डोंगरगढ़ का लॉन्ग एशिया ट्रेडिंग ऐप मामला: फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर करोड़ों की कथित निवेश ठगी की जांच तेज

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डोंगरगढ़। CG DASTAK 

निवेशकों ने देशभर में सेमिनार कर लोगों को जोड़ने का लगाया आरोप, EOW जांच और संपत्तियों की पड़ताल की मांग।

खबर:

डोंगरगढ़। छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में सामने आए लॉन्ग एशिया ट्रेडिंग ऐप से जुड़े कथित निवेश धोखाधड़ी मामले ने अब बड़ा रूप ले लिया है। निवेशकों की शिकायतों, दस्तावेजों, वीडियो, फोटो और ऑडियो के आधार पर पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली जांच के दायरे में है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि लोगों को विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) ट्रेडिंग के नाम पर अधिक मुनाफे का लालच देकर देशभर में निवेश कराया गया।

शिकायत के अनुसार, अगस्त 2024 से डोंगरगढ़ निवासी कुलजीत सिंह भाटिया, जोगेंद्र वर्मा और रायपुर निवासी अभय कुंडले ने कोलकाता, पुणे, मुंबई, जयपुर, दिल्ली, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश और अन्य शहरों के होटलों में सेमिनार आयोजित कर लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया। निवेशकों का आरोप है कि 500 अमेरिकी डॉलर से निवेश शुरू कर हर महीने 8 से 10 प्रतिशत रिटर्न और मूलधन सुरक्षित रहने का दावा किया गया।

कंपनियां बदलने पर उठे सवाल

शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, शुरुआत में निवेशकों को नियमित भुगतान मिला, जिससे उनका भरोसा बढ़ा और उन्होंने अपने परिचितों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा। बाद में कथित तौर पर निवेशकों के खाते XTB International Limited से FCXX International Limited और फिर Long Asia Group NZ Limited में स्थानांतरित कर दिए गए। आरोप है कि यह बदलाव उनकी पूर्व सहमति के बिना किया गया।

निवेशकों का कहना है कि जनवरी 2026 तक निकासी सामान्य रही, लेकिन इसके बाद अचानक सभी निकासी बंद हो गई। रकम वापस मांगने पर तकनीकी समस्या, लिक्विडिटी की कमी, कंपनी माइग्रेशन और नियामकीय प्रक्रिया जैसे कारण बताए जाते रहे।

नकद लेनदेन और कमीशन मॉडल के आरोप

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अधिकांश निवेश बैंकिंग चैनल के बजाय नकद लिया जाता था और स्थानीय ब्रोकर भारतीय मुद्रा को ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर डॉलर के रूप में निवेश दिखाते थे। इसके अलावा 70-30 कमीशन मॉडल के जरिए एजेंटों का नेटवर्क तैयार करने का भी आरोप लगाया गया है।

संपत्तियों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की मांग

निवेशकों ने आरोप लगाया है कि निकासी बंद होने के बाद संबंधित लोगों ने खुद को केवल इंट्रोड्यूसिंग ब्रोकर (IB) बताते हुए जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। वहीं शिकायतकर्ताओं का कहना है कि लोगों का विश्वास जीतने और निवेश के लिए प्रेरित करने में उनकी सक्रिय भूमिका रही।

शिकायत में कुछ आरोपियों की आर्थिक स्थिति में अचानक हुए बदलाव का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संपत्तियों का स्रोत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

डोंगरगढ़ गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष परमजीत सिंह भाटिया ने भी बताया कि कुलजीत सिंह भाटिया को लगभग एक वर्ष पहले सलाहकार समिति से हटा दिया गया था।

पीड़ित निवेशकों ने पूरे मामले की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) से कराने, आरोपियों के बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट, संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने तथा निवेशकों की राशि वापस दिलाने की मांग की है।

फिलहाल मामले की जांच जारी है। शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट आना बाकी है।

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