
रायपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) रायपुर की बहुविशेषज्ञीय टीम ने चिकित्सकीय इतिहास में एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। टीम ने 13 वर्षीय बच्चे के फेफड़े में गहराई तक फंसी नुकीली धातु की पिन को बिना सर्जरी के सुरक्षित रूप से निकालकर उसकी जान बचा ली।
🩺 मामला क्या था?
30 जून 2025 को 13 वर्षीय बच्चा खांसी में खून आने, बुखार और सीने में दर्द की शिकायत के साथ AIIMS रायपुर के ट्रॉमा और इमरजेंसी विभाग में पहुंचा। जांच में पता चला कि वह खेलते समय एक पिन को निगल गया था, जो श्वसन नली के जरिए फेफड़े तक पहुंच गई थी।
📸 जांच में हुआ खुलासा
एक्स-रे और वीडियो ब्रोंकोस्कोपी द्वारा यह स्पष्ट हुआ कि पिन बाएं फेफड़े के निचले हिस्से की ब्रोंकस में फंसी है और वहां पर निमोनिया के लक्षण भी विकसित हो चुके थे।
🛠️ कैसे किया गया इलाज?
बच्चे को सेडेशन के साथ ब्रोंकोस्कोपी के लिए लिया गया।
सुरक्षित श्वसन मार्ग बनाए रखने के लिए I-Gel लैरिंजियल एयरवे लगाया गया।
वीडियो ब्रोंकोस्कोपी की मदद से पिन को खोजकर सावधानीपूर्वक निकाला गया।
मामूली रक्तस्राव को एड्रेनालिन और टेम्पोनाड से नियंत्रित किया गया।
➡️ अगले ही दिन बच्चे को एंटीबायोटिक्स और फिजियोथेरेपी के निर्देशों के साथ छुट्टी दे दी गई।
⚕️ चिकित्सा की दृष्टि से महत्वपूर्ण
AIIMS रायपुर की यह उपलब्धि इस बात का उदाहरण है कि कैसे उन्नत तकनीक और टीमवर्क से बिना सर्जरी के जानलेवा स्थिति को संभाला जा सकता है। यदि समय रहते हस्तक्षेप न किया गया होता, तो संक्रमण, सांस रुकना या फेफड़े को स्थायी नुकसान हो सकता था।
🧑⚕️ कौन-कौन थे इस टीम में?
🟢 डॉ. रंगनाथ टी. गंगा
🟢 डॉ. अजय बेहेरा
🟢 डॉ. प्रवीण दुबे
🟢 डॉ. राहुल चक्रवर्ती
💉 एनेस्थीसिया टीम:
डॉ. देवेंद्र त्रिपाठी, डॉ. चंदन डे, डॉ. शमा खान
🧠 रेडियोलॉजी विभाग का भी अहम सहयोग
👏 निदेशक ने दी बधाई
AIIMS रायपुर के कार्यकारी निदेशक ले. जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने पूरी टीम को चिकित्सकीय उत्कृष्टता, त्वरित निर्णय और जीवन रक्षा प्रयासों के लिए बधाई दी।
🗣️ यह मामला चिकित्सा जगत को यह सीख देता है कि कैसे समय पर, सटीक और टीम आधारित इलाज से जटिल स्थितियों में भी जीवन की रक्षा की जा सकती है।
रिपोर्ट: CG Dastak | स्वास्थ्य संवाददाता | रायपुर









