स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: हजारों साल पुराना समुद्री मार्ग, आज भी दुनिया की धड़कन

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दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक Strait of Hormuz आज फिर चर्चा में है। ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस जलडमरूमध्य की अहमियत और भी बढ़ गई है। यह सवाल अक्सर उठता है कि आखिर यह समुद्री रास्ता बना कब था — क्या यह इंसानों द्वारा बनाया गया है या प्रकृति की देन है?

असल में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज कोई मानव निर्मित नहर नहीं है, बल्कि यह एक प्राकृतिक समुद्री मार्ग है, जो लाखों-करोड़ों साल पहले भूगर्भीय बदलावों के कारण बना। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह जलडमरूमध्य लगभग 30 से 50 मिलियन (3 से 5 करोड़) साल पहले तब बना, जब टेक्टोनिक प्लेट्स के खिसकने से फारस की खाड़ी और अरब सागर के बीच यह संकरा रास्ता विकसित हुआ। यानी यह किसी एक देश या सभ्यता द्वारा “बनाया” नहीं गया, बल्कि यह प्रकृति की लंबी प्रक्रिया का परिणाम है।

आज यह समुद्री मार्ग वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20-25% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश अपने तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते के जरिए निर्यात करते हैं। इस वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण का मतलब है पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर असर डालना।

क्यों इतना अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

इस जलडमरूमध्य की चौड़ाई सबसे संकरी जगह पर लगभग 33 किलोमीटर है, लेकिन जहाजों के आने-जाने के लिए केवल कुछ किलोमीटर चौड़ा रास्ता ही सुरक्षित माना जाता है। यही वजह है कि यहां किसी भी प्रकार का तनाव या सैन्य गतिविधि तुरंत वैश्विक चिंता का विषय बन जाती है। ईरान का इस क्षेत्र पर भौगोलिक रूप से मजबूत नियंत्रण है, क्योंकि इसका उत्तरी तट ईरान के पास आता है। यही कारण है कि जब भी क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, ईरान द्वारा इस मार्ग को बंद करने या नियंत्रित करने की धमकी दी जाती है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत यह एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है, जिस पर किसी एक देश का पूर्ण नियंत्रण नहीं माना जाता।

इतिहास में कई बार इस क्षेत्र में तनाव देखने को मिला है। 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान “टैंकर वॉर” के नाम से मशहूर संघर्ष में तेल टैंकरों पर हमले हुए थे। इसके अलावा हाल के वर्षों में भी कई बार जहाजों पर हमले और ड्रोन घटनाएं सामने आई हैं, जिससे इस मार्ग की सुरक्षा पर सवाल उठते रहे हैं। अगर यह मार्ग पूरी तरह से बंद हो जाए, तो इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ेगा। भारत जैसे देश, जो बड़े पैमाने पर तेल आयात करते हैं, उनके लिए यह स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है। वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं और आर्थिक अस्थिरता पैदा हो सकती है।

हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि इस मार्ग को लंबे समय तक पूरी तरह बंद करना आसान नहीं है, क्योंकि इससे ईरान को भी आर्थिक नुकसान होगा। साथ ही अमेरिका और उसके सहयोगी देश इस क्षेत्र में अपनी नौसेना की मजबूत मौजूदगी बनाए रखते हैं, जिससे संतुलन बना रहता है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज केवल एक समुद्री रास्ता नहीं है, बल्कि यह वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा का केंद्र बिंदु है। करोड़ों साल पहले प्रकृति द्वारा बनाया गया यह संकरा जलमार्ग आज भी दुनिया की दिशा तय करने की क्षमता रखता है।

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