रायपुर में नशे पर रोक का आदेश या मीडियाबाज़ी? पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार पर उठाए तीखे सवाल

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रायपुर। राजधानी रायपुर के नगरीय क्षेत्र में रोलिंग पेपर, गोगो स्मोकिंग कोन और परफेक्ट रोल की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर सियासत गरमा गई है। इस आदेश पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे “अजब-गजब आदेश” बताते हुए सरकार की मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि इस आदेश से यह साफ हो गया है कि सरकार खुद मान रही है कि रायपुर में गांजा, चरस जैसे नशीले पदार्थों का सेवन बड़े पैमाने पर हो रहा है। लेकिन समस्या की जड़ पर वार करने के बजाय सिर्फ सेवन में इस्तेमाल होने वाली सामग्री पर रोक लगाना समाधान नहीं है।

“यह समाधान नहीं, दिखावटी कदम”

भूपेश बघेल ने तंज कसते हुए कहा कि यह फैसला ऐसा ही है जैसे शराबखोरी कम करने के नाम पर डिस्पोजल या कांच के गिलास और चखना बेचने पर ही रोक लगा दी जाए। उनके मुताबिक, नशे की असली जड़ तस्करी, सप्लाई और नेटवर्क हैं, जिन पर सरकार को सख्ती दिखानी चाहिए।

आदेश की समय-सीमा पर भी सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी पूछा कि यह आदेश सिर्फ 29 मार्च 2026 तक, यानी करीब दो महीने के लिए ही क्यों लागू किया गया है। अगर सरकार सच में नशे के खिलाफ गंभीर है तो इसे स्थायी क्यों नहीं बनाया गया?

उन्होंने आदेश में लिखे “यदि बीच में वापस ना लिया गया” वाक्य को भी संदेह के घेरे में रखते हुए पूछा कि आखिर ऐसा कौन है जो इसे बीच में वापस ले सकता है।

“नशा सिर्फ रायपुर नहीं, पूरे प्रदेश की समस्या”

भूपेश बघेल ने कहा कि नशे की समस्या केवल रायपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरा छत्तीसगढ़ इसकी चपेट में है। अगर सरकार गंभीर है तो उसे ठोस और प्रभावी कदम उठाने चाहिए, न कि सिर्फ मीडियाबाज़ी के लिए ऐसे आदेश जारी करने चाहिए।

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