
सरायपाली. विकासखंड के 27 उपार्जन केंद्रों में से 14 केंद्रों में धान का उठाव अभी तक पूर्ण रूप से नहीं हो पाया है। कई उपार्जन केंद्रों में धान खुले आसमान के नीचे पड़ा है, जो बारिश में भीगकर सड़ने की कगार पर पहुंच गया है।
न तो धान को कैप कवर से ढंका गया है और न ही इसकी सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम किए गए हैं। विशेष रूप से केना उपार्जन केंद्र की स्थिति बदतर है, जहां धान की सुरक्षा पूरी तरह भगवान भरोसे छोड़ दी गई है। यह प्रशासन की उदासीनता का स्पष्ट
उदाहरण है, जिसके चलते धान खरीदी के चार माह बाद भी उठाव नहीं हो सका। बता दें 1 नवंबर से 31 जनवरी तक समर्थन मूल्य पर सरकार ने खरीफ फसल के धान की खरीदी 3100 प्रति क्विंटल की दर से की थी। खरीदी समाप्त हुए चार माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन कई केंद्रों में धान का उठाव नहीं हो पाया है। इससे सरकार को लाखों रुपये की क्षति होने का अनुमान है। उपार्जन केंद्रों में बचे धान को कैप कवर से ढंकने की व्यवस्था नहीं की गई है। जहां कवर किए गए हैं, वहां भी चूहों के आतंक के कारण धान खराब हो रहा है। केना उपार्जन केंद्र में तो धान को ढंकने के लिए कैप कवर तक नहीं लगाया गया, जिससे खुले में पड़ा धान बारिश में भीग रहा है। जुलाई माह में 3,6 और 9 तारीख को हुई मूसलाधार बारिश के कारण कैप कवर से ढके धान भी नीचे से भीग गए। अत्यधिक नमी के कारण धान अंकुरित होने लगा है और सड़ने की स्थिति में पहुंच गया है। भोथलडीह उपार्जन केंद्र में 20 फरवरी को डबल टीओ, ट्रांसपोर्ट ऑर्डर कटने की गलती के कारण धान का उठाव रुका हुआ है। समिति प्रबंधक दिलीप नायक ने बताया कि 900 पैकेट धान का डबल टीओ गलती से कट गया था, जिससे रिकॉर्ड में धान शून्य दिख रहा है, जबकि मौके पर 900 पैकेट धान मौजूद है। इस त्रुटि को सुधारने के लिए उच्च अधिकारियों को सूचित किया गया, लेकिन कई महीने बीतने के बाद भी सुधार नहीं हुआ, जिसके चलते धान का उठाव नहीं हो सका। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, धान की सुरक्षा और समय पर उठाव सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि सरकारी खजाने को हानि होने से रोका जा सके।










