

₹50 से कम कीमत वाले शेयर निवेशकों के लिए हमेशा आकर्षण का केंद्र रहते हैं, खासकर तब जब किसी बड़े ब्रोकरेज हाउस की ओर से मजबूत रिटर्न का अनुमान दिया जाए। हाल ही में एक ऐसी ही कंपनी पर फोकस बढ़ा है, जिसे लेकर वैश्विक ब्रोकरेज Nomura ने सकारात्मक रुख दिखाया है। अनुमान है कि यह स्टॉक अगले 1 साल में करीब 62% तक का रिटर्न दे सकता है। हालांकि, हर निवेश के साथ कुछ जोखिम भी जुड़े होते हैं, जिन्हें समझना जरूरी है।
ग्रोथ का बड़ा ट्रिगर प्लांट यूटिलाइजेशन में सुधार ?
कंपनी की ग्रोथ स्टोरी का सबसे बड़ा आधार उसके ग्रीनफील्ड प्लांट्स हैं। फिलहाल Q3FY26 में इन प्लांट्स की यूटिलाइजेशन करीब 45% के आसपास है, जो कि इंडस्ट्री के हिसाब से अभी कम माना जाता है। लेकिन ब्रोकरेज का मानना है कि FY27 तक यह बढ़कर 65–70% तक पहुंच सकता है।
इस सुधार के पीछे मुख्य कारण गुजरात और महाराष्ट्र में स्थित प्लांट्स में प्रोडक्शन का बढ़ना है। जैसे-जैसे इन यूनिट्स की क्षमता का बेहतर इस्तेमाल होगा, कंपनी की ऑपरेटिंग कॉस्ट कम होगी और मार्जिन में सुधार देखने को मिलेगा। यही कारण है कि निवेशकों को इसमें आगे मजबूत कमाई की उम्मीद दिखाई दे रही है।
सेक्टर आउटपरफॉर्मर बनने की तैयारी
कंपनी जिस सेक्टर में काम कर रही है, वहां डिमांड तेजी से बढ़ रही है। इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल एक्सपेंशन के चलते इस सेक्टर में आने वाले सालों में ग्रोथ की अच्छी संभावना है। ऐसे में कंपनी अपनी क्षमता बढ़ाकर और प्रोडक्शन स्केल अप करके सेक्टर के अन्य खिलाड़ियों को पीछे छोड़ सकती है।
Nomura का मानना है कि अगर कंपनी अपने एक्सपेंशन प्लान्स को समय पर पूरा करती है और डिमांड मजबूत बनी रहती है, तो यह स्टॉक ₹50 के स्तर से काफी ऊपर जा सकता है। निवेशकों के लिए यह एक मल्टीबैगर बनने की क्षमता रखता है।
निवेश से पहले जान लें ये 3 बड़े रिस्क
अगर इंडस्ट्री में डिमांड उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ी, तो कंपनी के प्लांट्स की यूटिलाइजेशन पर असर पड़ सकता है। इससे रेवेन्यू ग्रोथ धीमी हो सकती है।
ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स में अक्सर देरी देखने को मिलती है। अगर नए प्लांट्स समय पर पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाए, तो कंपनी के अनुमानित टारगेट पीछे खिसक सकते हैं।
रॉ मटेरियल की कीमतों में तेजी से बदलाव कंपनी के मार्जिन पर दबाव डाल सकता है। खासकर अगर कीमतें बढ़ती हैं और कंपनी उन्हें ग्राहकों तक पास नहीं कर पाती।
निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?

इस तरह के लो-प्राइस स्टॉक्स में निवेश करते समय लंबी अवधि का नजरिया रखना जरूरी होता है। शॉर्ट टर्म में इसमें उतार-चढ़ाव हो सकता है, लेकिन अगर कंपनी अपने ग्रोथ प्लान्स को सही तरीके से लागू करती है, तो यह निवेशकों को अच्छा रिटर्न दे सकती है। निवेश करने से पहले कंपनी के फंडामेंटल्स, सेक्टर की स्थिति और मार्केट कंडीशन का अच्छी तरह विश्लेषण जरूर करें। साथ ही, पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन बनाए रखें ताकि जोखिम कम किया जा सके। कुल मिलाकर, ₹50 से कम कीमत वाला यह शेयर हाई रिस्क-हाई रिटर्न कैटेगरी में आता है, जहां सही समय पर लिया गया फैसला आपको बड़ा फायदा दिला सकता है।









