ पूरी इमारत गिरने तक सीमित नहीं है। कमजोर दीवार, छज्जा, छत या भवन का कोई अन्य हिस्सा भी अचानक गिर सकता है। पुराने भवनों के नीचे दुकानें संचालित होने और सामने से लोगों के गुजरने के कारण जोखिम और बढ़ जाता है।
खासकर बारिश के दौरान पुरानी दीवारों और छतों में नमी आने से निर्माण की स्थिति और कमजोर होने की आशंका रहती है। ऐसे में राहगीर, दुकानदार और ग्राहक सबसे ज्यादा जोखिम में हो सकते हैं।
निगम के सामने बड़ी चुनौती
सदर बाजार की घटना के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि चिन्हित जर्जर भवनों में से किन इमारतों को तत्काल खाली कराया जाना जरूरी है, किनकी मरम्मत संभव है और किन भवनों को गिराना आवश्यक है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है कि केवल नोटिस जारी करने तक कार्रवाई सीमित न रहे और संभावित हादसे से पहले जोखिम वाले स्थानों को सुरक्षित किया जाए।
शहर में पुराने भवनों की बड़ी संख्या और कई जगहों पर लगातार बढ़ती भीड़ को देखते हुए जर्जर इमारतों की नियमित निगरानी और समयबद्ध कार्रवाई लोगों की सुरक्षा के लिए अहम हो सकती है।










