रूसा 2.0 प्रशिक्षण सफल: विज्ञान प्राध्यापकों को शोध, नवाचार और पेटेंट की नई दिशा

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रायपुर। शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर में रायपुर संभाग के विज्ञान संकाय के प्राध्यापकों के लिए आयोजित रूसा 2.0 के अंतर्गत एक सप्ताह का प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। प्राचार्य डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता ने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को आधुनिक तकनीकों, शोध और नवाचार की दिशा में नई प्रेरणा देने वाला साबित हुआ है।

आयोजन समिति सदस्य डॉ. गोवर्धन व्यास ने बताया कि प्रशिक्षण का शुभारंभ 23 फरवरी 2026 को हुआ था। सप्ताहभर चले इस कार्यक्रम में विभिन्न विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को आधुनिक अनुसंधान पद्धतियों, संगणकीय मॉडलिंग, नैनो-मटेरियल, ऊर्जा अनुप्रयोग, डीएफटी, सिएस्टा सॉफ्टवेयर, उबुन्टू लिनक्स और नवाचार परियोजनाओं पर सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया।

कार्यक्रम के अंतिम दिन (28 फरवरी) का फोकस शोध नवाचार और पेटेंट प्रक्रिया पर रहा। प्रथम तकनीकी सत्र में डॉ. शुभ्रा मिश्रा ने पेटेंट आवेदन प्रक्रिया, बौद्धिक संपदा प्रबंधन और नवाचार संरक्षण की विस्तृत जानकारी दी। वहीं द्वितीय सत्र में प्राचार्य डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता ने पेटेंट कानून, महाविद्यालय में पेटेंट की स्थिति और अनुसंधान संरक्षण की संस्थागत प्रक्रिया पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि केवल शोध करना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसके संरक्षण और सामाजिक उपयोगिता को सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।

समापन सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. एम.एस. गुप्ता ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम उच्च शिक्षा में गुणवत्ता और नवाचार को बढ़ावा देते हैं। कार्यक्रम के सह-समन्वयक डॉ. अखिलेश जाधव ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया, जबकि मंच संचालन डॉ. अनिल रामटेके ने किया।

डॉ. गोवर्धन व्यास ने छह दिवसीय गतिविधियों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस प्रशिक्षण से प्रतिभागियों को न केवल विषयगत गहराई मिली, बल्कि तकनीकी दक्षता और शोध संस्कृति को भी मजबूती मिली। विभिन्न विशेषज्ञों के व्याख्यान और हैंड्स-ऑन सत्रों ने शिक्षकों को आधुनिक अनुसंधान के व्यावहारिक पहलुओं से भी जोड़ा।

प्राचार्य डॉ. तपेश चंद्र गुप्ता ने कहा कि यह कार्यक्रम बहुविषयक अनुसंधान, संगणनात्मक विशेषज्ञता और नवाचार आधारित उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे शिक्षकों के माध्यम से संस्थानों में शोध और गुणवत्ता युक्त शिक्षा का वातावरण और मजबूत होगा।

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