
सरायपाली। मेला देखने गए युवक की आपसी रंजिश के चलते चाकू मारकर हत्या करने के करीब चार वर्ष पुराने मामले में सरायपाली न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश पंकज आलोक तिकीं की अदालत ने मामले के मुख्य आरोपी गणेश जायसवाल को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी पर 5 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। वहीं मामले में शामिल दो अन्य आरोपियों योगेश जायसवाल और विग्नेश को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया।
2022 में मेला देखने के दौरान हुई थी वारदात
अतिरिक्त लोक अभियोजक जे.के. पटेल के अनुसार घटना 1 जुलाई 2022 की है। अभियोजन के मुताबिक मृतक दुष्यंत चौहान अपने भतीजे लक्ष्मण चौहान और नाती अंकित के साथ मेला देखने गया था। इसी दौरान वहां संजय नगर निवासी गणेश पिता तीरथ राम जायसवाल, योगेश पिता तीरथ राम जायसवाल और सरिया निवासी विग्नेश पिता कन्हैया लाल भी पहुंचे थे।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, दुष्यंत चौहान को देखते ही गणेश जायसवाल ने उस पर धारदार चाकू से हमला कर दिया। हमले में दुष्यंत गंभीर रूप से घायल हो गया और उसकी मौत हो गई। घटना के पीछे मृतक और आरोपी के बीच पहले से चली आ रही आपसी रंजिश को वजह बताया गया था।
पिता की रिपोर्ट पर दर्ज हुआ था मामला
घटना के बाद मृतक दुष्यंत चौहान के पिता धरम सिंह चौहान ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए आरोपियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 272/2022 दर्ज किया। मामले में धारा 302/34 के तहत कार्रवाई की गई थी।
पुलिस ने विवेचना पूरी करने के बाद आरोपियों के खिलाफ प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किया। इसके बाद न्यायालय में मामले की लंबी सुनवाई चली और अभियोजन एवं बचाव पक्ष की ओर से अपनी-अपनी दलीलें प्रस्तुत की गईं।
मुख्य आरोपी को हत्या का दोषी माना
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर गणेश पिता तीरथ राम जायसवाल को हत्या का दोषी माना। न्यायालय ने उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई तथा 5 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।
वहीं, सह-आरोपी योगेश जायसवाल और विग्नेश के खिलाफ आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं मिलने पर न्यायालय ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।









